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Unnao News: काउंसिल मेंबर कमेटी के जरिए कुलपति से हर माह मिल सकेंगे छात्र
Sun, 07 Apr 2024 12:36 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
Updated Sun, 07 Apr 2024 12:36 AM IST
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काउंसिल मेंबर कमेटी के जरिए कुलपति से हर माह मिल सकेंगे छात्रकुलपति के आदेश पर चार टॉपर सहित 12 छात्रों की बनेगी कमेटी
संवाद न्यूज एजेंसी
नवाबगंज। एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) के उपस्थिति मानक पूरा न होने के चलते एमबीबीएस छात्रों को परीक्षा में बैठने को लेकर विवाद चल रहा है। अब कुलपति ने दोनों साल के छात्रों को काउंसिल मेंबर बनाकर मासिक बैठक के जरिए समस्या बताने की व्यवस्था तैयार की है। साथ ही छात्रों को पढ़ाई पर ध्यान देने के साथ आंदोलन न करने, सोशल मीडिया पर अनावश्यक सक्रियता, शिक्षक डॉक्टरों से अभद्रता करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
साल 2019 और 20 के 32 एमबीबीएस छात्र-छात्राओं को नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) की नियमानुसार उपस्थिति मानक 75 प्रतिशत से कम होने पर आगामी अगस्त को होने वाली अर्धवार्षिक परीक्षा में बैठने से रोका गया था। इसके बाद छात्रों ने छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति विनय पाठक से मिलकर समस्या के निदान की गुहार लगाई थी। शुक्रवार को कुलपति विनय पाठक, परीक्षा नियंत्रक राकेश कुमा व जीएसवीएम के दो डॉक्टर्स सहित पांच लोगों की जांच टीम सरस्वती मेडिकल काॅलेज पहुंची थी। टीम ने प्राचार्य आरएन श्रीवास्तव व एमएस श्वेतांक अग्रवाल से मुलाकात कर काॅलेज की मेडिकल इकाई का निरीक्षण कर हालातों का जायजा लिया था। इसके बाद टीम के सदस्य परीक्षा से निष्कासित 32 छात्रों से भी मिले थे। टीम को पता चला कि उपस्थिति का मानक कम होने पर कुल 147 छात्रों को परीक्षा में न बैठने का नोटिस जारी किया गया था लेकिन 115 छात्रों ने कॉलेज से मिले मौके में बढ़त बनाते हुए अतिरिक्त कक्षाओं के साथ ही असाइनमेंट पूरा कर परीक्षा में बैठने का मौका हासिल कर लिया। जबकि 32 छात्र बढ़त नहीं बना पाए थे। अभी भी छात्रों को एक और मौका देकर 28 अप्रैल तक सभी मानक पूरा कर परीक्षा में शामिल होने को कहा है। वहीं कुलपति ने छात्रों को बड़ी राहत देते हुए काउंसिल मेंबर कमेटी बनाने की बात कही है। साल 2019-20 के दोनों बैच के दो -दो टॉपरों को कोऑर्डिनेटर के साथ ही छह-छह अन्य छात्रों को आपसी संस्तुति के बाद कमेटी में शामिल किया जाएगा। यह टीम प्रति माह काॅलेज के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विश्वविद्यालय के कुलपति से मिलकर समस्या बताएगी।
इंसेट-1
टीम ने किया वार्ड का निरीक्षण
कुलपति समेत जांच टीम में शामिल जीएसवीएम के डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज के मरीज भर्ती वार्ड समेत ओपीडी का हाल जाना। जहां उन्हें वार्ड में भर्ती और ओपीडी में मरीज दिखाते मिले। इस दौरान प्राचार्य ने टीम को एमबीबीएस छात्रों के लिए पर्याप्त मरीज प्रशिक्षण के लिए बताए।
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इंसेट-2सब कुछ रखेंगे पारदर्शी
जांच टीम से एमबीबीएस छात्रों ने आंतरिक परीक्षा अंकों को सार्वजनिक करने की मांग की। इस पर
परीक्षा नियंत्रक को अंकों को सार्वजनिक करने के आदेश दिए गए। छात्रों ने प्रवेश पत्र सीधे विश्वविद्यालय से देने की मांग की तो कुलपति ने एसएमसी से उपस्थिति पंजिका मानक सहित व किसी प्रकार की देनदारी फीस आदि का नोड्यूज लेकर आने पर विश्वविद्यालय से ही प्रवेश पत्र देने का आश्वासन दिया।
इंसेट-3
छात्रों के अभिभावकों को ठहराने के होंगे प्रबंध
एमबीबीएस में अध्ययनरत छात्र छात्राओं से हॉस्टल में मिलने के लिए आने वाले उनके अभिभावकों के रात्रि विश्राम के लिए कालेज प्रबंधन जल्द व्यवस्था करेगा। प्राचार्य ने बताया कि कमरा/ हाल के प्रबंध के बाद मामूली किराए लेकर ठहराने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए कालेज प्रशासन व चेयरमैन से बात की जाएगी। अभी तक छात्रों के अभिभावकों को काॅलेज परिसर में रुकने की अनुमति नहीं थी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नवाबगंज। एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) के उपस्थिति मानक पूरा न होने के चलते एमबीबीएस छात्रों को परीक्षा में बैठने को लेकर विवाद चल रहा है। अब कुलपति ने दोनों साल के छात्रों को काउंसिल मेंबर बनाकर मासिक बैठक के जरिए समस्या बताने की व्यवस्था तैयार की है। साथ ही छात्रों को पढ़ाई पर ध्यान देने के साथ आंदोलन न करने, सोशल मीडिया पर अनावश्यक सक्रियता, शिक्षक डॉक्टरों से अभद्रता करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
साल 2019 और 20 के 32 एमबीबीएस छात्र-छात्राओं को नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) की नियमानुसार उपस्थिति मानक 75 प्रतिशत से कम होने पर आगामी अगस्त को होने वाली अर्धवार्षिक परीक्षा में बैठने से रोका गया था। इसके बाद छात्रों ने छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति विनय पाठक से मिलकर समस्या के निदान की गुहार लगाई थी। शुक्रवार को कुलपति विनय पाठक, परीक्षा नियंत्रक राकेश कुमा व जीएसवीएम के दो डॉक्टर्स सहित पांच लोगों की जांच टीम सरस्वती मेडिकल काॅलेज पहुंची थी। टीम ने प्राचार्य आरएन श्रीवास्तव व एमएस श्वेतांक अग्रवाल से मुलाकात कर काॅलेज की मेडिकल इकाई का निरीक्षण कर हालातों का जायजा लिया था। इसके बाद टीम के सदस्य परीक्षा से निष्कासित 32 छात्रों से भी मिले थे। टीम को पता चला कि उपस्थिति का मानक कम होने पर कुल 147 छात्रों को परीक्षा में न बैठने का नोटिस जारी किया गया था लेकिन 115 छात्रों ने कॉलेज से मिले मौके में बढ़त बनाते हुए अतिरिक्त कक्षाओं के साथ ही असाइनमेंट पूरा कर परीक्षा में बैठने का मौका हासिल कर लिया। जबकि 32 छात्र बढ़त नहीं बना पाए थे। अभी भी छात्रों को एक और मौका देकर 28 अप्रैल तक सभी मानक पूरा कर परीक्षा में शामिल होने को कहा है। वहीं कुलपति ने छात्रों को बड़ी राहत देते हुए काउंसिल मेंबर कमेटी बनाने की बात कही है। साल 2019-20 के दोनों बैच के दो -दो टॉपरों को कोऑर्डिनेटर के साथ ही छह-छह अन्य छात्रों को आपसी संस्तुति के बाद कमेटी में शामिल किया जाएगा। यह टीम प्रति माह काॅलेज के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विश्वविद्यालय के कुलपति से मिलकर समस्या बताएगी।
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टीम ने किया वार्ड का निरीक्षण
कुलपति समेत जांच टीम में शामिल जीएसवीएम के डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज के मरीज भर्ती वार्ड समेत ओपीडी का हाल जाना। जहां उन्हें वार्ड में भर्ती और ओपीडी में मरीज दिखाते मिले। इस दौरान प्राचार्य ने टीम को एमबीबीएस छात्रों के लिए पर्याप्त मरीज प्रशिक्षण के लिए बताए।
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इंसेट-2सब कुछ रखेंगे पारदर्शी
जांच टीम से एमबीबीएस छात्रों ने आंतरिक परीक्षा अंकों को सार्वजनिक करने की मांग की। इस पर
परीक्षा नियंत्रक को अंकों को सार्वजनिक करने के आदेश दिए गए। छात्रों ने प्रवेश पत्र सीधे विश्वविद्यालय से देने की मांग की तो कुलपति ने एसएमसी से उपस्थिति पंजिका मानक सहित व किसी प्रकार की देनदारी फीस आदि का नोड्यूज लेकर आने पर विश्वविद्यालय से ही प्रवेश पत्र देने का आश्वासन दिया।
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छात्रों के अभिभावकों को ठहराने के होंगे प्रबंध
एमबीबीएस में अध्ययनरत छात्र छात्राओं से हॉस्टल में मिलने के लिए आने वाले उनके अभिभावकों के रात्रि विश्राम के लिए कालेज प्रबंधन जल्द व्यवस्था करेगा। प्राचार्य ने बताया कि कमरा/ हाल के प्रबंध के बाद मामूली किराए लेकर ठहराने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए कालेज प्रशासन व चेयरमैन से बात की जाएगी। अभी तक छात्रों के अभिभावकों को काॅलेज परिसर में रुकने की अनुमति नहीं थी।