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Unnao News: टेनरियों के प्रदूषण से काली हो गई लोन नदी
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फोटो-25-प्रदूषित पानी आने से पूरी तरह काला हुआ लोन नदी का पानी। संवाद
असोहा। जिले में कभी जीवनदायिनी रही लोन नदी का पानी आज पीने लायक तो दूर फसलों को सींचने लायक नहीं बचा है। टेनरियों के प्रदूषित पानी ने लोन नदी को विषैला बना दिया है। आलम यह है कि इसके आस-पास बसे गांवों का भूगर्भ जल तक दूषित हो गया है। विषैला हुआ पानी फसलों की सिंचाई लायक भी नहीं बचा है।
शहर के दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र से पुरवा, बीघापुर तहसील से होकर गंगा में मिलने वाली लोन नदी ग्रामीणों के लिए अभिशाप बन रही है। फैक्टरियों और टेनरियों का दूषित पानी नदी में छोड़ा जाता है। इन दिनों नदी का पानी का रंग पूरी तरह काल हो गया है। हालत यह है कि किसान अब नदी के पानी से फसलों की सिंचाई नहीं कर रहे। उन्हें सिंचाई के लिए निजी संसाधनों पर खर्च करना पड़ रहा है। नदी के विषैले पानी का असर आसपास के गांवों के भूगर्भ जल पर भी है। हैंडपंप फ्लोराइडयुक्त पानी दे रहे हैं। जिससे ग्रामीण अनेकों बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। (संवाद)
नदी के पानी से आती है दुर्गंध
लोन नदी का पानी कितना प्रदूषित है इसका अंदाजा इसके पास से गुजरने वालों को स्वत: हो जाता है। देखने में पूरी तरह से काले पानी पर लाल रंग की परत जमी रहती है। इससे उठने वाली दुर्गंध दूर तक के लोगों को नाक ढकने पर विवश कर देती है। नदी में प्रदूषित पानी छोड़े जाने का कई बार विरोध भी हुआ, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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इन गांवों के भूगर्भ जल में प्रदूषण
सदर तहसील के चांदपुर, जमुका, बड़ौरा, दुआ, जगेथा, पौंगहा, पुरवा तहसील के मंगतखेड़ा, बैगांव, अतरसई, मझखोरिया, तारागढ़ी, कासुखेड़ा, मिर्जापुर सुम्हारी, हिम्मतखेड़ा, भूलेमऊ, गदोरवा, बरबट, सिंहपुर, सरसो, टिकरिया, चमियानी, अटवट, कटहर, गढ़ाकोला, सलेथू, भाटमऊ व बीघापुर तहसील के अढौली, जाजनपुर, बैजुवामऊ, मेडीलालखेड़ा व परसंडा समेत अन्य गांवों के पास से होकर यह नदी गुजरी है। इससे करीब एक लाख आबादी दूषित भूगर्भ जल का दंश झेलने को विवश है।
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शहर के दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र से पुरवा, बीघापुर तहसील से होकर गंगा में मिलने वाली लोन नदी ग्रामीणों के लिए अभिशाप बन रही है। फैक्टरियों और टेनरियों का दूषित पानी नदी में छोड़ा जाता है। इन दिनों नदी का पानी का रंग पूरी तरह काल हो गया है। हालत यह है कि किसान अब नदी के पानी से फसलों की सिंचाई नहीं कर रहे। उन्हें सिंचाई के लिए निजी संसाधनों पर खर्च करना पड़ रहा है। नदी के विषैले पानी का असर आसपास के गांवों के भूगर्भ जल पर भी है। हैंडपंप फ्लोराइडयुक्त पानी दे रहे हैं। जिससे ग्रामीण अनेकों बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। (संवाद)
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नदी के पानी से आती है दुर्गंध
लोन नदी का पानी कितना प्रदूषित है इसका अंदाजा इसके पास से गुजरने वालों को स्वत: हो जाता है। देखने में पूरी तरह से काले पानी पर लाल रंग की परत जमी रहती है। इससे उठने वाली दुर्गंध दूर तक के लोगों को नाक ढकने पर विवश कर देती है। नदी में प्रदूषित पानी छोड़े जाने का कई बार विरोध भी हुआ, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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इन गांवों के भूगर्भ जल में प्रदूषण
सदर तहसील के चांदपुर, जमुका, बड़ौरा, दुआ, जगेथा, पौंगहा, पुरवा तहसील के मंगतखेड़ा, बैगांव, अतरसई, मझखोरिया, तारागढ़ी, कासुखेड़ा, मिर्जापुर सुम्हारी, हिम्मतखेड़ा, भूलेमऊ, गदोरवा, बरबट, सिंहपुर, सरसो, टिकरिया, चमियानी, अटवट, कटहर, गढ़ाकोला, सलेथू, भाटमऊ व बीघापुर तहसील के अढौली, जाजनपुर, बैजुवामऊ, मेडीलालखेड़ा व परसंडा समेत अन्य गांवों के पास से होकर यह नदी गुजरी है। इससे करीब एक लाख आबादी दूषित भूगर्भ जल का दंश झेलने को विवश है।

फोटो-25-प्रदूषित पानी आने से पूरी तरह काला हुआ लोन नदी का पानी। संवाद

फोटो-25-प्रदूषित पानी आने से पूरी तरह काला हुआ लोन नदी का पानी। संवाद