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Unnao News: मासूम श्रेयांश मत रो मम्मी, पापा को चोट लगी है, ठीक हो जाएंगे
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संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। चार भाई में सबसे छोटे बेटे श्रीचंद्र की मौत से वृद्ध पिता रामस्वरूप बेहाल है। मृतक की पत्नी संध्या इस कदर बेहाल है कि कई बार बेहोश होकर गिर गई। तीन साल का मासूम बेटा श्रेयांश मां को रोते हुए देख बार बार कहता कि पापा को चोट लगी है, अभी ठीक हो जाएंगे।
श्रीचंद्र चार भाईयों में सबसे छोटा था। वह खेती के साथ ही राजनीति में भी सक्रिय था। वह सपा का कार्यकर्ता था और कई साल पहले पुरवा विधानसभा क्षेत्र से सचिव भी रहा था। हालांकि अब वह किसी पद पर नहीं था। स्नातक तक पढ़ा होने से वह घर परिवार की मदद करता था। लेकिन पुलिस की अनसुनी ने उसे इस कदर तोड़ दिया कि अपने घर-परिवार के हक की लड़ाई में उसने अपनी आहुति दे दी। उसकी चार साल पहले शादी हुई थी। पत्नी संध्या रो-रोकर बेहाल है। तीन साल का बेटा श्रेयांश बार बार पिता को चोट लगने की बात कहता रहा।
मां को रोते देख वह उनकी गोद में गया और समझाने वाले लहजे में बोला, पापा को चोट लगी है, ठीक हो जाएंगे। परिजनों ने उसे शव से दूर ले जाने की कोशिश की तो वह नहीं गाया, बोला पापा उठेंगे तब घुमाने ले जाएंगे। मृतक के भाई केशन, हरिश्वचंद्र, फूलचंद्र, मूलचंद्र, बहन कमल कुमारी, आशा सहित पूरा परिवार बेहाल है।
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पुरवा सीओ और एसओ की अभी तैनाती नहीं
असोहा। एसपी सिद्धार्थ शंकर मीना ने पुरवा सीओ दीपक कुमार को वहां से हटाकर एसपी कार्यालय में संबद्ध कर दिया है। वहीं पुरवा कोतावाली प्रभारी सुरेश कुमार को भी हटाकर शिकायत प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी दी है। अभी पुरवा में किसी सीओ और एसओ की तैनाती नहीं की गई है।
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एएसपी और एडीएम ने कोतवाली में रहकर घटना पर रखी नजर
आग से झुलसे श्रीचंद्र की मौत के बाद चार सीओ और चार थानों की फोर्स को हालात काबू करने के लिए लगाया गया था। पूरी कमान सीओ हसनगंज संतोष सिंह को सौंपी गई थी। एएसपी अखिलेश सिंह और एडीएम न्यायिक विकास कुमार कोतवाली पहुंच गए थे। दोनों अधिकारी अपने अधीनस्थों से पल पल की जानकारी ले रहे थे। उसकी रिपोर्ट एसपी से लेकर एडीजी तक दी जा रही थी। पुरवा सीओ और कोतवाल के साथ ऐसे किसी भी पुलिस कर्मी की ड्यूटी उस गांव में नहीं लगाई गई थी जिसे देखकर परिजनों का गुस्सा और भडक़ेे।
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परिजनों का आरोप नहीं लगाई आग, केरोसिन डालकर जलाया गया
परिजनों का आरोप था उसने खुद आग नहीं लगाई बल्कि उसे केरोसिन डालकर जलाया गया है। 18 अक्तूबर के हुए विवाद की घटना की जानकारी करने के लिए श्रीचंद्र को उन्नाव बुलाया गया था। वहां उसे जला दिया गया। इसकी भी जांच कराई जाए। यही नहीं श्रीचंद्र के मोबाइल से ही फोन कर पुलिस ने सूचना दी थी। मोबाइल भी गायब है। परिजनों की मांग है कि सीओ ने जिन तीन लोगों के नाम निकाले हैं उन्हें उम्र कैद की सजा मिले।
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पार्टी कार्यकर्ता के लिए खड़े रहे पूर्व विधायक
आग से जलने वाला श्रीचंद्र सपा पार्टी में पहले विधानसभा सचिव हुआ करता था। लेकिन इस समय वह सिर्फ सपा का कार्यकर्ता था। सपा कार्यकर्ता की मौत की खबर सुन पूर्व विधायक उदयराज यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र यादव, पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजकुमार रावत सहित अन्य कार्यकर्ता पूरे समय उपस्थित रहे।
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किसान को जलाकर मारने वाले 18 दिन बाद भी पुलिस पकड़ से दूर
नवाबगंज। सोहरामऊ थाना क्षेत्र के हसनापुर गांव निवासी वीरेंद्र सिंह (55) की चचेरे भाई सूर्यकुमार से 17 बिसुवा जमीन को लेकर चल रहे विवाद में 12 दिसंबर को भतीजे जीतू, शिसू और वैभव ने पेट्रोल डालकर जला दिया था। उसी दिन वीरेंद्र की बेटी सोनी की तहरीर पर पूर्व प्रधान, उनके बेटे और भतीजे सहित दस के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसकी 19 दिसंबर को लखनऊ केजीएमयू में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। पुलिस ने फिर मामले में हत्या की धारा तरमीम तो किया लेकिन 18 दिन बाद दस में एक भी हत्यारोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। हत्यारोपी क्षेत्र और गांव में ही चहलकदमी कर रौब गांठ रहे हैं। इसके बाद भी पुलिस का उनतक न पहुंचना सोहरामऊ थाना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। एसओ कमल दुबे ने बताया कि कोर्ट बंद होने से गैर जामनती वारंट नहीं मिल पा रहा है। मिलते ही गिरफ्तारी की जाएगी।
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सत्ता पक्ष के नेता के संरक्षण से अभयदान
घटना के बाद से ही सत्तापक्ष के एक नेता मामले को दबाने में लगे हैं। पुलिस भी उनका दबाव बना है। इसीलिए केरोसिन डालकर आग लगाने के बाद भी पहले आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। फिर हत्या जैसी गंभीर धारा तरमीम होने के बाद भी पुलिस का उन पर हाथ न डालना सीधा सत्ता पक्ष का संरक्षण दिख रहा है। चर्चा है कि आरोपी पूर्व प्रधान पूर्व प्रधान वीरेंद्र उनके भाई सूर्यकुमार, जगदीश समेत भतीजे रविेद्र, अजय, विजय, अरुण, शुभम, वैभव और जीतू नेता जी की शरण में है।
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उन्नाव। चार भाई में सबसे छोटे बेटे श्रीचंद्र की मौत से वृद्ध पिता रामस्वरूप बेहाल है। मृतक की पत्नी संध्या इस कदर बेहाल है कि कई बार बेहोश होकर गिर गई। तीन साल का मासूम बेटा श्रेयांश मां को रोते हुए देख बार बार कहता कि पापा को चोट लगी है, अभी ठीक हो जाएंगे।
श्रीचंद्र चार भाईयों में सबसे छोटा था। वह खेती के साथ ही राजनीति में भी सक्रिय था। वह सपा का कार्यकर्ता था और कई साल पहले पुरवा विधानसभा क्षेत्र से सचिव भी रहा था। हालांकि अब वह किसी पद पर नहीं था। स्नातक तक पढ़ा होने से वह घर परिवार की मदद करता था। लेकिन पुलिस की अनसुनी ने उसे इस कदर तोड़ दिया कि अपने घर-परिवार के हक की लड़ाई में उसने अपनी आहुति दे दी। उसकी चार साल पहले शादी हुई थी। पत्नी संध्या रो-रोकर बेहाल है। तीन साल का बेटा श्रेयांश बार बार पिता को चोट लगने की बात कहता रहा।
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मां को रोते देख वह उनकी गोद में गया और समझाने वाले लहजे में बोला, पापा को चोट लगी है, ठीक हो जाएंगे। परिजनों ने उसे शव से दूर ले जाने की कोशिश की तो वह नहीं गाया, बोला पापा उठेंगे तब घुमाने ले जाएंगे। मृतक के भाई केशन, हरिश्वचंद्र, फूलचंद्र, मूलचंद्र, बहन कमल कुमारी, आशा सहित पूरा परिवार बेहाल है।
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पुरवा सीओ और एसओ की अभी तैनाती नहीं
असोहा। एसपी सिद्धार्थ शंकर मीना ने पुरवा सीओ दीपक कुमार को वहां से हटाकर एसपी कार्यालय में संबद्ध कर दिया है। वहीं पुरवा कोतावाली प्रभारी सुरेश कुमार को भी हटाकर शिकायत प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी दी है। अभी पुरवा में किसी सीओ और एसओ की तैनाती नहीं की गई है।
एएसपी और एडीएम ने कोतवाली में रहकर घटना पर रखी नजर
आग से झुलसे श्रीचंद्र की मौत के बाद चार सीओ और चार थानों की फोर्स को हालात काबू करने के लिए लगाया गया था। पूरी कमान सीओ हसनगंज संतोष सिंह को सौंपी गई थी। एएसपी अखिलेश सिंह और एडीएम न्यायिक विकास कुमार कोतवाली पहुंच गए थे। दोनों अधिकारी अपने अधीनस्थों से पल पल की जानकारी ले रहे थे। उसकी रिपोर्ट एसपी से लेकर एडीजी तक दी जा रही थी। पुरवा सीओ और कोतवाल के साथ ऐसे किसी भी पुलिस कर्मी की ड्यूटी उस गांव में नहीं लगाई गई थी जिसे देखकर परिजनों का गुस्सा और भडक़ेे।
परिजनों का आरोप नहीं लगाई आग, केरोसिन डालकर जलाया गया
परिजनों का आरोप था उसने खुद आग नहीं लगाई बल्कि उसे केरोसिन डालकर जलाया गया है। 18 अक्तूबर के हुए विवाद की घटना की जानकारी करने के लिए श्रीचंद्र को उन्नाव बुलाया गया था। वहां उसे जला दिया गया। इसकी भी जांच कराई जाए। यही नहीं श्रीचंद्र के मोबाइल से ही फोन कर पुलिस ने सूचना दी थी। मोबाइल भी गायब है। परिजनों की मांग है कि सीओ ने जिन तीन लोगों के नाम निकाले हैं उन्हें उम्र कैद की सजा मिले।
पार्टी कार्यकर्ता के लिए खड़े रहे पूर्व विधायक
आग से जलने वाला श्रीचंद्र सपा पार्टी में पहले विधानसभा सचिव हुआ करता था। लेकिन इस समय वह सिर्फ सपा का कार्यकर्ता था। सपा कार्यकर्ता की मौत की खबर सुन पूर्व विधायक उदयराज यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र यादव, पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजकुमार रावत सहित अन्य कार्यकर्ता पूरे समय उपस्थित रहे।
किसान को जलाकर मारने वाले 18 दिन बाद भी पुलिस पकड़ से दूर
नवाबगंज। सोहरामऊ थाना क्षेत्र के हसनापुर गांव निवासी वीरेंद्र सिंह (55) की चचेरे भाई सूर्यकुमार से 17 बिसुवा जमीन को लेकर चल रहे विवाद में 12 दिसंबर को भतीजे जीतू, शिसू और वैभव ने पेट्रोल डालकर जला दिया था। उसी दिन वीरेंद्र की बेटी सोनी की तहरीर पर पूर्व प्रधान, उनके बेटे और भतीजे सहित दस के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसकी 19 दिसंबर को लखनऊ केजीएमयू में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। पुलिस ने फिर मामले में हत्या की धारा तरमीम तो किया लेकिन 18 दिन बाद दस में एक भी हत्यारोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। हत्यारोपी क्षेत्र और गांव में ही चहलकदमी कर रौब गांठ रहे हैं। इसके बाद भी पुलिस का उनतक न पहुंचना सोहरामऊ थाना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। एसओ कमल दुबे ने बताया कि कोर्ट बंद होने से गैर जामनती वारंट नहीं मिल पा रहा है। मिलते ही गिरफ्तारी की जाएगी।
सत्ता पक्ष के नेता के संरक्षण से अभयदान
घटना के बाद से ही सत्तापक्ष के एक नेता मामले को दबाने में लगे हैं। पुलिस भी उनका दबाव बना है। इसीलिए केरोसिन डालकर आग लगाने के बाद भी पहले आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। फिर हत्या जैसी गंभीर धारा तरमीम होने के बाद भी पुलिस का उन पर हाथ न डालना सीधा सत्ता पक्ष का संरक्षण दिख रहा है। चर्चा है कि आरोपी पूर्व प्रधान पूर्व प्रधान वीरेंद्र उनके भाई सूर्यकुमार, जगदीश समेत भतीजे रविेद्र, अजय, विजय, अरुण, शुभम, वैभव और जीतू नेता जी की शरण में है।