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गेहूं खरीद के भुगतान में सख्ती, 24 घंटे में खाते में पहुंचेगा पैसा
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अचलगंज में खोला गया गेहूं क्रय केंद्र ।
- फोटो : UNNAO
उन्नाव। प्रदेश सरकार ने गेहूं खरीद में बिचौलियों का काम समाप्त करने के लिए भुगतान में सख्ती कर दी है। यह व्यवस्था सभी क्रय केंद्रों पर लागू की गई है। इन केंद्रों पर उपज बेचने वाले किसानों को 24 घंटे में भुगतान मिल सकेगा। शर्त यह रहेगी कि किसान को खतौनी व बैंक खाते की डिटेल शत-प्रतिशत सही देनी होगी।
जिले में 15 अप्रैल से सरकारी गेहूं खरीद शुरू हुई है। खरीद के लिए खोले गए 71 क्रय केंद्रों में सबसे ज्यादा पीसीएफ के 48 क्रय केंद्र हैं। विपणन विभाग और एसएफसी के 6-6 केंद्र हैं। यूपीस्टेट एग्रो के 3 व कर्मचारी कल्याण निगम के 2, यूपीएसएस के 2, नैफेड के 3 और एफसीआई के 1 केंद्र पर गेहूं खरीद हो रही है। शासन ने गेहूं के लिए 1925 रुपये प्रति क्विंटल का रेट तय किया है। प्रदेश सरकार ने धान में लागू की गई पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) भुगतान की व्यवस्था को गेहूं में भी शुरू किया है। उपज बेचने वाले किसानों को 24 घंटे में भुगतान मिल जाएगा।
पूर्व में किसानों को भुगतान की जो व्यवस्था थी उसमें प्रत्येक क्रय केंद्र प्रभारी को एक अलग खाता खुलवाना पड़ता था। शासन से उनके खाते में पैसा भेजा जाता था। केंद्र प्रभारी अपने खाते से किसानों के खाते में आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान भेजते थे। तब 72 घंटे में खाते में पैसा पहुंचाने की बाध्यता थी। किसान का बैंक खाता न होने पर उसके बताए अनुसार रिश्तेदार या परिचित के खाते में पैसा भेज दिया जाता था। लेकिन अब खतौनी में दर्ज नाम का ही बैंक खाता मान्य होगा।
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जिला खाद्य विपणन अधिकारी राजीव कुलश्रेष्ठ ने बताया कि अब इस व्यवस्था में केवल उसी किसान के खाते में ही पैसा भेजा जाएगा जिसके नाम खतौनी है। यदि बैंक और खतौनी में अलग-अलग नाम होगा तो भुगतान नहीं दिया जाएगा। किसान को खतौनी के नाम का ही खाता खुलवाना होगा।
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जिले में 15 अप्रैल से सरकारी गेहूं खरीद शुरू हुई है। खरीद के लिए खोले गए 71 क्रय केंद्रों में सबसे ज्यादा पीसीएफ के 48 क्रय केंद्र हैं। विपणन विभाग और एसएफसी के 6-6 केंद्र हैं। यूपीस्टेट एग्रो के 3 व कर्मचारी कल्याण निगम के 2, यूपीएसएस के 2, नैफेड के 3 और एफसीआई के 1 केंद्र पर गेहूं खरीद हो रही है। शासन ने गेहूं के लिए 1925 रुपये प्रति क्विंटल का रेट तय किया है। प्रदेश सरकार ने धान में लागू की गई पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) भुगतान की व्यवस्था को गेहूं में भी शुरू किया है। उपज बेचने वाले किसानों को 24 घंटे में भुगतान मिल जाएगा।
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पूर्व में किसानों को भुगतान की जो व्यवस्था थी उसमें प्रत्येक क्रय केंद्र प्रभारी को एक अलग खाता खुलवाना पड़ता था। शासन से उनके खाते में पैसा भेजा जाता था। केंद्र प्रभारी अपने खाते से किसानों के खाते में आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान भेजते थे। तब 72 घंटे में खाते में पैसा पहुंचाने की बाध्यता थी। किसान का बैंक खाता न होने पर उसके बताए अनुसार रिश्तेदार या परिचित के खाते में पैसा भेज दिया जाता था। लेकिन अब खतौनी में दर्ज नाम का ही बैंक खाता मान्य होगा।
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जिला खाद्य विपणन अधिकारी राजीव कुलश्रेष्ठ ने बताया कि अब इस व्यवस्था में केवल उसी किसान के खाते में ही पैसा भेजा जाएगा जिसके नाम खतौनी है। यदि बैंक और खतौनी में अलग-अलग नाम होगा तो भुगतान नहीं दिया जाएगा। किसान को खतौनी के नाम का ही खाता खुलवाना होगा।