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Unnao News: हाईवे पर काल बनकर दौड़ रहे ओवरलोड डंपर, छह महीने में 15 की मौत
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संवाद न्यूज एजेंसी
अचलगंज। हाईवे पर डंपर काल बनकर दौड़ रहे हैं। तेज रफ्तार के साथ अनुभवहीन चालक अधिक चक्कर लगाने की होड़ में घटनाएं बढ़ रही हैं। स्थिति यह है कि छह महीने के अंतराल में 15 से अधिक लोग डंपर की चपेट में आने से जान गवां चुके हैं। वहीं रोजाना एक से दो लोग घायल होते हैं। घटना होने पर चालक गाड़ी छोडकऱ भाग जाते हैं। बाद में मालिक किसी ऐसे का लाइसेंस लगा देते हैं जो बालिग होता है। इससे घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
हाईवे पर तेज रफ्तार डंपर से हुई मौतों पर नजर डाली जाए तो 12 जनवरी को अनियंत्रित डंपर बेथर गांव के पास बाइक सवार भाई बहन को टक्कर मार थी। जिसमें इटौली निवासी बहन सपना की मौत हो गई थी। इसी दिन बाबाखेड़ा के पास बाइक सवार तिवारीखेड़ा निवासी हरीशंकर(50) की भी डंपर की चपेट में आने से मौत हुई थी। 14 जनवरी को बदरका में साइकिल से जा रहे दंपती को डंपर ने टक्कर मार थी। इसमें पत्नी सोनी की मौत हो गई थी। पति अनिल घायल हो गया था। 22 जनवरी को बंथर चौराहे पर अनियंत्रित डंपर ने कार में टक्कर मारी थी। जिसमें झौहा गांव निवासी विमेलश, उनका बेटा शिवांग और पैदल जा रही सुपासी गांव निवासी शकुंतला और उसकी बेटी शिवनी और गांव के ही छोटेलाल की मौत हो गई थी। 11 दिसंबर 22 को बंथर चौराहे ओर खड़े छविनाथ की पत्नी गीता और आठ साल की बेटी शिवानी को डंपर ने कुचला था। नौ मार्च को बंथर निवासी रिंकू सिंह, 30 अप्रैल बाइक से जा रहे सफीपुर निवासी शंकर, 29 जून को पुरवा रोड पर अर्चित खेड़ा के रवी (17) को डंपर ने कुचल दिया था। इसमें तीनों की मौत हुई थी। दो जुलाई को गड़ारी गांव निवासी आरती और चार जुलाई को अचलगंज कस्बे में घर जा रहे जमेलनिवासी महेश व कस्बा निवासी भांजे रामनाथ की बाइक में डंपर ने टक्कर मारी थी। घटनास्थल पर तीनों की मौत हो गई थी। वहीं शुक्रवार रात मवइयालायक निवासी बिजली संविदा कर्मी राजेश और जितेंद्र के लिए भी डंपर काल बना।
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क्या बोले जिम्मेदार
एआरटीओ प्रवर्तन अरविंद सिंह ने बताया कि ओवरलोड वाहनों के खिलाफ अभियान चलता है। जो वाहन मिलता है उसकी फिटेनश और चालक का लाईसेंस जांच जाता है। स्पेशल डंपर के लिए नहीं चला। इस पर भी अभियान चलाया जाएगा।
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अचलगंज। हाईवे पर डंपर काल बनकर दौड़ रहे हैं। तेज रफ्तार के साथ अनुभवहीन चालक अधिक चक्कर लगाने की होड़ में घटनाएं बढ़ रही हैं। स्थिति यह है कि छह महीने के अंतराल में 15 से अधिक लोग डंपर की चपेट में आने से जान गवां चुके हैं। वहीं रोजाना एक से दो लोग घायल होते हैं। घटना होने पर चालक गाड़ी छोडकऱ भाग जाते हैं। बाद में मालिक किसी ऐसे का लाइसेंस लगा देते हैं जो बालिग होता है। इससे घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
हाईवे पर तेज रफ्तार डंपर से हुई मौतों पर नजर डाली जाए तो 12 जनवरी को अनियंत्रित डंपर बेथर गांव के पास बाइक सवार भाई बहन को टक्कर मार थी। जिसमें इटौली निवासी बहन सपना की मौत हो गई थी। इसी दिन बाबाखेड़ा के पास बाइक सवार तिवारीखेड़ा निवासी हरीशंकर(50) की भी डंपर की चपेट में आने से मौत हुई थी। 14 जनवरी को बदरका में साइकिल से जा रहे दंपती को डंपर ने टक्कर मार थी। इसमें पत्नी सोनी की मौत हो गई थी। पति अनिल घायल हो गया था। 22 जनवरी को बंथर चौराहे पर अनियंत्रित डंपर ने कार में टक्कर मारी थी। जिसमें झौहा गांव निवासी विमेलश, उनका बेटा शिवांग और पैदल जा रही सुपासी गांव निवासी शकुंतला और उसकी बेटी शिवनी और गांव के ही छोटेलाल की मौत हो गई थी। 11 दिसंबर 22 को बंथर चौराहे ओर खड़े छविनाथ की पत्नी गीता और आठ साल की बेटी शिवानी को डंपर ने कुचला था। नौ मार्च को बंथर निवासी रिंकू सिंह, 30 अप्रैल बाइक से जा रहे सफीपुर निवासी शंकर, 29 जून को पुरवा रोड पर अर्चित खेड़ा के रवी (17) को डंपर ने कुचल दिया था। इसमें तीनों की मौत हुई थी। दो जुलाई को गड़ारी गांव निवासी आरती और चार जुलाई को अचलगंज कस्बे में घर जा रहे जमेलनिवासी महेश व कस्बा निवासी भांजे रामनाथ की बाइक में डंपर ने टक्कर मारी थी। घटनास्थल पर तीनों की मौत हो गई थी। वहीं शुक्रवार रात मवइयालायक निवासी बिजली संविदा कर्मी राजेश और जितेंद्र के लिए भी डंपर काल बना।
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क्या बोले जिम्मेदार
एआरटीओ प्रवर्तन अरविंद सिंह ने बताया कि ओवरलोड वाहनों के खिलाफ अभियान चलता है। जो वाहन मिलता है उसकी फिटेनश और चालक का लाईसेंस जांच जाता है। स्पेशल डंपर के लिए नहीं चला। इस पर भी अभियान चलाया जाएगा।
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