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बजट के फेर में अटकी ‘सेहत’ की गाड़ी
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Sun, 08 Mar 2015 12:04 AM IST
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उन्नाव। जिला अस्पताल के आयुष विभाग में दवाओं का टोटा है। वित्तीय वर्ष में बजट न जारी हो पाने से दवाओं की खरीद नहीं हो सकी है। इससे मरीजों को डॉक्टर सिर्फ सुझाव दे रहे हैं। अस्पताल में दवाएं न होने से मरीजों को महंगे दामों पर बाहर से दवाएं खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।
आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक और यूनानी उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पताल में आयुष विभाग की स्थापना की गई थी। आयुष विभाग की स्थापना के साथ ही दवाओं की खरीद के लिए वर्ष 2012-2013 में 46 लाख का बजट जारी किया गया था।
बजट से 9 लाख की दवाओं की ही खरीद हो पाई थी। वहीं वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से शासन को बजट वापस कर दिया गया था। वर्ष 2012 में खरीदी गई दवाओं से ही आयुष विभाग चल रहा है। वित्तीय वर्ष 2013-2014 में दवाओं की खरीद के लिए अभी तक बजट नहीं जारी हो पाया है।
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बजट न मिलने से मरीजों को आयुष विभाग से दवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। जो भी मरीज जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं उन्हें सिर्फ डॉक्टर सुझाव दे रहे हैं। वहीं अस्पताल में दवाओं की उपलब्धता न होने से मरीजों को अस्पताल के बाहर से दवाएं लिखी जा रही हैं। जिन्हें मरीज महंगे दामों पर खरीदने को मजबूर हो रहे हैं।
मानदेय का भी है टोटा
आयुष विभाग में 50 डॉक्टरों सहित 15 फार्मेसिस्ट की संविदा पर तैनाती है। आयुष विभाग में संविदा पर तैनात चिकित्सकों और फार्मेसिस्ट को सितंबर माह से अब तक मानदेय नहीं मिल सका है। डॉक्टर सितंबर माह से बिना मानदेय के ही काम कर रहे हैं।
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आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक और यूनानी उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पताल में आयुष विभाग की स्थापना की गई थी। आयुष विभाग की स्थापना के साथ ही दवाओं की खरीद के लिए वर्ष 2012-2013 में 46 लाख का बजट जारी किया गया था।
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बजट से 9 लाख की दवाओं की ही खरीद हो पाई थी। वहीं वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से शासन को बजट वापस कर दिया गया था। वर्ष 2012 में खरीदी गई दवाओं से ही आयुष विभाग चल रहा है। वित्तीय वर्ष 2013-2014 में दवाओं की खरीद के लिए अभी तक बजट नहीं जारी हो पाया है।
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बजट न मिलने से मरीजों को आयुष विभाग से दवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। जो भी मरीज जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं उन्हें सिर्फ डॉक्टर सुझाव दे रहे हैं। वहीं अस्पताल में दवाओं की उपलब्धता न होने से मरीजों को अस्पताल के बाहर से दवाएं लिखी जा रही हैं। जिन्हें मरीज महंगे दामों पर खरीदने को मजबूर हो रहे हैं।
मानदेय का भी है टोटा
आयुष विभाग में 50 डॉक्टरों सहित 15 फार्मेसिस्ट की संविदा पर तैनाती है। आयुष विभाग में संविदा पर तैनात चिकित्सकों और फार्मेसिस्ट को सितंबर माह से अब तक मानदेय नहीं मिल सका है। डॉक्टर सितंबर माह से बिना मानदेय के ही काम कर रहे हैं।