{"_id":"5727a7ae4f1c1bfa525cdf0a","slug":"no-instruments-in-trauma-center","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना उपकरणों का ट्रामा सेंटर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना उपकरणों का ट्रामा सेंटर
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
Updated Tue, 03 May 2016 12:47 AM IST
विज्ञापन
ट्रामा सेंटर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला अस्पताल कैंपस में ट्रामासेंटर की बिल्डिंग बनकर तैयार होने के साथ ही शासन ने स्टाफ तैनाती की भी स्वीकृति दे दी है। लेकिन अभी तक मेडिकल उपकरण नहीं भेजे गए हैं। लिहाजा मेडिकल स्टाफ बिन उपकरणों के इलाज कैसे करे। इससे अभी तक स्टाफ ने ज्वाइन भी नहीं किया है।
विज्ञापन
गंभीर मरीजों को जिले में इलाज मिल सके इसके लिए शासन ने वर्ष 2014 में ट्रामा सेंटर बनाने की स्वीकृति दी थी। स्वीकृति मिलते ही बजट भी जारी कर दिया था और काम भी तेजी से शुरू हो गया था। बिल्डिंग बनाने के लिए शासन ने 120.83 लाख रुपये का बजट भी जारी किया था। लेकिन कार्य में गति न पकड़ने के कारण इसको बनने में काफी समय लग गया। राज्य स्वास्थ्य मंत्री सुधीर रावत के कड़े रुख के चलते बिल्डिंग का काम तेजी से शुरू हुआ और बिल्डिंग तैयार हो गई है। शासन ने 6 डॉक्टरों और 2 लैब टेक्नीशियन तैनात करने की स्वीकृति भी दे दी है। अन्य स्टाफ की तैनाती के लिए प्रक्रिया चल रही है लेकिन चिकित्सा उपकरण न होने से ट्रामासेंटर का संचालन शुरू नहीं हो पा रहा है। उपकरण न मिलने से मरीजों को इसका लाभ अभी नहीं मिल पा रहा है। गंभीर मरीज अभी भी जिला अस्पताल पहुंचते ही कानपुर रेफर किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
बर्न यूनिट को अभी भी स्टाफ का इंतजार
उन्नाव। जिला अस्पताल परिसर में 20 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुई बर्न यूनिट को अभी भी स्टाफ का इंतजार है। बर्न यूनिट में एसी और सभी उपकरण भी लगाए जा चुके हैं। लेकिन स्टाफ स्वीकृत न होने से यह यूनिट भी शोपीस बन गई। इसी का नतीजा है कि गंभीर रूप से जले रोगियों को जिला अस्पताल से कानपुर या लखनऊ रेफर करना मजबूरी है। सामान्य रोगियों के साथ ही जरनल वार्ड में जले हुए रोगियों को भी भर्ती करने से अन्य मरीजों पर इंफेक्शन का असर पड़ रहा है।
विज्ञापन
क्या बोले सीएमएस
शासन ने ट्रामा सेंटर संचालित करने के लिए स्टाफ की तैनाती की है लेकिन अभी तक किसी ने ज्वाइन नहीं किया। नियमानुसार तैनाती के सात दिन तक ज्वाइन कर लेना चाहिए। दूसरा कारण यह है कि उपकरण न होने से स्टाफ भी मरीजाें का इलाज कैसे कर सकेगा। फिलहाल उपकरण के लिए उच्चाधिकारियों से कहा गया है। बिल्डिंग भी बनकर तैयार है बस उपकरणों के आने का इंतजार हो रहा है। बर्न यूनिट में अभी स्टाफ की स्वीकृति नहीं मिल पाई है। डॉ. एसपी चौधरी, सीएमएस