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रोडवेज चालक को पीटा, लूटा

Fri, 15 Jul 2016 12:26 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव Updated Fri, 15 Jul 2016 12:26 AM IST
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roadways driver was beaten up and looted
नारेबाजी करते लोग - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

कांग्रेस हाईकमान ने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को 2017 के चुनाव में उत्तर प्रदेश का सीएम पद का प्रत्याशी घोषित किया है। पार्टी के इस फैसले से ‘हाथ’ के साथियों को फिर से किसी चमत्कार की उम्मीद है। बीस साल पहले उन्नाव की बहू शीला दीक्षित ने जिले का सांसद बनकर दिल्ली पहुंचने का रास्ता सोचा था, लेकिन तब जनता ने उन्हें नकार दिया था। बाद में किस्मत ने उनका साथ दिया और वह तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं।

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दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री व उन्नाव की बहू शीला दीक्षित को कांग्रेस पार्टी ने सूबे में मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाए जाने से जिले के लोगों में खुशी है। फतेहपुर चौरासी ब्लाक के ऊगू कसबा निवासी केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री और दो राज्यों के राज्यपाल रह चुके दिवंगत उमाशंकर दीक्षित के बेटे विनोद दीक्षित से शीला दीक्षित की शादी हुई थी। इमरजेंसी से पहले शीला दीक्षित का ज्यादा समय अपनी ससुराल उन्नाव में ही बीता। ट्रेन में सफर के दौरान उनके पति विनोद दीक्षित की मृत्यु हो गई थी। राजनीतिक विरासत संभालने के लिए शीला दीक्षित ने पहली बार 1984 में कन्नौज से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंची और केंद्र में मंत्री बनीं। 1989 में हुए चुनाव में शीला चुनाव हार गईं। इसके बाद 1996 में उन्होंने अपनी ससुराल यानी उन्नाव लोकसभा क्षेत्र सांसद बनकर दिल्ली जाने का रास्ता सोचा लेकिन इस चुनाव में भी जिले की जनता ने उन्हें नकार दिया। उन्हें 11037 वोट मिले और इस तरह से शीला दीक्षित को पांचवे स्थान पर संतोष करना पड़ा। 1996 के चुनाव में जमानत जब्त होने के बाद शीला दीक्षित ने दोबारा प्रदेश की राजनीति में दखल नहीं दी। 1998 में वह दिल्ली की सीएम बनीं और लगातार तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बनकर हैट्रिक लगाई।
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चुनाव हारने के बाद दो बार उन्नाव आईं शीला दीक्षित
उन्नाव संसदीय सीट से हुई चुनावी हार में शीला दीक्षित को गहरा धक्का लगा और अपनी ससुराल के प्रति उनका मोह भी कम हो गया। पिछली बार जनवरी 2008 को वह अपने ससुर उमाशंकर दीक्षित के जयंती कार्यक्रम में शामिल होने ऊगू आई थीं। इसके बाद फरवरी 2009 में वह अपने पारिवारिक गौतम दीक्षित के भतीजे कपिल दीक्षित की शादी में आई थीं। उनके बेटे संदीप दीक्षित भी आए थे।
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वीरान है कसबा और पैतृक मकान
जो कसबा में कभी केंद्रीय मंत्री और राज्यपाल का होने से सुर्खियों में रहता था आज उपेक्षा का शिकार है। यहां शीला दीक्षित का पैतृक आवास है। परिवार के लोग उस मकान की देखभाल करते हैं। उन्नाव का जिला अस्पताल कांग्रेस नेता शीला दीक्षित के ससुर के नाम से है जबकि ऊगू में एक स्कूल उनकी सास शिवप्यारी दीक्षित के नाम पर है।

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