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झील में छोड़े गए 50 कछुए
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Fri, 24 Jul 2015 11:40 PM IST
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अजगैन/नवाबगंज(उन्नाव)। मुंबई एयरपोर्ट पर तस्करों के हाथ से छुड़ाए गए 375 कछुए में दुर्लभ प्रजाति के 50 कछुए को नवाबगंज पक्षी विहार झील में नई जिंदगी मिलेगी। शुक्रवार को विश्व कछुआ दिवस पर इन्हें झील में छोड़ा गया। इस झील में इनका कुनबा बढ़ने की उम्मीद है। यह सब हुआ टर्टिल सर्विलांस अलायंस (टीएसए) नामक संस्था की मदद से।
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मुंबई एयरपोर्ट पर 23 मई को दुर्लभ प्रजाति के 375 कछुओं को तस्करों के हाथ से छुड़ाया गया था। टीएसए ने जब प्रयास शुरू किए और कछुओं से जुड़ी और जानकारियां एकत्र की तो पता चला कि यह कछुए खासतौर से उत्तर प्रदेश में पाए जाते हैं और विलुप्त होने वाले कछुओं की श्रेणी में है। पहले मुंबई कस्टम विभाग ने इन्हें मुंबई में ही किसी झील में छोड़ने की योजना बनाई।
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संस्था के लोगों ने बताया कि में इनकी जिंदगी खतरे में पड़ सकती है क्योंकि वातावरण की दृष्टि से यहां रहना उनके अनुकूल नहीं है। जिसके बाद संस्था ने प्रदेश सरकार की मदद से प्रमुख सचिव वन विभाग से संपर्क किया। इसके बाद तय हुआ कि इन्हें यूपी में ही अलग-अलग स्थानों पर छोड़ा जाएगा। शुक्रवार को विश्व कछुआ दिवस पर प्रमुख सचिव वन ने भी इसमें भागीदारी करने की सहमति दे दी। जिसके तहत शुक्रवार को पछी विहार में टीएसए इंडिया संस्था की ओर से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जहां मुख्य अतिथि के रूप में प्रमुख सचिव वन संजीव सरन ने जिले के नोडल अफसर धीरज साहू व जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल के साथ झील में 50 दुर्लभ प्रजाति के नर व मादा कछुओं को झील में छोड़ा गया है।
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ऐसे में झील में इनका कुनबा बढ़ने की उम्मीद है। संरक्षण शिक्षाधिकारी अरुणिमा सिंह ने बताया कि लखनऊ के कुकरैल में कछुओं की विलुप्त हो रही प्रजातियों को संरक्षित किया जा रहा है। टीएसए इंडिया उत्तर प्रदेश वन विभाग के मार्गदर्शन में कुकरैल गाइडेंड नेचर टूर का संचालन कर रही है। टीएसए इंडिया के निदेशक शैलेंद्र सिंह ने बताया कि भारत में 28 तरह की कछुआ प्रजातियां पाई जाती हैं।
उत्तर भारत में कछुओं की 15 प्रजातियां ही मिलती हैं। बताया कि विदेशों में तस्करी होना कछुओं की प्रजातियों के विलुप्त होने का एक कारण है। इस दौरान कंजरवेटर संजय श्रीवास्तव, वार्डेन सुमित सक्सेना, डीएफओ वीके मिश्रा, रेंजर रघुनाथ मिश्रा, यूबी सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।