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Unnao News: साकार हो रहा रामलला के मंदिर का सपना
Sat, 13 Jan 2024 02:44 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
Updated Sat, 13 Jan 2024 02:44 AM IST
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औरास। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, रामभक्तों में मंदिर के लिए किए गए उस समय के आंदोलन की यादें ताजा हो गई हैं। जब भक्तों को रामकाज के लिए जेल की हवा खानी पड़ी थी।
वर्ष 1990 में औरास ब्लाक के राम भक्तों में भी मंदिर निर्माण के लिए हुई कार सेवा में अयोध्या पहुंचने को लेकर काफी उत्साह था। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में कार सेवा के लिए जाने का जोश हिलोरे मार रहा था लेकिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल सहित अन्य हिंदूवादी संगठनों की पुलिस ने सूची तैयार कर रखी थी। राम भक्तों पर हर समय गिरफ्तारी का खतरा मंडराता रहता था। इस राम मंदिर आंदोलन में कई राम भक्त अयोध्या जाने में सफल भी हुए थे लेकिन अधिकांश लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इन राम भक्तों को पुलिस ने उन्नाव की जेल में 15 से 20 दिन तक बंद रखा था। आंदोलन की अगुवाई करने वाले नेताओं की तरफ से गिरफ्तार न होने के निर्देश थे। आंदोलन की धार कमजोर न पड़े इसलिए राम भक्त घरों में न रहकर दूसरी जगहों पर रहते थे। जो घरों में रहते थे पुलिस के आने पर फरार हो जाते थे। इसके बावजूद औरास कस्बे और आसपास के गांवों के राम भक्तों में रामलखन गुप्ता, रामऔतार द्विवेदी, राम आसरे यादव, मुन्नी लाल द्विवेदी समेत 21 राम भक्तों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
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औरास कस्बे के ही निवासी बृजेश त्रिपाठी ने बताया कि आज प्रभु श्री राम का मंदिर का बनना हमारे जीवन की सबसे बड़ी सार्थकता है। हम धन्य है कि आंदोलन करने के बाद अपने नेत्रों से परम सुख देख रहे हैं।
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औरास कस्बे निवासी रामआसरे यादव का कहना है कि उन्होंने वर्ष 1990 में मंदिर बनाने की सौगंध खाई थी। आज वह प्रतिज्ञा पूरी होने का समय आ गया है। 33 साल बाद रामलला का मंदिर बनने का उनका सपना पूरा हुआ है। 22 जनवरी के उस पल का वह बेसब्री से इंंतजार कर रहे हैं। जब रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी।
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राम मंदिर बनने से जीवन धन्य
गंजमुरादाबाद। कस्बे निवासी 85 वर्षीय रविशंकर रस्तोगी ने भगवान श्रीराम मंदिर आंदोलन में जेल गए थे और 22 दिन जेल में बिताए थे।
कस्बे के मोहल्ला बड़ी बजार निवासी और राष्ट्र भक्ति के कार्यक्रमों बढ़ चढ़कर भाग लेने वाले रविशंकर रस्तोगी बताते हैं कि छह दिसंबर 1992 की कार सेवा में जाने के लिए जत्था तैयार कर रहे थे। लेकिन एक सप्ताह पहले ही पुलिस ने घर से गिरफ्तार कर लिया। उन्हें उन्नाव के बाद रायबरेली जेल भेज दिया गया। उन्हें 125 साथियों के साथ 22 दिनों तक जेल में रखा गया। बताया कि छह दिसंबर को 1992 को विवादित ढांचा, कार सेवकों द्वारा ढहाए जाने की सूचना मिली तो खुशी से फूले नहीं समाए। जेल में भी जय श्रीराम के नारे गूंजे। भगवान श्रीराम का मंदिर बनते देख वे जीवन सार्थक मान रहे हैं।
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वर्ष 1990 में औरास ब्लाक के राम भक्तों में भी मंदिर निर्माण के लिए हुई कार सेवा में अयोध्या पहुंचने को लेकर काफी उत्साह था। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में कार सेवा के लिए जाने का जोश हिलोरे मार रहा था लेकिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल सहित अन्य हिंदूवादी संगठनों की पुलिस ने सूची तैयार कर रखी थी। राम भक्तों पर हर समय गिरफ्तारी का खतरा मंडराता रहता था। इस राम मंदिर आंदोलन में कई राम भक्त अयोध्या जाने में सफल भी हुए थे लेकिन अधिकांश लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इन राम भक्तों को पुलिस ने उन्नाव की जेल में 15 से 20 दिन तक बंद रखा था। आंदोलन की अगुवाई करने वाले नेताओं की तरफ से गिरफ्तार न होने के निर्देश थे। आंदोलन की धार कमजोर न पड़े इसलिए राम भक्त घरों में न रहकर दूसरी जगहों पर रहते थे। जो घरों में रहते थे पुलिस के आने पर फरार हो जाते थे। इसके बावजूद औरास कस्बे और आसपास के गांवों के राम भक्तों में रामलखन गुप्ता, रामऔतार द्विवेदी, राम आसरे यादव, मुन्नी लाल द्विवेदी समेत 21 राम भक्तों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
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औरास कस्बे के ही निवासी बृजेश त्रिपाठी ने बताया कि आज प्रभु श्री राम का मंदिर का बनना हमारे जीवन की सबसे बड़ी सार्थकता है। हम धन्य है कि आंदोलन करने के बाद अपने नेत्रों से परम सुख देख रहे हैं।
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औरास कस्बे निवासी रामआसरे यादव का कहना है कि उन्होंने वर्ष 1990 में मंदिर बनाने की सौगंध खाई थी। आज वह प्रतिज्ञा पूरी होने का समय आ गया है। 33 साल बाद रामलला का मंदिर बनने का उनका सपना पूरा हुआ है। 22 जनवरी के उस पल का वह बेसब्री से इंंतजार कर रहे हैं। जब रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी।
राम मंदिर बनने से जीवन धन्य
गंजमुरादाबाद। कस्बे निवासी 85 वर्षीय रविशंकर रस्तोगी ने भगवान श्रीराम मंदिर आंदोलन में जेल गए थे और 22 दिन जेल में बिताए थे।
कस्बे के मोहल्ला बड़ी बजार निवासी और राष्ट्र भक्ति के कार्यक्रमों बढ़ चढ़कर भाग लेने वाले रविशंकर रस्तोगी बताते हैं कि छह दिसंबर 1992 की कार सेवा में जाने के लिए जत्था तैयार कर रहे थे। लेकिन एक सप्ताह पहले ही पुलिस ने घर से गिरफ्तार कर लिया। उन्हें उन्नाव के बाद रायबरेली जेल भेज दिया गया। उन्हें 125 साथियों के साथ 22 दिनों तक जेल में रखा गया। बताया कि छह दिसंबर को 1992 को विवादित ढांचा, कार सेवकों द्वारा ढहाए जाने की सूचना मिली तो खुशी से फूले नहीं समाए। जेल में भी जय श्रीराम के नारे गूंजे। भगवान श्रीराम का मंदिर बनते देख वे जीवन सार्थक मान रहे हैं।