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Unnao News: दो और बांग्लादेशी घुसपैठियों का पता चला, टीमें तलाश में जुटीं

Wed, 26 Feb 2025 12:15 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 26 Feb 2025 12:15 AM IST
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Two more Bangladeshi intruders detected, teams engaged in search
औद्योगिक क्षेत्र की एक फैक्टरी के बाद जांच के दौरान मौजूद लोग।  - फोटो : औद्योगिक क्षेत्र की एक फैक्टरी के बाद जांच के दौरान मौजूद लोग।
उन्नाव। पश्चिम बंगाल के रास्ते देश में घुसपैठ करके उन्नाव तक पहुंचे पांच बांग्लादेशियों की गिरफ्तार के बाद पुलिस प्रशासन के साथ खुफिया एजेंसियों के भी कान खड़े हो गए हैं। इनका नेटवर्क तोड़ने में जुटी पुलिस को दो और घुसपैठियों के बारे में जानकारी हाथ लगी है, जिनकी गिरफ्तारी के लिए टीमों को लगाया गया है। बांग्लादेशियों के मददगारों के बारे में पुलिस को जानकारी मिली है जिनकी तलाश में दबिश दी जा रही हैं। एसपी के मुताबिक, पकड़े गए बांग्लादेशियों से बरामद हुए सभी 16 मोबाइलों को डेटा निकलवाने के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया है। इनकी मदद से और भी जानकारियां जल्द सामने आएंगी।
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भारतीय रुपयों के बदले ज्यादा रियाल (सऊदी अरब की करेंसी) देने का लालच देकर ठगी करने वाले पांच बांग्लादेशियों को गिरफ्तार कर जेल भेजने के बाद पुलिस ने अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश शुरू कर दी है। दंपती सहित जिन पांच लोगों को पकड़ा गया है वह सभी नवीन मंडी और गोशाला के पास गदनखेड़ा मोहल्ले में किराये के कमरे में अलग-अलग रह रहे थे। जांच में जुटी पुलिस को कई अहम सुराग मिले हैं। गिरफ्तार किए गए बांग्लादेशियों के संपर्क में रहने वाले कई और लोग उन्नाव और आसपास के जिलों में रह रहे हैं। पता चला है कि यह लोग फेरी लगाकर कबाड़, सब्जी व अन्य सामग्री बेचने और फैक्टरियों में मजदूरी भी करते थे। मौका मिलते ही चोरी, लूट और ठगी की घटनाओं को भी अंजाम देते थे। मालूम हो कि रायबरेली जिले के थाना लालगंज निवासी मानू सोनी से 21 फरवरी को भारतीय करेंसी में 1.55 लाख रुपये के तीन लाख के रियाल देने का झांसा देकर ठगी की गई थी, इसी घटना की जांच के दौरान पुलिस के हाथ पांच बांग्लादेशी घुसपैठिये लगे।
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एसपी दीपक भूकर ने बताया कि आरोपियों के पास से मिले सभी मोबाइल फोन और बांग्लादेश के सिम को जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया है। जो डेटा डिलीट किया गया होगा वह भी सामने आ जाएगा और बड़े गिरोह का खुलासा होने की आशंका है। बताया कि जांच में आईबी की भी मदद ली जा रही है। दो और बांग्लादेशियों का और पता चला है। जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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जिले में पहले भी पकड़े जा चुके हैं घुसपैठिया और आतंकी
उन्नाव। राजधानी लखनऊ और महानगर कानपुर के बीच स्थित उन्नाव में छिपने के लिए कई सुरक्षित ठिकाने हैं। उन्नाव शहर विदेशियों और आतंकियों पनाहगाह के रूप में पहले भी सामने आ चुका है। हालांकि शहर व आसपास क्षेत्रों में किरायेदारों और फैक्टरी श्रमिकों का सत्यापन कराने के लिए पुलिस ने कई बार योजना बनाई लेकिन वह जमीनी हकीकत नहीं बन पाई। इसी का नतीजा है कि अपराधी दूसरे जिलों और प्रांतों में वारदातों को अंजाम देने के बाद यहां ठिकाना बनाकर रहने लगे। यहां भी वारदातों को अंजाम देने के बाद आसानी से निकल जाते हैं। (संवाद)

पूर्व की घटनाओं पर एक नजर
- जुलाई 2023 में यूपी एटीएस ने बिहार प्रांत के स्लाटर हाउस से रिजवान खान नाम के आतंकी को गिरफ्तार किया था। उससे पूछताछ में पता चला था कि वह वर्ष 2023 के फरवरी और मार्च महीने में दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक स्लाटर हाउस में काम कर चुका था। फैक्टरी ने जिस सिक्योरिटी एजेंसी से 20 सुरक्षा कर्मी लिए थे, उनमें रिजवान भी था। दो महीने बाद कंपनी ने उसे बिहार प्रांत भेज दिया था।
- मार्च 2021 में एटीएस ने मोहल्ला अनवार नगर में रहकर मानव तस्करी में लिप्त रोहिंग्या शाहिद को गिरफ्तार किया था। उसने अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता, एटीएम और पासपोर्ट बनवा लिया था। उसने 2010 में अलीगढ़ से अपना वोटर आईडी कार्ड भी बनवा लिया था।
- मार्च 2017 में भोपाल में ट्रेन में हुए विस्फोट के बाद एटीएस ने लखनऊ के ठाकुरगंज में आतंकी सैफुल्ला को एनकाउंटर में मार गिराया था। नेशनल इनवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) के हत्थे चढ़े कानपुर के गौस मोहम्मद और फैसल को लेकर एनआईए एसपी दीपक कुमार 28 मार्च 2017 को शहर आए थे। जांच में पता चला था कि आतंकी सैफुल्ला और उसके साथी शहर की दरगाहों में जायरीन बनकर कई-कई दिन रुक चुके थे। इनमें रेलवे स्टेशन के पास स्थित बुद्धनशाह और किला मोहल्ला स्थित मस्जिद उनकी सबसे पसंदीदा जगह थीं।
- फरवरी 2018 में दही चौकी स्थित एक स्लाटर हाउस में काम कर रहे रोहिंग्या मुसलमानों को एटीएस ने पकड़ा था।
- 2008 में जौनपुर में विस्फोट की घटना में शामिल नूर आलम ने दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र में एक बंद फैक्ट्री के पीछे विस्फोटक छिपाकर रखा था। उन्नाव स्पेशल कोर्ट ने नूर आलम उम्रकैद की सजा सुनाई थी।


- फरवरी 2012 को दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने सात महीने से बांगरमऊ के मदारनगर स्थित एक मदरसे में मौलवी बनकर रह रहे बशीर हसन नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया था।
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