फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Unnao News ›   no electrification in primary school

परिषदीय स्कूलों में बच्चे गर्मी से तरबतर

Tue, 12 Apr 2016 12:52 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव Updated Tue, 12 Apr 2016 12:52 AM IST
विज्ञापन
no electrification in primary school
खराब पडी ट्यूबवेल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

यहां तक कि स्कूलों में बुनियादी संसाधनों तक का पता नहीं है। भीषण गर्मी में छात्र-छात्राओं को राहत मिले इस मंशा से चार साल पहले जिले के 2039 परिषदीय स्कूलों में विद्युतीकरण के लिए 5 करोड़ 40 लाख 33 हजार 500 रुपये का बजट जारी किया गया था। इसमें स्कूलों में वायरिंग कराने के साथ ही बल्ब और सीलिंग फैन लगवाए जाने थे। हकीकत यह है कि कुछ स्कूलों में विद्युतीकरण के नाम पर महज खानापूरी ही हुई व जिन स्कूलों में काम हुआ भी वहां मेंटीनेंस न होने से स्थिति जस की तस हो गई।

विज्ञापन

बताते चलें कि चार साल पहले जिले के 2039 परिषदीय विद्यालयों में बिजली की वायरिंग कराने के साथ ही बल्ब और सीलिंग फैन लगाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हुए। मानकों की अनदेखी और घटिया सामग्री ने सरकारी स्कूलों की सूरत नहीं बदलने दी। कहीं बल्ब-पंखे लगए गए तो कहीं कागजों पर ही काम होना दर्शाकर पैसे निकाल लिए गए। इतना ही नहीं स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिए शासन ने कंप्यूटर लैब की व्यवस्था की थी। इसके लिए पूर्व के वर्षों में विद्यालयों में वायरिंग कराने के साथ ही कमरे, बरामदे व कार्यालय कक्ष में बल्ब व पंखे लगाने के निर्देश दिए थे। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय में इस कार्य के लिए 26,500 रुपए का बजट भी जारी किया था। ठेकेदारी प्रथा से काम होने के कारण स्कूलों में सही तरीके से वायरिंग तक नहीं कराई गई। इसका असर यह रहा कि वहां न तो आज तक पंखे चल सके और न ही बल्ब जले। लेकिन पैसा खातों से निकाल लिया गया। यह व्यवस्था जिले के सोलह विकासखंडों की है।
विज्ञापन


मेंटीनेंस के नाम पर भी हुई खानापूरी
जिन स्कूलों में विद्युतीकरण हुआ भी वहां समय-समय मेंटीनेंस न होने से किए गए कामों में पानी फिर गया। मेंटीनेंस के मद पर परिषदीय स्कूलों में ग्राम शिक्षा निधि के तहत अनुदान के रूप में प्रति वर्ष प्राइमरी स्कूल में पांच हजार व उच्च प्राथमिक स्कूल में सात हजार रुपये भेजा जाता है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि इसी धनराशि से पंखा, बल्ब व अन्य कार्य कराने होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


साहब! इन स्कूलों में जाकर देखें हकीकत
यदि वास्तव में अधिकारियों को इसकी हकीकत जाननी है तो वे विकासखंड नवाबगंज के प्राथमिक विद्यालय खड़ेरा, बिजपरी प्रथम, कसंडा, बरुआ, निबहरी कल्याणपुर, बजेहरा, कुसुंभी, दिलवल के अलावा उच्च प्राथमिक विद्यालय सेवरा, परसंदन, सेरसा, अजगैन, मकूर मलांव कुसुंभी, सरांय जोगा व कटेहरू में जाकर इसका निरीक्षण कर सकते हैं। यह ऐसे विद्यालय हैं जहां न वयरिंग के नाम पर न  तो तार हैं और न ही पंखे व बल्ब।
विकासखंड सिकंदरपुर करन के परिषदीय विद्यालय गौरी त्रिभानपुर, परिषदीय विद्यालय कोलुहागाढ़ा, प्राथमिक विद्यालय बंड हमीरपुर, प्राथमिक विद्यालय भदवही, प्राथमिक विद्यालय झौहा, उच्च प्राथमिक विद्यालय रमचरामऊ व प्राथमिक विद्यालय बंदीपुरवा में बिना बत्ती व पंखे के ही संचालित हैं। यहां भी वायरिंग के नाम पर केवल धोखा हुआ है।


लाइट न होने से यह आती हैं दिक्कतें
1- छात्र-छात्राएं कंप्यूटर के ज्ञान से वंचित रह रहे हैं।
2- गर्मी में बच्चों को मजबूरी में करनी पड़ती है पढ़ाई।
3- रोशनी की कमी से बच्चों की आंखों पर असर।

जिम्मेदारों की जुबां से
बीईओ मुख्यालय राजेश सिंह ने बताया कि यह बजट ग्राम शिक्षा समिति के खाते में भेजा गया था। फर्म के माध्यम से काम होना था। उनके मुताबिक लगभग विद्यालयों में काम हुआ था अब हो सकता है दो-चार स्कूल ऐसे हों तो जानकारी में नहीं है। फिर भी इसकी जांच कराई जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed