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Unnao News: आम को रोग से बचाने के लिए कीटनाशक का छिड़काव शुरू
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संवाद न्यूज एजेंसी
गंजमुरादाबाद। फरवरी का महीना शुरू होते ही आम के पेड़ों में बौर आने लगा है। बाग मालिकों ने बौर को रोग से बचाने के लिए कीटनाशक का छिड़काव करना शुरू कर दिया है।
कस्बा व आसपास के गांवों में भारी संख्या में आम के बाग हैं। फरवरी में बौर आते ही उसमें रोग और भुनगा कीट के हमले की आशंका बढ़ गई है। भुनगा (मैंगो हॉपर) छोटा तिकोने शरीर वाला होता है जो आम का सबसे विनाशकारी कीट माना जाता है। यह कीट मौसम खराब होने के कारण लग जाता है। इस कीट के लगने बौर काला पड़कर सूख जाता है। इसको देखते हुए बाग मालिकों ने कीटनाशक का छिड़काव शुरू कर दिया है।
कृषि बीज भंडार कार्यालय प्रभारी देवी सिंह ने बागबानों को पहला छिड़काव बौर के 2-3 इंच की अवस्था पर, दूसरा छिड़काव उसके 15-20 दिन बाद और तीसरा छिड़काव अमिया के सरसों के दाने के बराबर हो जाने पर करने की सलाह दी है।
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पूर्व में पेड़ों में आया बौर सूखा
पूर्व में गर्म मौसम होने के कारण क्षेत्र के कई बागों में दिसंबर के अंतिम और जनवरी के प्रथम सप्ताह में बेमौसम बौर आ गया था। जो अब काला होकर सूखकर गिरने लगा है। जिस पेड़ों पर बौर आ गया था उसमें अब बौर नहीं दिख रहा है। जिससे उस पेड़ में फसल आने की संभावना नहीं है। इससे बागबानों को नुकसान होने की आशंका बनी हुई है।
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गंजमुरादाबाद। फरवरी का महीना शुरू होते ही आम के पेड़ों में बौर आने लगा है। बाग मालिकों ने बौर को रोग से बचाने के लिए कीटनाशक का छिड़काव करना शुरू कर दिया है।
कस्बा व आसपास के गांवों में भारी संख्या में आम के बाग हैं। फरवरी में बौर आते ही उसमें रोग और भुनगा कीट के हमले की आशंका बढ़ गई है। भुनगा (मैंगो हॉपर) छोटा तिकोने शरीर वाला होता है जो आम का सबसे विनाशकारी कीट माना जाता है। यह कीट मौसम खराब होने के कारण लग जाता है। इस कीट के लगने बौर काला पड़कर सूख जाता है। इसको देखते हुए बाग मालिकों ने कीटनाशक का छिड़काव शुरू कर दिया है।
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कृषि बीज भंडार कार्यालय प्रभारी देवी सिंह ने बागबानों को पहला छिड़काव बौर के 2-3 इंच की अवस्था पर, दूसरा छिड़काव उसके 15-20 दिन बाद और तीसरा छिड़काव अमिया के सरसों के दाने के बराबर हो जाने पर करने की सलाह दी है।
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पूर्व में पेड़ों में आया बौर सूखा
पूर्व में गर्म मौसम होने के कारण क्षेत्र के कई बागों में दिसंबर के अंतिम और जनवरी के प्रथम सप्ताह में बेमौसम बौर आ गया था। जो अब काला होकर सूखकर गिरने लगा है। जिस पेड़ों पर बौर आ गया था उसमें अब बौर नहीं दिख रहा है। जिससे उस पेड़ में फसल आने की संभावना नहीं है। इससे बागबानों को नुकसान होने की आशंका बनी हुई है।