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कल्याणी और पांडु नदी पर जुगाड़ के पुल, जान का खतरा
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जुगाड़ का पुल ः उन्नाव के बीघापुर तहसील के दूलीखेड़ा व लालाखेड़ा के बीच पांडु नदी पर 15 साल पहले क्?
- फोटो : UNNAO
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अविनाश बाजपेई/जुहैर अहमद
बीघापुर/सफीपुर। दो तहसीलों की आठ ग्राम पंचायतों के 35 हजार लोग कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन ग्राम पंचायतों से कल्याणी और गंगा-पांडु नदी निकली हैं, लेकिन ग्रामीण आवागमन के लिए बांस-बल्ली के जुगाड़ पुल के सहारे आवागमन कर रहे हैं। पांडु नदी के पास रहने वाले ग्रामीण व बच्चे जानजोखिम में डालकर पैदल ही नदी पार करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और अफसरों को कई बार समस्याएं बताईं, लेकिन समाधान नहीं हो सका। (संवाद)
15 साल पहले टूटा पुुल आज तक नहीं बना
बीघापुर। तहसील क्षेत्र के दूलीखेड़ा व लालाखेड़ा गंगा और पांडु नदी के बीच में स्थित हैं। दोनों ग्राम सभाओं की आबादी 10 हजार है। दूलीखेड़ा से चौड़ा पुरवा सहित दर्जनों मजरों को जाने के लिए पांडु नदी पर दो दशक पूर्व बना पुल 15 वर्ष पूर्व आई बाढ़ में आधा बह गया था।
इसके बाद ग्रामीणों ने आधे पुल के निर्माण के लिए अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के चक्कर लगाए लेकिन नतीजा शून्य रहा। हारकर ग्रामीणों ने लकड़ी का पुल बना कर आवागमन चालू कर लिया। साइकिल से सामान लादकर या मोटरसाइकिल से दूध या खेतों की सिंचाई के लिए डीजल लेकर भी लोग खतरनाक पुल से आवागमन करते हैं। बाइक निकालते समय पुल हिलता है। तीन वर्ष पूर्व गंगा नदी में समा चुके लालाखेड़ा के प्राथमिक विद्यालय के छात्र मजबूर होकर अभी फतेहपुर के शिवराजपुर पढ़ने जाने को मजबूर हैं। पांडु नदी में पानी कम होने के कारण पढ़ने जाने वाले बच्चे व जानवर चराने वाले किसान पांडु नदी पार करके ही अभी यात्रा करने को मजबूर हैं।
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ग्रामीणों ने खुद बनाया पुल, अब क्षतिग्रस्त
सफीपुर। मुरादपुर से जमालनगर मार्ग के बीच से गुजरी कल्याणी नदी गुजरी है। यहां नदी पर पक्का पुल आज तक नहीं बन सका है। गंगा कटरी के गाव शेरपुर, उडंकपुरवा, इब्राहिमाबाद, ददलाहा, अल्लीपुर व सेवापुरवा गांव के 25 हजार ग्रामीण मिर्जापुर बाजार व तहसील मुख्यालय जाने के लिए आठ किमी लंबा रास्ता तय करने को मजबूर थे। काफी ग्रामीणों के खेत नदी के उस पार हैं। इसी कारण इस लंबे रास्ते को कम करने के लिए ग्रामीणों ने स्वयं के प्रयास से मुरादपुर के पास बांस बल्ली का पुल बना लिया। अब पैदल व साइकिल सवार इसी मार्ग के सहारे ही आवागमन करते हैं। बाइक व कार सवार दूसरे रास्ते से सफर करने को मजबूर हैं। हालांकि वर्तमान समय में बांस बल्ली का पुल भी काफी क्षतिग्रस्त हो गया है लेकिन दूसरे मार्ग की लंबी दूरी होने के कारण लोग खासकर महिलाएं व बच्चे इसी पुल के सहारे जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं।
कोट्स-
उन्हें इस समस्या की जानकारी नहीं थी। अब पीडब्ल्यूडी और सेतु निगम से जानकारी की जाएगी कि पूर्व में पुल के लिए र्कोई प्रस्ताव शासन को भेजा गया है या नहीं। अगर गया है तो कहां लंबित है। अगर प्रस्ताव नहीं गया है तो उसे जल्द से बनवाकर मंजूरी के लिए शासन को भेजा जाएगा।
-रवींद्र कुमार, जिलाधिकारी
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बीघापुर/सफीपुर। दो तहसीलों की आठ ग्राम पंचायतों के 35 हजार लोग कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन ग्राम पंचायतों से कल्याणी और गंगा-पांडु नदी निकली हैं, लेकिन ग्रामीण आवागमन के लिए बांस-बल्ली के जुगाड़ पुल के सहारे आवागमन कर रहे हैं। पांडु नदी के पास रहने वाले ग्रामीण व बच्चे जानजोखिम में डालकर पैदल ही नदी पार करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और अफसरों को कई बार समस्याएं बताईं, लेकिन समाधान नहीं हो सका। (संवाद)
15 साल पहले टूटा पुुल आज तक नहीं बना
बीघापुर। तहसील क्षेत्र के दूलीखेड़ा व लालाखेड़ा गंगा और पांडु नदी के बीच में स्थित हैं। दोनों ग्राम सभाओं की आबादी 10 हजार है। दूलीखेड़ा से चौड़ा पुरवा सहित दर्जनों मजरों को जाने के लिए पांडु नदी पर दो दशक पूर्व बना पुल 15 वर्ष पूर्व आई बाढ़ में आधा बह गया था।
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इसके बाद ग्रामीणों ने आधे पुल के निर्माण के लिए अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के चक्कर लगाए लेकिन नतीजा शून्य रहा। हारकर ग्रामीणों ने लकड़ी का पुल बना कर आवागमन चालू कर लिया। साइकिल से सामान लादकर या मोटरसाइकिल से दूध या खेतों की सिंचाई के लिए डीजल लेकर भी लोग खतरनाक पुल से आवागमन करते हैं। बाइक निकालते समय पुल हिलता है। तीन वर्ष पूर्व गंगा नदी में समा चुके लालाखेड़ा के प्राथमिक विद्यालय के छात्र मजबूर होकर अभी फतेहपुर के शिवराजपुर पढ़ने जाने को मजबूर हैं। पांडु नदी में पानी कम होने के कारण पढ़ने जाने वाले बच्चे व जानवर चराने वाले किसान पांडु नदी पार करके ही अभी यात्रा करने को मजबूर हैं।
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ग्रामीणों ने खुद बनाया पुल, अब क्षतिग्रस्त
सफीपुर। मुरादपुर से जमालनगर मार्ग के बीच से गुजरी कल्याणी नदी गुजरी है। यहां नदी पर पक्का पुल आज तक नहीं बन सका है। गंगा कटरी के गाव शेरपुर, उडंकपुरवा, इब्राहिमाबाद, ददलाहा, अल्लीपुर व सेवापुरवा गांव के 25 हजार ग्रामीण मिर्जापुर बाजार व तहसील मुख्यालय जाने के लिए आठ किमी लंबा रास्ता तय करने को मजबूर थे। काफी ग्रामीणों के खेत नदी के उस पार हैं। इसी कारण इस लंबे रास्ते को कम करने के लिए ग्रामीणों ने स्वयं के प्रयास से मुरादपुर के पास बांस बल्ली का पुल बना लिया। अब पैदल व साइकिल सवार इसी मार्ग के सहारे ही आवागमन करते हैं। बाइक व कार सवार दूसरे रास्ते से सफर करने को मजबूर हैं। हालांकि वर्तमान समय में बांस बल्ली का पुल भी काफी क्षतिग्रस्त हो गया है लेकिन दूसरे मार्ग की लंबी दूरी होने के कारण लोग खासकर महिलाएं व बच्चे इसी पुल के सहारे जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं।
कोट्स-
उन्हें इस समस्या की जानकारी नहीं थी। अब पीडब्ल्यूडी और सेतु निगम से जानकारी की जाएगी कि पूर्व में पुल के लिए र्कोई प्रस्ताव शासन को भेजा गया है या नहीं। अगर गया है तो कहां लंबित है। अगर प्रस्ताव नहीं गया है तो उसे जल्द से बनवाकर मंजूरी के लिए शासन को भेजा जाएगा।
-रवींद्र कुमार, जिलाधिकारी
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बीघापुर तहसील में दूलीखेड़ा व लालाखेड़ा के बीच पांडु नदी पार करने के लिए साइकिल को धक्का लगाकर नि- फोटो : UNNAO

सफीपुर में मुरादपुर से जमालनगर जाने के लिए कल्याणी नदी पर बांस के पुल से कुछ इस तरह जान जोखिम में ड- फोटो : UNNAO