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Unnao News: साक्ष्य के अभाव में गैंगस्टर के तीन आरोपी दोषमुक्त
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उन्नाव। आसीवन थाना पुलिस ने 11 साल पहले क्षेत्र के तीन लोगों को गैंगस्टर घोषित किया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन आरोपियों के खिलाफ अदालत में पर्याप्त साक्ष्य नहीं पेश कर सका। मुकदमे के वादी भी बयानों में कार्रवाई को उचित नहीं ठहरा सका। इसपर विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट ने साक्ष्य के अभाव में तीनों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है।
औरास थाना क्षेत्र के गलरापुर उदितखेड़ा गांव में 21 फरवरी 2015 को आसीवन थाना क्षेत्र के एनीखुर्द गांव निवासी प्रशांत पांडेय का शव झाड़ियों में मिला था। जांच में पुलिस को पता चला कि लखनऊ के माल थाना क्षेत्र के वीरपुर निवासी पुतान ने आसीवन थानाक्षेत्र के ऐनी खुर्द गांव निवासी रामनरेश, रमेश और राकेश पासी के साथ मिलकर 55 हजार रुपये में हत्या की सुपारी ली थी। आसीवन थाना के तत्कालीन एसओ मनोज कुमार मिश्रा ने 11 जून 2015 को आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। पुतान को गैंग लीडर और चंद्रभान, रामनरेश, रमेश व राकेश के सक्रिय सदस्य होने का जिक्र किया था।
गैंग चार्ट में प्रशांत पांडेय के अपहरण और हत्या से जुड़े मामले को आधार बनाकर आरोप लगाया था कि यह गिरोह सुपारी लेकर हत्याएं करता है और आर्थिक-भौतिक लाभ अर्जित करता है। इससे इलाके में दहशत है। विवेचना के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल हुआ था। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने पांच गवाही कराई।न्यायालय में जिरह के दौरान वादी मनोज मिश्रा, आरोपियों के आर्थिक लाभ और उन लोगों का नाम भी नहीं बता पाए जिन्होंने गैंग के भय की बात कही थी। प्राथमिकी अज्ञात में होने के बाद विवेचना में आरोपियों के नाम किस साक्ष्य या बयान के आधार पर शामिल किए गए, यह नहीं बता पाए। न्यायालय ने पुतान, रामनरेश और रमेश उर्फ नन्हकू चौरसिया को दोषमुक्त करने का आदेश दिया। आरोपी चंद्रभान की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई थी। उनकी पत्रावली पहले ही बंद की जा चुकी थी।
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इंसेट
ध्वस्त हुई पुलिस की थ्योरी
पुलिस का मुख्य आरोप था कि आरोपियों का इलाके में इतना खौफ है कि लोग उनके खिलाफ नामजद प्राथमिकी नहीं करवाते हैं। इसी वजह से प्रशांत हत्याकांड में पिता विनोद कुमार पांडेय ने आरोपियों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई। जब विनोद न्यायालय में आए तो उन्होंने आरोपियों को जानने से इन्कार कर दिया। इससे यह साबित नहीं हो सका कि रिपोर्ट डर या खौफ की वजह से अज्ञात में लिखाई गई थी।
हाईकोर्ट में विचाराधीन है अपील
प्रशांत पांडेय हत्याकांड में सभी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। आरोपियों ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी स्वीकार की थी। मौजूदा समय आरोपी जमानत पर बाहर हैं।
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औरास थाना क्षेत्र के गलरापुर उदितखेड़ा गांव में 21 फरवरी 2015 को आसीवन थाना क्षेत्र के एनीखुर्द गांव निवासी प्रशांत पांडेय का शव झाड़ियों में मिला था। जांच में पुलिस को पता चला कि लखनऊ के माल थाना क्षेत्र के वीरपुर निवासी पुतान ने आसीवन थानाक्षेत्र के ऐनी खुर्द गांव निवासी रामनरेश, रमेश और राकेश पासी के साथ मिलकर 55 हजार रुपये में हत्या की सुपारी ली थी। आसीवन थाना के तत्कालीन एसओ मनोज कुमार मिश्रा ने 11 जून 2015 को आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। पुतान को गैंग लीडर और चंद्रभान, रामनरेश, रमेश व राकेश के सक्रिय सदस्य होने का जिक्र किया था।
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गैंग चार्ट में प्रशांत पांडेय के अपहरण और हत्या से जुड़े मामले को आधार बनाकर आरोप लगाया था कि यह गिरोह सुपारी लेकर हत्याएं करता है और आर्थिक-भौतिक लाभ अर्जित करता है। इससे इलाके में दहशत है। विवेचना के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल हुआ था। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने पांच गवाही कराई।न्यायालय में जिरह के दौरान वादी मनोज मिश्रा, आरोपियों के आर्थिक लाभ और उन लोगों का नाम भी नहीं बता पाए जिन्होंने गैंग के भय की बात कही थी। प्राथमिकी अज्ञात में होने के बाद विवेचना में आरोपियों के नाम किस साक्ष्य या बयान के आधार पर शामिल किए गए, यह नहीं बता पाए। न्यायालय ने पुतान, रामनरेश और रमेश उर्फ नन्हकू चौरसिया को दोषमुक्त करने का आदेश दिया। आरोपी चंद्रभान की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई थी। उनकी पत्रावली पहले ही बंद की जा चुकी थी।
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ध्वस्त हुई पुलिस की थ्योरी
पुलिस का मुख्य आरोप था कि आरोपियों का इलाके में इतना खौफ है कि लोग उनके खिलाफ नामजद प्राथमिकी नहीं करवाते हैं। इसी वजह से प्रशांत हत्याकांड में पिता विनोद कुमार पांडेय ने आरोपियों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई। जब विनोद न्यायालय में आए तो उन्होंने आरोपियों को जानने से इन्कार कर दिया। इससे यह साबित नहीं हो सका कि रिपोर्ट डर या खौफ की वजह से अज्ञात में लिखाई गई थी।
हाईकोर्ट में विचाराधीन है अपील
प्रशांत पांडेय हत्याकांड में सभी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। आरोपियों ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी स्वीकार की थी। मौजूदा समय आरोपी जमानत पर बाहर हैं।