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पीएम मोदी ने जैविक विधि से खेती करने वाले उन्नाव के किसान अरविंद का हौसला बढ़ाया, कही ये बात
Fri, 14 May 2021 09:36 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 14 May 2021 09:36 PM IST
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पीएम मोदी से बात करते उन्नाव के अरविंद
- फोटो : amar ujala
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उन्नाव में जैविक विधि से खेती करने वाले जिले के बीटीसी और टीईटी पास किसान अरविंद कुमार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफी प्रभावित हुए। प्रधानमंत्री ने कहा, पढ़े-लिखे लोग खेती करेंगे तो तस्वीर बदलेगी। उन्होंने अन्य किसानों को भी जैविक खेती से जोड़ने की अपील की। सिकंदरपुर सरोसी ब्लॉक के रौतापुर गांव निवासी 25 वर्षीय अरविंद कुमार जैविक विधि से खेती कर रहे हैं। काला नमक प्रजाति का चावल, गेहूं, तिल, मूंगफली, खरबूजा, तरबूज की फसलों का उत्पादन करते हैं।
नमामि गंगे जैविक कृषक नाम का समूह गठित करके उन्होंने किसानों को जोड़ा। अरविंद को शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वर्चुअल बातचीत का मौका मिला। एनआईसी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये प्रधानमंत्री ने सबसे पहले अरविंद से बात की। जैविक खेती की शुरुआत के बारे में पूछा। अरविंद ने प्रधानमंत्री को बताया कि डेढ़ साल पहले गंगा यात्रा आई थी। इसमें गंगा किनारे के गांवों में जैविक खेती को बढ़ावा देने की जानकारी मिली।
उन्होंने कृषि विभाग से संपर्क किया तो गुजरात में चल रहे कार्यक्रम में प्रतिभाग करने का मौका मिला। इससे जैविक खेती करने की प्रेरणा मिली। अधिकारियों से संपर्क करके जैविक खेती की विधि जानी और काम शुरू किया। प्रधानमंत्री ने अरविंद से अब तक जैविक विधि से तैयार की गई फसलों की जानकारी ली। अरविंद ने बताया कि वह चावल, गेहूं जैसी परंपरागत खेती के अलावा तिल, मूंगफली, खरबूजा, पपीता व तरबूज की फसलें उगाते हैं। अरविंद द्वारा नमामि गंगे जैविक कृषक समूह गठित कर किसानों को जोड़ने की जानकारी होने पर प्रधानमंत्री ने तारीफ की।
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नमामि गंगे जैविक कृषक नाम का समूह गठित करके उन्होंने किसानों को जोड़ा। अरविंद को शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वर्चुअल बातचीत का मौका मिला। एनआईसी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये प्रधानमंत्री ने सबसे पहले अरविंद से बात की। जैविक खेती की शुरुआत के बारे में पूछा। अरविंद ने प्रधानमंत्री को बताया कि डेढ़ साल पहले गंगा यात्रा आई थी। इसमें गंगा किनारे के गांवों में जैविक खेती को बढ़ावा देने की जानकारी मिली।
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उन्होंने कृषि विभाग से संपर्क किया तो गुजरात में चल रहे कार्यक्रम में प्रतिभाग करने का मौका मिला। इससे जैविक खेती करने की प्रेरणा मिली। अधिकारियों से संपर्क करके जैविक खेती की विधि जानी और काम शुरू किया। प्रधानमंत्री ने अरविंद से अब तक जैविक विधि से तैयार की गई फसलों की जानकारी ली। अरविंद ने बताया कि वह चावल, गेहूं जैसी परंपरागत खेती के अलावा तिल, मूंगफली, खरबूजा, पपीता व तरबूज की फसलें उगाते हैं। अरविंद द्वारा नमामि गंगे जैविक कृषक समूह गठित कर किसानों को जोड़ने की जानकारी होने पर प्रधानमंत्री ने तारीफ की।
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प्रधानमंत्री ने अरविंद की कार्यशैली को सराहा और कहा कि यह सुखद है कि अब खेती में नौजवान और पढ़े लिखे लोग आगे आ रहे हैं। वैज्ञानिक विधि से खेती करके मुनाफा तो कमा ही रहे हैं, अन्य के लिए नजीर भी बन रहे हैं। प्रधानमंत्री ने अरविंद से ज्यादा से ज्यादा किसानों को जैविक विधि से खेती के लिए प्रेरित करने को कहा। इस दौरान एनआईसी में उप कृषि निदेशक डॉ. नंदकिशोर व जिला सूचना विज्ञान अधिकारी एसके निगम मौजूद रहे।
पहला नंबर, सबसे लंबी बातचीत
प्रधानमंत्री ने सबसे पहले अरविंद से ही बातचीत की। उनके अनुभव सुने और उत्साह भी बढ़ाया। इस दौरान उनसे खेती से जुड़े कुछ सवाल भी पूछे। अरविंद ने विस्तृत तरीके से जवाब दिए। प्रधानमंत्री ने आठ मिनट तक अरविंद से बातचीत की। प्रधानमंत्री से बातचीत में पूरे देश से छह लोगों को चुना गया था। उत्तर प्रदेश से केवल उन्नाव के अरविंद को ही मौका मिला। अन्य राज्यों के किसानों से प्रधानमंत्री ने दो से तीन मिनट ही बातचीत की।
पूछा, कैसे तैयार करते हैं जैविक खाद
प्रधानमंत्री ने अरविंद से जैविक खाद तैयार करने की विधि पूछी। अरविंद ने बताया कि गाय के गोबर, गोमूत्र, बेसन, गुड़ और बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी को मिश्रित करके खाद तैयार करते हैं। जैविक खाद के बाद अन्य किसी प्रकार के रासायनिक उर्वरक या कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करते हैं। इसके प्रयोग से फसल पूरी तरह से स्वास्थ्यवर्धक होती है।
पहला नंबर, सबसे लंबी बातचीत
प्रधानमंत्री ने सबसे पहले अरविंद से ही बातचीत की। उनके अनुभव सुने और उत्साह भी बढ़ाया। इस दौरान उनसे खेती से जुड़े कुछ सवाल भी पूछे। अरविंद ने विस्तृत तरीके से जवाब दिए। प्रधानमंत्री ने आठ मिनट तक अरविंद से बातचीत की। प्रधानमंत्री से बातचीत में पूरे देश से छह लोगों को चुना गया था। उत्तर प्रदेश से केवल उन्नाव के अरविंद को ही मौका मिला। अन्य राज्यों के किसानों से प्रधानमंत्री ने दो से तीन मिनट ही बातचीत की।
पूछा, कैसे तैयार करते हैं जैविक खाद
प्रधानमंत्री ने अरविंद से जैविक खाद तैयार करने की विधि पूछी। अरविंद ने बताया कि गाय के गोबर, गोमूत्र, बेसन, गुड़ और बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी को मिश्रित करके खाद तैयार करते हैं। जैविक खाद के बाद अन्य किसी प्रकार के रासायनिक उर्वरक या कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करते हैं। इसके प्रयोग से फसल पूरी तरह से स्वास्थ्यवर्धक होती है।
पीएम से बात, सपने का सच होने जैसा
अरविंद का कहना है कि प्रधानमंत्री से बात करने का मौका मिलना किसी सपने के सच होने जैसा है। कभी नहीं सोचा था कि प्रधानमंत्री से बात करने का मौका मिलेगा। शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने खुद ही नाम लेकर जैविक खेती पर बातचीत शुरू की तो एकबारगी विश्वास ही नहीं हुआ कि सामने प्रधानमंत्री हैं। अरविंद ने कहा कि अब वह जैविक खेती में और मेहनत करेंगे। पूरे जिले में घूम-घूमकर अन्य किसानों को जैविक खेती करने के लिए प्रेरित करेंगे।
एक बार फिर बढ़ा जनपद का नाम
जैविक खेती पर प्रधानमंत्री द्वारा अरविंद की पीठ थपथपाने से एक बार फिर से जनपद का नाम देश में बढ़ा है। इससे पहले जिले में शुरू की गई पराली दो, खाद लो कार्यक्रम की भी प्रधानमंत्री ने सराहना की थी। पिछले साल कोरोना संक्रमणकाल में दूसरे प्रांतों से घर लौटे दो प्रवासी मजदूरों द्वारा क्वारंटीन अवधि के दौरान स्कूल का रंगरोगन कर चमकाने को भी प्रधानमंत्री ने सराहा था।
अरविंद का कहना है कि प्रधानमंत्री से बात करने का मौका मिलना किसी सपने के सच होने जैसा है। कभी नहीं सोचा था कि प्रधानमंत्री से बात करने का मौका मिलेगा। शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने खुद ही नाम लेकर जैविक खेती पर बातचीत शुरू की तो एकबारगी विश्वास ही नहीं हुआ कि सामने प्रधानमंत्री हैं। अरविंद ने कहा कि अब वह जैविक खेती में और मेहनत करेंगे। पूरे जिले में घूम-घूमकर अन्य किसानों को जैविक खेती करने के लिए प्रेरित करेंगे।
एक बार फिर बढ़ा जनपद का नाम
जैविक खेती पर प्रधानमंत्री द्वारा अरविंद की पीठ थपथपाने से एक बार फिर से जनपद का नाम देश में बढ़ा है। इससे पहले जिले में शुरू की गई पराली दो, खाद लो कार्यक्रम की भी प्रधानमंत्री ने सराहना की थी। पिछले साल कोरोना संक्रमणकाल में दूसरे प्रांतों से घर लौटे दो प्रवासी मजदूरों द्वारा क्वारंटीन अवधि के दौरान स्कूल का रंगरोगन कर चमकाने को भी प्रधानमंत्री ने सराहा था।