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सीएचसी में तीन घंटे में दो नवजात की मौत, हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
Updated Fri, 17 Aug 2018 01:42 AM IST
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नवाबगंज सीएचसी में नवजात बच्चे की मौत के बाद हंगामा करते लक्ष्मी के परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तीन घंटे के अंतराल में दो नवजात बच्चों की मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। आरोप है कि समय से उपचार न मिलने की वजह से बच्चों की मौत हुई।
अजगैन कसबा निवासी यासीन पत्नी सलीम को बुधवार रात प्रसव पीड़ा होने पर परिजन नवाबगंज सीएचसी लेकर आए। सलीम का आरोप है कि दो घंटे तक स्टाफ नर्स ने यासीन को हाथ नहीं लगाया। रात करीब एक बजे उसे भर्ती किया गया। कुछ देर बाद यासीन ने मृत बच्चे को जन्म दिया। सलीम का आरोप है कि अगर पत्नी को समय से भर्ती कर लिया जाता तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।
इसी तरह अजगैन थानाक्षेत्र के मकूर निवासी बद्री का आरोप है कि वह गुरुवार सुबह करीब पांच बजे पत्नी लक्ष्मी को लेकर नवाबगंज सीएचसी पहुंचा। हालांकि जब तक वह डाक्टर से संपर्क करता तब तक लक्ष्मी का एंबुलेंस में ही प्रसव हो गया। जन्म के कुछ देर बाद ही बच्चे ने दम तोड़ दिया। सूचना पर पहुंची डा. रुचि त्रिपाठी ने लक्ष्मी को वार्ड में भर्ती कराया। जबकि बच्चे को इमरजेंसी वार्ड में भेज दिया। बद्री का आरोप है कि डॉ. गौतम ने बच्चे को वार्ड के बाहर जमीन पर रखवा दिया। इसकी सूचना भी परिजनों को नहीं दी गई। परिजनों के हंगामा करने पर शव उन्हें दिया गया। डॉ. रुचि त्रिपाठी ने बताया कि दोनों बच्चे मृत हालत में अस्पताल आए थे। इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई है।
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नवाबगंज सीएचसी में बीते 24 घंटे के अंदर 21 प्रसव हुए। डा. रुचि त्रिपाठी ने बताया कि यह पहली बार है कि अस्पताल में इतने कम समय में इतनी अधिक संख्या में प्रसव कराए गए। उन्होंने बताया कि अस्पताल में जितने भी प्रसव हुए हैं उनमें जच्चा बच्चा की हालत सामान्य है।
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अजगैन कसबा निवासी यासीन पत्नी सलीम को बुधवार रात प्रसव पीड़ा होने पर परिजन नवाबगंज सीएचसी लेकर आए। सलीम का आरोप है कि दो घंटे तक स्टाफ नर्स ने यासीन को हाथ नहीं लगाया। रात करीब एक बजे उसे भर्ती किया गया। कुछ देर बाद यासीन ने मृत बच्चे को जन्म दिया। सलीम का आरोप है कि अगर पत्नी को समय से भर्ती कर लिया जाता तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।
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इसी तरह अजगैन थानाक्षेत्र के मकूर निवासी बद्री का आरोप है कि वह गुरुवार सुबह करीब पांच बजे पत्नी लक्ष्मी को लेकर नवाबगंज सीएचसी पहुंचा। हालांकि जब तक वह डाक्टर से संपर्क करता तब तक लक्ष्मी का एंबुलेंस में ही प्रसव हो गया। जन्म के कुछ देर बाद ही बच्चे ने दम तोड़ दिया। सूचना पर पहुंची डा. रुचि त्रिपाठी ने लक्ष्मी को वार्ड में भर्ती कराया। जबकि बच्चे को इमरजेंसी वार्ड में भेज दिया। बद्री का आरोप है कि डॉ. गौतम ने बच्चे को वार्ड के बाहर जमीन पर रखवा दिया। इसकी सूचना भी परिजनों को नहीं दी गई। परिजनों के हंगामा करने पर शव उन्हें दिया गया। डॉ. रुचि त्रिपाठी ने बताया कि दोनों बच्चे मृत हालत में अस्पताल आए थे। इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई है।
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नवाबगंज सीएचसी में बीते 24 घंटे के अंदर 21 प्रसव हुए। डा. रुचि त्रिपाठी ने बताया कि यह पहली बार है कि अस्पताल में इतने कम समय में इतनी अधिक संख्या में प्रसव कराए गए। उन्होंने बताया कि अस्पताल में जितने भी प्रसव हुए हैं उनमें जच्चा बच्चा की हालत सामान्य है।