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लाखों के घोटाले के आरोपी भेजे गए जेल

Sat, 02 Sep 2017 01:04 AM IST
उन्नाव
उन्नाव Updated Sat, 02 Sep 2017 01:04 AM IST
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Scam accused sent to jail
घोटाले के आरोपियों को कोर्ट ले जाते अजगैन कोतवाल संतोष तिवारी - फोटो : अमर उजाला
लाखों के घोटाले के आरोपी भेजे गए जेल
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नवाबगंज विकासखंड के गांवों में मनरेगा व बीआरजीएफ में हुए लाखों के घोटाले में गिरफ्तार पूर्व ब्लाक प्रमुख के पुत्र और उसके साथी पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश किया। न्यायालय ने न्यायिक अभिरक्षा में दोनों को जेल भेज दिया। दोनों की गिरफ्तारी के बाद घोटाले में नामित डेढ़ दर्जन अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की सांसे अटक गई हैं।

जुलाई 2015 में विकासखंड के मलांव से क्षेत्र पंचायत सदस्य रहीं प्रभुता सिंह ने तत्कालीन सीडीओ से  2014-15 और 2015-16 में मनरेगा से कई गांवों में कागजों पर नौ निर्माण कार्य दिखाकर मेसर्स बाबा ब्रिक्स व सूर्या ट्रेडर्स गौरा कठेरवा को लाखों रुपये का फर्जी भुगतान किए जाने की शिकायत की थी।
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जांच में 22 लाख के फर्जी भुगतान पर अजगैन थाने में 26 दिसंबर 2016 को पूर्व प्रमुख पुत्र धीरेंद्र प्रताप सिंह, तत्कालीन बीडीओ सुषमा देवी व मुकुल कुमार श्रीवास्तव, सूर्या ट्रेडर्स के दुर्गेश प्रताप सिंह, सहायक लेखाकार देशरत्न शुक्ला, सहायक लेखाकार धर्मेंद्र सिंह, ग्राम पंचायत अधिकारी सुंदरलाल गुप्ता, तकनीकी सहायक चंद्रसेन पाल व अनिल रावत, ग्राम प्रधान राजेश कुमार, भैंसौरा प्रधान रामभरोसे (अब मृतक) और हिम्मतगढ़ ग्राम पंचायत विकास अधिकारी शामिल थे।
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धीरेंद्र व दुर्गेश प्रताप को अजगैन पुलिस ने गुरुवार को गिरफ्तार किया था। शुक्रवार को कोतवाल संतोष तिवारी ने दोनों को कोर्ट में पेश किया। बीडीओ सुषमा देवी मौजूदा समय में जिले की औरास ब्लाक की खंड विकास अधिकारी हैं। इसके अलावा लेखाकार धर्मेंद्र सिंह व देशरत्न शुक्ला भी अभी जिले में ही कार्यरत हैं।

बीआरजीएफ के 23 लाख घोटाले में 8 पर है मुकदमा
नवाबगंज ब्लाक में ही सात साल पहले भी कागजों पर काम दिखाकर पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि (बीआरजीएफ) योजना से लाखों रुपये निकाले गए। 2010-11 और 2011-12 में बीआरजीएफ योजना से आठ काम स्वीकृत हुए थे। इनकी  कार्यों के नाम पर 23,13, 900 रुपये का भुगतान हुआ।


बिना काम के 23 लाख रुपये निकालने की पुष्टि होने पर अप्रैल में जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी वीके सिंह ने तत्कालीन ब्लाक प्रमुख मनोज कुमार पुत्र शिवशंकर, तत्कालीन ब्लाक प्रमुख माया देवी पत्नी अवधेश प्रताप, तत्कालीन खंड विकास अधिकारी वीरेंद्र सिंह, कार्यप्रभारी एडीओ पंचायत अविनाश कुमार, ग्राम पंचायत अधिकारी परशुराम वर्मा, जेई लघु सिंचाई रघुनाथ सिंह, कनिष्ठ लेखाकार धर्मेंद्र कुमार व एनआरईपी राजकुमार पर मुकदमा दर्ज कराया गया था। 

 
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