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बटाईदार खरीदकर खेत मालिक को दे रहे गेहूं
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Fri, 17 Apr 2015 12:55 AM IST
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गंजमुरादाबाद। मौसम की मार बटाई में खेती करने वाले किसान के लिए अभिशाप साबित हुई है। इन्हें खेत मालिकों को अपने पास से खरीद कर गेहूं देना पड़ रहा है। इससे बटाई पर खेती करने वाले किसानों के परिवारों के सामने भुखमरी जैसी समस्या उत्पन्न हो गई है।
गेहूं की बुवाई शुरू होते ही प्रकृति की मार पड़नी शुरू हो गई है। कई बार बारिश, आंधी व ओलावृष्टि होने के कारण अन्य फसलों के साथ-साथ गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है। किसानों को लागत मूल्य तक नसीब हो पाना मुश्किल है।
ऐसी स्थिति में बटाई पर खेती करने वाले किसानों के लिए विषम परिस्थिति उत्पन्न हो गई है। नगर के मोहल्ले अहिराना निवासी बाबू यादव ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष एक किसान से तीन बीघा खेत बटाई पर लिया था। जिसमें किसान को 14 क्विंटल गेहूं देने की बात तय हुई थी।
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तीन बीघे के खेत में इस बार मात्र 16 क्विंटल ही गेहूं की पैदावार हुई जिसमें सात क्विंटल गेहूं कटाई, मड़ाई और अन्य कार्य में बंट गई। शेष बची नौ कुंतल उन्होंने खेत मालिकों को दे दी और पांच कुंतल गेहूं बाजार से खरीद कर उन्हें देने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
इसी प्रकार ग्राम धुरधरखेड़ा निवासी रामलखन ने बताया कि उसने दो बीघा खेत 10 क्विंटल गेहूं देने की बात पर बटाई पर लिया था। खेत में मात्र नौ क्विंटल ही गेहूं की पैदावार हुई। जिसमें कटाई, मड़ाई और ढुलाई आदि में चार क्विंटल गेहूं चला गया। अभी पांच कुंतल गेहूं बाजार से खरीद कर किसान को देने है, जबकि बटाईदार किसान को खाद, बीज, पानी और रखवाली आदि पर काफी व्यय करना पड़ता है।
इस बार प्रकृति की मार से बटाईदार किसान तबाह हो गया। ऐसी स्थिति में इन बटाईदार किसानों के परिवारों को सालभर भरणपोषण करना मुश्किल होगा। यहां तक ऐसे परिवारों के सामने भुखमरी की समस्या खड़ी हो जाएगी।
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गेहूं की बुवाई शुरू होते ही प्रकृति की मार पड़नी शुरू हो गई है। कई बार बारिश, आंधी व ओलावृष्टि होने के कारण अन्य फसलों के साथ-साथ गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है। किसानों को लागत मूल्य तक नसीब हो पाना मुश्किल है।
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ऐसी स्थिति में बटाई पर खेती करने वाले किसानों के लिए विषम परिस्थिति उत्पन्न हो गई है। नगर के मोहल्ले अहिराना निवासी बाबू यादव ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष एक किसान से तीन बीघा खेत बटाई पर लिया था। जिसमें किसान को 14 क्विंटल गेहूं देने की बात तय हुई थी।
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तीन बीघे के खेत में इस बार मात्र 16 क्विंटल ही गेहूं की पैदावार हुई जिसमें सात क्विंटल गेहूं कटाई, मड़ाई और अन्य कार्य में बंट गई। शेष बची नौ कुंतल उन्होंने खेत मालिकों को दे दी और पांच कुंतल गेहूं बाजार से खरीद कर उन्हें देने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
इसी प्रकार ग्राम धुरधरखेड़ा निवासी रामलखन ने बताया कि उसने दो बीघा खेत 10 क्विंटल गेहूं देने की बात पर बटाई पर लिया था। खेत में मात्र नौ क्विंटल ही गेहूं की पैदावार हुई। जिसमें कटाई, मड़ाई और ढुलाई आदि में चार क्विंटल गेहूं चला गया। अभी पांच कुंतल गेहूं बाजार से खरीद कर किसान को देने है, जबकि बटाईदार किसान को खाद, बीज, पानी और रखवाली आदि पर काफी व्यय करना पड़ता है।
इस बार प्रकृति की मार से बटाईदार किसान तबाह हो गया। ऐसी स्थिति में इन बटाईदार किसानों के परिवारों को सालभर भरणपोषण करना मुश्किल होगा। यहां तक ऐसे परिवारों के सामने भुखमरी की समस्या खड़ी हो जाएगी।