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मृतका के परिजनों को निर्भया फंड व रानी लक्ष्मीबाई कोष से मदद मिलने में संशय
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उन्नाव। दुष्कर्म पीड़िता को जिंदा जलाने और इलाज के दौरान मौत की घटना में मृतका के परिजनों को केंद्र सरकार की निर्भया फंड और प्रदेश सरकार की रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष भी आर्थिक सहायता देने में फेल नजर आ रही हैं। इन दोनों योजनाओं से जिले को कोई धनराशि नहीं प्राप्त हुई है। जानकारी के अनुसार इसमें नियमों के पेंच आड़े आ रहे हैं।
नई दिल्ली में वर्ष 2012 में निर्भया गैंगरेप कांड के बाद केंद्र सरकार ने निर्भया फंड की शुरुआत की थी। फंड में एक हजार करोड़ रुपये की भारी भरकम धनराशि भी दी थी। इसका मकसद दुष्कर्म पीड़िता या उनके परिजनों को आर्थिक सहायता देना था। हालांकि जिला प्रोबेशन अधिकारी रेनू यादव निर्भया फंड से दुष्कर्म पीड़ितों को किसी प्रकार की आर्थिक सहायता देने के लिए धनराशि मिलने की बात से इनकार करती हैं। उनका कहना है कि निर्भया फंड से किसी प्रकार का पैसा विभाग को नहीं मिला है। एक सखी वन स्टाप सेंटर संचालित है, जिसके लिए पैसा मिलता है।
वहीं, प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 में रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना शुरू की थी। योजना के तहत दुष्कर्म पीड़िताओं और उनके परिजनों को आर्थिक सहायता दी जाती है। इसमें सरकार ने तीन श्रेणी तय कर रखी हैं। पहली है धारा आईपीसी 376ए। इसमें यदि पीड़िता की मौत हो जाती है या वह कोमा में चली जाती है तो उसके परिजनों को 10 लाख की सहायता दी जाती है। दूसरी है 376सी। इसमें पीड़िता का रेप होने की पुष्टि हो और रिपोर्ट दर्ज हो तो उसके खाते में तीन लाख रुपये दिए जाते हैं। अंतिम 376डी है। इस मामले में गैंगरेप पीड़िता को ही सात लाख की सहायता देने का प्रावधान है। योजना में मृतका का परिवार योजना के दायरे में आता नहीं दिख रहा है।
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जिला प्रोबेशन अधिकारी रेनू यादव ने बताया कि यह मामला बिहार और रायबरेली में दर्ज हुआ था। बाद में पूरा मामला रायबरेली स्थानांतरित हो गया था। दूसरी बात यह है कि घटना सरकार द्वारा निर्धारित की गई श्रेणी में नहीं आ रही है। ऐसे में योजना से मृतका के परिजनों को आर्थिक सहायता मिलने पर संशय है।
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नई दिल्ली में वर्ष 2012 में निर्भया गैंगरेप कांड के बाद केंद्र सरकार ने निर्भया फंड की शुरुआत की थी। फंड में एक हजार करोड़ रुपये की भारी भरकम धनराशि भी दी थी। इसका मकसद दुष्कर्म पीड़िता या उनके परिजनों को आर्थिक सहायता देना था। हालांकि जिला प्रोबेशन अधिकारी रेनू यादव निर्भया फंड से दुष्कर्म पीड़ितों को किसी प्रकार की आर्थिक सहायता देने के लिए धनराशि मिलने की बात से इनकार करती हैं। उनका कहना है कि निर्भया फंड से किसी प्रकार का पैसा विभाग को नहीं मिला है। एक सखी वन स्टाप सेंटर संचालित है, जिसके लिए पैसा मिलता है।
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वहीं, प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 में रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना शुरू की थी। योजना के तहत दुष्कर्म पीड़िताओं और उनके परिजनों को आर्थिक सहायता दी जाती है। इसमें सरकार ने तीन श्रेणी तय कर रखी हैं। पहली है धारा आईपीसी 376ए। इसमें यदि पीड़िता की मौत हो जाती है या वह कोमा में चली जाती है तो उसके परिजनों को 10 लाख की सहायता दी जाती है। दूसरी है 376सी। इसमें पीड़िता का रेप होने की पुष्टि हो और रिपोर्ट दर्ज हो तो उसके खाते में तीन लाख रुपये दिए जाते हैं। अंतिम 376डी है। इस मामले में गैंगरेप पीड़िता को ही सात लाख की सहायता देने का प्रावधान है। योजना में मृतका का परिवार योजना के दायरे में आता नहीं दिख रहा है।
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जिला प्रोबेशन अधिकारी रेनू यादव ने बताया कि यह मामला बिहार और रायबरेली में दर्ज हुआ था। बाद में पूरा मामला रायबरेली स्थानांतरित हो गया था। दूसरी बात यह है कि घटना सरकार द्वारा निर्धारित की गई श्रेणी में नहीं आ रही है। ऐसे में योजना से मृतका के परिजनों को आर्थिक सहायता मिलने पर संशय है।