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Unnao News: समय बढ़ा, लागत बढ़ी पर धरातल में नहीं उतरीं परियोजनाएं
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उन्नाव। जनपद में 2015 से निर्माणाधीन करोड़ों की परियोजनाएं आज तक धरातल पर नहीं उतर सकी हैं। इससे लोगों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका है। जबकि समय बढ़ने के साथ ही इन परियाेजनाओं की लागत भी बढ़ गई।
अधिकारियों ने पुनरीक्षण इस्टीमेट भी शासन को भेज दिया लेकिन आज तक मंजूरी नहीं मिल सकी है।
परियोजना-एक
वर्ष 2015 में डायट कैंपस (नार्मल स्कूल के पीछे) राजकीय बालिका डिग्री कालेज को मंजूरी मिली थी। इसके लिए 4.77 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस उप्र जल निगम यूनिट-26 को नामित किया गया था। मई 2015 में निर्माण कार्य शुरू हुआ था। दो साल में काम पूरा करना था लेकिन जैसे, जैसे समय बढ़ता गया वैसे, वैसे कालेज निर्माण की लागत भी बढ़ती गई।
जिसका पुनरीक्षित 9.71 करोड़ का प्रस्ताव 2018 व 2019 में तैयार कराकर मंजूरी के लिए शासन को भेजा गया था। जिसके बाद न तो पुनरीक्षित बजट को ही मंजूरी मिल पाई और ना ही निर्माण कार्य ही पुन: शुरू हो पाया। आज भी महाविद्यालय अधूरा पड़ा हुआ है। जानकारों के मुताबिक, शहर में कोई भी सरकारी महाविद्यालय नहीं है। जिस कारण यहां की छात्राओं को अर्धसरकारी व प्राइवेट डिग्री कालेजों में महंगी पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
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शहीद गुलाब सिंह लोधी पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में एसटीपी निर्माण की स्वीकृति 3 अगस्त 2015 को मिली थी। साथ ही 3.01 करोड़ रुपये भी जारी हुए थे। इसमें सीवर लाइन का काम किया गया। इसके बाद निर्माण कार्य ले आउट पूर्ण होने के बाद सर्वेक्षण करके 8.61 करोड़ का पुनरीक्षित प्रस्ताव तैयार किया गया। इसे कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस द्वारा पुलिस मुख्यालय को भेजा गया। यह काम भी आज तक पूरा नहीं हो सका है।
भगवंतनगर के रायपुर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र निर्माण को सितंबर 2021 में मंजूरी मिली थी। 2.16 करोड़ का बजट भी जारी हुआ था। जुलाई 2023 में परियोजना का काम पूरा होना था लेकिन आज तक यह भवन बनकर तैयार नहीं हो सका है। वर्तमान में चिकित्सालय भवन व दीवार का कार्य पूर्ण होने का दावा कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल द्वारा किया जा रहा है। इसके बाद भी समय पर काम पूरा नहीं हो सका और संस्था द्वारा करीब 50 लाख का पुनरीक्षित लागत का प्रस्ताव बनाकर महानिदेशक चिकित्सा को भेजा गया। जिससे काम पूरा किया जा सके।
लंबित और पुनरीक्षित प्रस्ताव वाली परियोजनाओं पर नजर है। हर माह समीक्षा की जा रही है। कार्यदायी संस्थाओं से भी जानकारी की जा रही है। जो प्रस्ताव लखनऊ मुख्यालयस्तर पर लंबित हैं, उसके लिए रिमाइंडर भी जारी किया गया है। -ऋषिराज, सीडीओ।
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अधिकारियों ने पुनरीक्षण इस्टीमेट भी शासन को भेज दिया लेकिन आज तक मंजूरी नहीं मिल सकी है।
परियोजना-एक
वर्ष 2015 में डायट कैंपस (नार्मल स्कूल के पीछे) राजकीय बालिका डिग्री कालेज को मंजूरी मिली थी। इसके लिए 4.77 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस उप्र जल निगम यूनिट-26 को नामित किया गया था। मई 2015 में निर्माण कार्य शुरू हुआ था। दो साल में काम पूरा करना था लेकिन जैसे, जैसे समय बढ़ता गया वैसे, वैसे कालेज निर्माण की लागत भी बढ़ती गई।
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जिसका पुनरीक्षित 9.71 करोड़ का प्रस्ताव 2018 व 2019 में तैयार कराकर मंजूरी के लिए शासन को भेजा गया था। जिसके बाद न तो पुनरीक्षित बजट को ही मंजूरी मिल पाई और ना ही निर्माण कार्य ही पुन: शुरू हो पाया। आज भी महाविद्यालय अधूरा पड़ा हुआ है। जानकारों के मुताबिक, शहर में कोई भी सरकारी महाविद्यालय नहीं है। जिस कारण यहां की छात्राओं को अर्धसरकारी व प्राइवेट डिग्री कालेजों में महंगी पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
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शहीद गुलाब सिंह लोधी पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में एसटीपी निर्माण की स्वीकृति 3 अगस्त 2015 को मिली थी। साथ ही 3.01 करोड़ रुपये भी जारी हुए थे। इसमें सीवर लाइन का काम किया गया। इसके बाद निर्माण कार्य ले आउट पूर्ण होने के बाद सर्वेक्षण करके 8.61 करोड़ का पुनरीक्षित प्रस्ताव तैयार किया गया। इसे कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस द्वारा पुलिस मुख्यालय को भेजा गया। यह काम भी आज तक पूरा नहीं हो सका है।
भगवंतनगर के रायपुर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र निर्माण को सितंबर 2021 में मंजूरी मिली थी। 2.16 करोड़ का बजट भी जारी हुआ था। जुलाई 2023 में परियोजना का काम पूरा होना था लेकिन आज तक यह भवन बनकर तैयार नहीं हो सका है। वर्तमान में चिकित्सालय भवन व दीवार का कार्य पूर्ण होने का दावा कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल द्वारा किया जा रहा है। इसके बाद भी समय पर काम पूरा नहीं हो सका और संस्था द्वारा करीब 50 लाख का पुनरीक्षित लागत का प्रस्ताव बनाकर महानिदेशक चिकित्सा को भेजा गया। जिससे काम पूरा किया जा सके।
लंबित और पुनरीक्षित प्रस्ताव वाली परियोजनाओं पर नजर है। हर माह समीक्षा की जा रही है। कार्यदायी संस्थाओं से भी जानकारी की जा रही है। जो प्रस्ताव लखनऊ मुख्यालयस्तर पर लंबित हैं, उसके लिए रिमाइंडर भी जारी किया गया है। -ऋषिराज, सीडीओ।