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सपा जिला महासिचव पर कानपुर में दर्ज हैं १४ मामले
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उन्नाव। सपा के जिला महासचिव पर शनिवार को दर्ज हुआ मामला पहला नहीं है। इससे पहले भी कानपुर के चकेरी थाने में धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में 14 मामले दर्ज हैं। वर्ष 2013 में गंगाघाट थाना पुलिस ने इन पर धोखाधड़ी का एक मामला दर्ज किया था। जिसमें बाद में एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लग गई थी।
नई दिल्ली के द्वारका थाना क्षेत्र के संस्कृति अपार्टमेंट निवासी कारोबारी राजीव चौधरी ने गंगाघाट कोतवाली के मोहल्ला सुभाष नगर निवासी सपा नेता सुरेश पाल, उनके भाई राजकुमार और शिवकुमार पर धोखाधड़ी का आरोप लगा रविवार को थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस सुरेश पाल पर दर्ज अन्य मामलों को खंगलाने में जुट गई। कोतवाल ओपी राय ने बताया कि सपा के जिला महासचिव पर यह 16वां मामला दर्ज हुआ है। 14 मामले कानपुर के चकेरी व एक मामला वर्ष 2013 में गंगाघाट थाना में धोखाधड़ी की धारा में दर्ज हुआ था, जिसमें फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई है। शनिवार को दर्ज हुई रिपोर्ट में बिंदुवार मामले की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सुरेश पाल पूर्व कैबिनेट मंत्री स्व. रामशंकर पाल के भतीजे हैं। वह वर्ष 1996 और 2002 में बहुजन समाज पार्टी से बांगरमऊ के विधायक चुने गए। वह बसपा सरकार में मंत्री भी रहे थे। बांगरमऊ के पूर्व सजायाफ्ता विधायक कुलदीप सेंगर को सजा होने से रिक्त हुई सीट पर 2020 में हुए उपचुनाव मेें सुरेश पाल को सपा ने अपना प्रत्याशी बनाया था। लेकिन वह जीत नही पाए।
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नई दिल्ली के द्वारका थाना क्षेत्र के संस्कृति अपार्टमेंट निवासी कारोबारी राजीव चौधरी ने गंगाघाट कोतवाली के मोहल्ला सुभाष नगर निवासी सपा नेता सुरेश पाल, उनके भाई राजकुमार और शिवकुमार पर धोखाधड़ी का आरोप लगा रविवार को थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस सुरेश पाल पर दर्ज अन्य मामलों को खंगलाने में जुट गई। कोतवाल ओपी राय ने बताया कि सपा के जिला महासचिव पर यह 16वां मामला दर्ज हुआ है। 14 मामले कानपुर के चकेरी व एक मामला वर्ष 2013 में गंगाघाट थाना में धोखाधड़ी की धारा में दर्ज हुआ था, जिसमें फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई है। शनिवार को दर्ज हुई रिपोर्ट में बिंदुवार मामले की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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सुरेश पाल पूर्व कैबिनेट मंत्री स्व. रामशंकर पाल के भतीजे हैं। वह वर्ष 1996 और 2002 में बहुजन समाज पार्टी से बांगरमऊ के विधायक चुने गए। वह बसपा सरकार में मंत्री भी रहे थे। बांगरमऊ के पूर्व सजायाफ्ता विधायक कुलदीप सेंगर को सजा होने से रिक्त हुई सीट पर 2020 में हुए उपचुनाव मेें सुरेश पाल को सपा ने अपना प्रत्याशी बनाया था। लेकिन वह जीत नही पाए।
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