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घंटों बाधित रहा कानपुर-लखनऊ रेल मार्ग

Sun, 06 Nov 2016 12:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 06 Nov 2016 12:38 AM IST
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Kanpur-Lucknow rail route was disrupted for hours
derailed wagon - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

करीब छह घंटे बाद दो क्रेनों की मदद से वैगन को ट्रैक से हटाया जा सका। इस दौरान शताब्दी समेत दर्जनों ट्रेनों को काशन देकर अप लाइन से गुजारा गया। इस कारण कानपुर-लखनऊ रेल मार्ग घंटों बाधित रहा। इस दौरान एलटीटी-गोरखपुर, प्रयाग एक्सप्रेस, झांसी इंटरसिटी समेत 11 ट्रेनें एक से दो घंट देरी से रवाना हुईं। उधर उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विजय कुमार ने बताया कि दोपहर बाद ट्रेनों का संचालन सामान्य हो गया।  

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बताते चलें कि गंगापुल पर 11 नवंबर से मरम्मत का काम शुरू होना है। शनिवार सुबह करीब 10 बजकर 14 मिनट पर चालक विजय कुमार त्रिपाठी, सहायक चालक अशोक शर्मा, जेई राकेश मीना अन्य स्टाफ के साथ टावर वैगन लेकर ओएचई लाइन की चेकिंग करने जा रहे थे। वैगन को यार्ड से डाउन लाइन होते पश्चिमी केबिन के पास स्थित फिश प्लेट से अप लाइन पर जाना था। अभी वैगन पश्चिमी केबिन के पास ही पहुंचा था कि अचानक डिरेल हो गया और केबिन की ओर पलटते बचा। घटना की जानकारी होते ही रेल अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए। आनन-फानन में अफसरों ने इसकी सूचना लखनऊ सेक्शन को दी। लखनऊ से सीनियर डीएमई केएम पांडेय, सीनियर डीई शोभित गुप्ता मय स्टाफ के उन्नाव पहुंचे और हादसे की जांच शुरू की। वहीं वैगन हटाने को दो क्रेनें मंगवाई गईं और करीब छह घंटे बाद शाम करीब चार बजे मशक्कत कर वैगन को हटाया जा सका। इसके बाद दोनों रूट पर ट्रेनों का संचालन शुरू किया जा सका। इस दौरान अप लाइन की टाटा-छपरा एक्सप्रेस, ग्वालियर-बरौनी एक्सप्रेस, लखनऊ-जयपुर एक्सप्रेस व राप्तीसागर एक्सप्रेस के अलावा डाउन लाइन से आने वाली एलकेएम, लाकमान्य तिलक व शताब्दी एक्सप्रेस तक ट्रेनों को अप लाइन से ही काशन देकर गुजारा गया।
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एक दूसरे पर आरोप लगाते रहे अधिकारी-कर्मचारी
टावर वैगन के डिरेल होने की घटना में वैसे तो रेलवे अधिकारियों की घोर लापरवाही सामने आ ही गई लेकिन इसके बाद भी संबंधित अधिकारी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करने से पीछे नहीं रहे। एक ओर जहां रेल पथ विभाग के अधिकारी इसमें चालक व वैगन में खराबी होना हादसे का कारण बताते रहे वहीं दूसरी ओर चालक व अन्य स्टाफ फिश प्लेट में गैप व कई स्थानों पर पेंड्रोल क्लिप न लगी होने से वैगन के ट्रैक से उतरने व इसी कारण से एक्शल टूटना बताते रहे।
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टावर वैगन की जगह कोई पैसेंजर ट्रेन होती तो क्या होता
टावर वैगन के डिरेल होने के बाद मौके पर पहुंचे लोग व विभागीय अफसर तक सिर्फ यही कहते रहे कि यह तो टावर वैगन था जो पलटने से बच गया लेकिन इसकी जगह पर कोई पैसेंजर या फिर एक्सप्रेेस ट्रेन होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। वहीं विभागीय अफसर भी इसमें संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को ही दोषी ठहराते रहे।


हादसे के कारण की होगी उच्चस्तरीय जांच
रेलवे के टीआरडी विभाग के सीनियर डीएमई केएम पांडेय व सीनियर डीई शोभित गुप्ता ने कहा कि यह एक बड़ा हादसा है। टावर वैगन पलटते बचा है। मौके पर हर तरह से फोटोग्राफी करवा ली गई है। इसे आलाधिकारियों को दिखाया जाएगा। हादसे के कारणों की टीम बनाकर उच्चस्तरीय जांच करवाई जाएगी।

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