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रमजान में जकात अदा करना फर्ज : शहर काजी

Fri, 13 Mar 2026 12:12 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 13 Mar 2026 12:12 AM IST
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उन्नाव। शहर काजी मौलाना निसार अहमद मिस्बाही ने रमजान उल मुबारक के महीने में जकात अदा करने की फजीलत बताई है। कहा कि जकात हर मुसलमान पर फर्ज है और इसे अदा करना जरूरी है। जो इसपर अमल नहीं करता वह गुनहगार होता है।
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शहर काजी ने इस्लाम के पांच अहम सिद्धांतों का जिक्र किया। इनमें एक खुदा को मानना तौहीद, दिन में पांच बार नमाज पढ़ना और रमजान के रोजे रखना शामिल है। साहिबे हैसियत होने पर जीवन में कम से कम एक बार हज करना भी अनिवार्य है। हर साल अपनी कुल संपत्ति का कुछ हिस्सा जकात के रूप में गरीबों में बांटना भी अहम सिद्धांत है। जकात उसपर फर्ज है जिसके पास साढ़े सात तोला सोना या साढ़े बावन तोला चांदी हो। इनकी कीमत के बराबर रकम या कोई संपत्ति का मालिक भी जकात अदा करेगा। ऐसे व्यक्ति को अपनी संपत्ति की कीमत की ढाई प्रतिशत रकम जकात के रूप में निकालना बेहद जरूरी है।
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जरूरतमंदों को दी जाए जकात

जकात की रकम यतीम, बेवा औरतों, गरीबों और शरीयत के मुताबिक जरूरतमंदों को दी जानी चाहिए। इससे वे भी ईद की खुशियां मना सकें और अपनी जरूरतें पूरी कर सकें। माहे रमजान में जकात अदा करने पर अधिक सवाब मिलता है। हदीसों में इसकी फजीलत कई जगह बयान की गई है।
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