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Unnao News: हिंदी को सहेज रही युवा पीढ़ी, विदेशों तक में बजा रहे डंका

Thu, 14 Sep 2023 12:36 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 14 Sep 2023 12:36 AM IST
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The young generation is saving Hindi and is making noise even in foreign countries.
उन्नाव। हिंदी हमारी भाषा ही नहीं बल्कि मातृभाषा है। हर साल 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी मनाया जाता है। उन्नाव जिले की पहचान हिंदी और साहित्यकारों से है। उन्नाव को साहित्य की उर्वरा भूमि कहा जाता है। यहां पंडित गया प्रसाद शुक्ल सनेही, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, चंद्रभूषण त्रिवेदी उर्फ रमई काका, जगदंबा प्रसाद मिश्र हितैषी, भगवती चरण वर्मा, शिवमंगल सिंह सुमन, सुमित्रा कुमारी सिन्हा जैसे अनगिनत साहित्यकारों ने हिंदी की नई ऊंचाईयां दीं। जिले में कई युवा कवि व साहित्यकार हैं जो हिंदी को सहेज रहे हैं। वह राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं वैश्विक पटल पर भी हिंदी का परचम लहरा रहे हैं।
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आटा बंथर गांव निवासी कवि स्वयं श्रीवास्तव ने देश और विदेशों में हिंदी की धाक जमा रहे हैं। साहित्यिक सफर में उन्होंने अपने मुक्तकों के माध्यम से अन्य युवाओं को भी हिंदी की ओर आकर्षित किया है। उनके मुक्तक, ‘मुश्किल थी संभलना ही पड़ा घर के वास्ते, घर से निकलना ही पड़ा घर के वास्ते’। देश-विदेश में इंट्राग्राम पर कई लाख रील्स बन चुकी हैं। स्वयं श्रीवास्तव अगस्त 2022 को बैंकाक में आयोजित कवि सम्मेलन में भी काव्यपाठ कर चुके हैं। देश के लोकप्रिय कवियों में शुमार है।
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उंचगांव सानी के निवासी कवि अनिरुद्ध सौरभ ने मंच संचालन में अपना सिक्का जमाया है। पेशे से अध्यापक अनिरुद्ध अपनी प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम कमा रहे हैं। काव्य मंचों के कुशल संचालक, समीक्षक में शुमार हैं। कई राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। इनकी रचनाओं में ‘अभी गीत की नदी हमारी, पर्वत पर से उतर रही है। हंस के दे दी है जिन्होंने यज्ञ कुंडों में जवानी’ आदि काफी लोकप्रिय हैं। वह अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों के मंचों से भी काव्यपाठ करते हैं।
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सफीपुर के नरहरपुर गांव निवासी श्रद्धा पांडेय ने हिंदी काव्य मंचों पर कम उम्र में ही अपनी पहचान बनाई है। बीए की छात्रा श्रद्धा के मुक्तक श्रोताओं को खूब पंसद आ रहे हैं। श्रृंगार के गीतों के साथ ओज कविता में भी अच्छी पकड़ रखती हैं। श्रद्धा को जिले और प्रदेश स्तरीय कई सम्मान मिल चुके हैं। ये मन मुझे रोने नहीं देता,ये गम मुझे सोने नहीं देता, तेरी चाहत में डूब गई लेकिन, तु मुझे अपना होने नहीं देता आदि अच्छी रचनाओं में हैं। वह कई अखिल भारतीय मंच भी साझा कर चुकी हैं।

इब्राहिमपुर गांव निवासी सौम्या तिवारी 2018 से निबंध, कविता और कहानी लिख रही हैं। सामाजिक और सम-सामयिक विषयों पर अपनी कलम से शब्दों को पिरोने वाली सौम्या को कई संस्थाओं ने सम्मानित किया है। काव्य मंचों पर उनकी लोकहित से जुड़ी कविताएं लोगों को खूब पसंद आ रही हैं। उनकी रचनाओं में ‘राह भटके को दिखाना कठिन है, हर समय मुस्कुराना कठिन है, प्रश्न करना सरल है, प्रश्न का उत्तर बताना कठिन है ’ जैसी रचनाएं खूब चर्चा में हैं। कई राष्ट्रीय मंचों पर भी काव्य पाठ कर चुकीं हैं।
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