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Unnao News: मनरेगा श्रमिकों का भुगतान करने के लिए मिले नौ करोड़
Sat, 26 Apr 2025 12:26 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
Updated Sat, 26 Apr 2025 12:26 AM IST
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उन्नाव। केंद्र सरकार ने मजदूरों की बकाया मजदूरी के भुगतान के लिए लगभग नौ करोड़ जारी कर दिए हैं। इससे अब जल्द ही निर्माण सामग्री का भी बकाया मिलने की उम्मीद है। वहीं चार महीने से गांवों में ठप पड़े मनरेगा कार्यों के जल्द शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है।
रोजगार के लिए ग्रामीणों का शहरी इलाकों को पलायन रोकने और गांवों का विकास करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मजदूर को एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए मजदूर का जाॅबकार्ड बनाया जाता है। जाॅबकार्ड धारक के एक दिन के काम को एक मानव दिवस के रूप में जोड़ा जाता है। हर माह प्रत्येक विकासखंड को मानव दिवस सृजन का लक्ष्य दिया जाता है। इससे जाॅबकार्ड धारक को गांव में काम मिल सके।
मनरेगा से गांवों में कच्चे व पक्के कार्य कराए जाते हैं। वर्तमान में मनरेगा मजदूरों की संख्या करीब डेढ़ लाख है। दिसंबर 2024 तक मनरेगा से ग्राम पंचायतों में जो कार्य कराए गए थे, उनमें मनरेगा मजदूरों की मजदूरी और निर्माण सामग्री का करीब 25 करोड़ का भुगतान नहीं हो पाया था। चार माह से भुगतान न मिलने से मजदूरों ने अब काम करने से इन्कार कर दिया था। वहीं, सामग्री का भुगतान न होने से प्रधान ने भी गांवों में काम कराने से हाथ खड़े कर दिए थे।
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अमर उजाला ने इसको लेकर सात अप्रैल को प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी, जिसका संज्ञान लेकर अधिकारियों ने शासन के माध्यम से केंद्र सरकार को पत्र भेजा था। अब मनरेगा मजूदरों की बकाया मजदूरी को लेकर लगभग नौ करोड़ का भुगतान जारी कर दिया गया है। मनरेगा उपायुक्त मुनेश चंद्र ने बताया कि मजदूरी का पैसा आ गया है। जल्द ही निर्माण सामग्री का भी बकाया जारी होने की उम्मीद है।
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रोजगार के लिए ग्रामीणों का शहरी इलाकों को पलायन रोकने और गांवों का विकास करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मजदूर को एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए मजदूर का जाॅबकार्ड बनाया जाता है। जाॅबकार्ड धारक के एक दिन के काम को एक मानव दिवस के रूप में जोड़ा जाता है। हर माह प्रत्येक विकासखंड को मानव दिवस सृजन का लक्ष्य दिया जाता है। इससे जाॅबकार्ड धारक को गांव में काम मिल सके।
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मनरेगा से गांवों में कच्चे व पक्के कार्य कराए जाते हैं। वर्तमान में मनरेगा मजदूरों की संख्या करीब डेढ़ लाख है। दिसंबर 2024 तक मनरेगा से ग्राम पंचायतों में जो कार्य कराए गए थे, उनमें मनरेगा मजदूरों की मजदूरी और निर्माण सामग्री का करीब 25 करोड़ का भुगतान नहीं हो पाया था। चार माह से भुगतान न मिलने से मजदूरों ने अब काम करने से इन्कार कर दिया था। वहीं, सामग्री का भुगतान न होने से प्रधान ने भी गांवों में काम कराने से हाथ खड़े कर दिए थे।
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अमर उजाला ने इसको लेकर सात अप्रैल को प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी, जिसका संज्ञान लेकर अधिकारियों ने शासन के माध्यम से केंद्र सरकार को पत्र भेजा था। अब मनरेगा मजूदरों की बकाया मजदूरी को लेकर लगभग नौ करोड़ का भुगतान जारी कर दिया गया है। मनरेगा उपायुक्त मुनेश चंद्र ने बताया कि मजदूरी का पैसा आ गया है। जल्द ही निर्माण सामग्री का भी बकाया जारी होने की उम्मीद है।