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Unnao News: रंगीन मछलियों के व्यवसाय ने बदली पूनम की तकदीर
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फोटो नंबर-7
- 2019 में समूह बनाकर दस महिलाओं के साथ शुरू किया था काम
-20 और महिलाओं को भी रोजगार देकर बनाया आत्मनिर्भर
विपिन कुमार
औरास। रंगीन मछलियों का पालन करके समूह की महिलाएं न सिर्फ खुद आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं बल्कि बीस से अधिक अन्य महिलाओं को रोजगार देकर आत्मनिर्भर भी बनाया है। सबसे अच्छी बात यह है कि समूह को मछलियों की बिक्री के लिए कोई दौड़-भाग भी नहीं करनी पड़ती। खरीदार खुद ही पहुंचते हैं।
औरास ब्लॉक के परौरी गांव निवासिनी पूनम सिंह ने 2019 में गांव की ही 10 महिलाओं को जोड़कर समूह का गठन किया था। समूह की अध्यक्ष पूनम व कोषाध्यक्ष विटाना ने 2024 वर्ष में कृषि विज्ञान केंद्र धौरा की वैज्ञानिक अर्चना सिंह से मिलकर प्रशिक्षण लिया और रंगीन मछलियों का व्यापार शुरू किया।
समूह ने एक लाख का लोन लेकर मछली के बीज और उपकरणों की सहायता से स्थानीय या पारंपरिक जल स्रोतों (जैसे पोखर) और बायोफ्लॉक टैंक, एक्वेरियम (कांच का जार) में छोटी रंगीन मछली को रख कर व्यवसाय शुरू किया।
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समूह रंगीन मछलियों की डिमांड इतनी है कि सफीपुर, बांगरमऊ, उन्नाव, हसनगंज, रसूलाबाद, रहीमाबाद, मलिहाबाद, लखनऊ खरीदार यहां पहुंच रहें हैं। समूह को मछलियों की बिक्री के लिए कोई अतिरिक्त दौड़-भाग भी नहीं करनी पड़ती। (संवाद)
रंगीन मछलियों को दिए जाने वाला भोजन
समूह अध्यक्ष पूनम सिंह ने बताया कि रंगीन मछलियों को भोजन में उबली आलू 24 घंटे में एक बार दी जाती है। इसके अलावा सप्ताह में एक बार अंडे की जर्दी खिलाई जाती है।
इन रंगीन मछलियों का हो रहा पालन
समूह में जो मछलियां पाली जा रही हैं उनमें गोल्डफिश, रेड कैप, ओराडा, ग्रीन ट्रेरर, एंजेल, चिकलेट, ऑस्कर, ब्लैक कॉर्न, व्हाइट कॉर्न, व्हाइट मॉली, शॉर्ट टेल और मौली आदि शामिल हैं। बाजार में इन मछलियों की मांग अधिक है।
30 से लेकर 500 रुपये में बिकतीं हैं मछलियां
पूनम ने बताया कि उनके पास जो रंगीन मछलियां हैं उनमें सबसे कम कीमत की 30 रुपये में जोड़ा व सबसे अधिक कीमत में 500 रुपए जोड़े की मछलियां हैं। बहुत से लोग इन्हें पालना शुभ मानते हैं।
पूनम द्वारा रंगीन मछलियों का अच्छा व्यवसाय किया जा रहा है। इन मछलियों की मांग बहुत ज्यादा है। लोग अपने घरों में और प्रतिष्ठानों में एक्वेरियम में पालते हैं।-डॉ. अर्चना सिंह, कृषि वैज्ञानिक
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- 2019 में समूह बनाकर दस महिलाओं के साथ शुरू किया था काम
-20 और महिलाओं को भी रोजगार देकर बनाया आत्मनिर्भर
विपिन कुमार
औरास। रंगीन मछलियों का पालन करके समूह की महिलाएं न सिर्फ खुद आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं बल्कि बीस से अधिक अन्य महिलाओं को रोजगार देकर आत्मनिर्भर भी बनाया है। सबसे अच्छी बात यह है कि समूह को मछलियों की बिक्री के लिए कोई दौड़-भाग भी नहीं करनी पड़ती। खरीदार खुद ही पहुंचते हैं।
औरास ब्लॉक के परौरी गांव निवासिनी पूनम सिंह ने 2019 में गांव की ही 10 महिलाओं को जोड़कर समूह का गठन किया था। समूह की अध्यक्ष पूनम व कोषाध्यक्ष विटाना ने 2024 वर्ष में कृषि विज्ञान केंद्र धौरा की वैज्ञानिक अर्चना सिंह से मिलकर प्रशिक्षण लिया और रंगीन मछलियों का व्यापार शुरू किया।
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समूह ने एक लाख का लोन लेकर मछली के बीज और उपकरणों की सहायता से स्थानीय या पारंपरिक जल स्रोतों (जैसे पोखर) और बायोफ्लॉक टैंक, एक्वेरियम (कांच का जार) में छोटी रंगीन मछली को रख कर व्यवसाय शुरू किया।
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समूह रंगीन मछलियों की डिमांड इतनी है कि सफीपुर, बांगरमऊ, उन्नाव, हसनगंज, रसूलाबाद, रहीमाबाद, मलिहाबाद, लखनऊ खरीदार यहां पहुंच रहें हैं। समूह को मछलियों की बिक्री के लिए कोई अतिरिक्त दौड़-भाग भी नहीं करनी पड़ती। (संवाद)
रंगीन मछलियों को दिए जाने वाला भोजन
समूह अध्यक्ष पूनम सिंह ने बताया कि रंगीन मछलियों को भोजन में उबली आलू 24 घंटे में एक बार दी जाती है। इसके अलावा सप्ताह में एक बार अंडे की जर्दी खिलाई जाती है।
इन रंगीन मछलियों का हो रहा पालन
समूह में जो मछलियां पाली जा रही हैं उनमें गोल्डफिश, रेड कैप, ओराडा, ग्रीन ट्रेरर, एंजेल, चिकलेट, ऑस्कर, ब्लैक कॉर्न, व्हाइट कॉर्न, व्हाइट मॉली, शॉर्ट टेल और मौली आदि शामिल हैं। बाजार में इन मछलियों की मांग अधिक है।
30 से लेकर 500 रुपये में बिकतीं हैं मछलियां
पूनम ने बताया कि उनके पास जो रंगीन मछलियां हैं उनमें सबसे कम कीमत की 30 रुपये में जोड़ा व सबसे अधिक कीमत में 500 रुपए जोड़े की मछलियां हैं। बहुत से लोग इन्हें पालना शुभ मानते हैं।
पूनम द्वारा रंगीन मछलियों का अच्छा व्यवसाय किया जा रहा है। इन मछलियों की मांग बहुत ज्यादा है। लोग अपने घरों में और प्रतिष्ठानों में एक्वेरियम में पालते हैं।-डॉ. अर्चना सिंह, कृषि वैज्ञानिक