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ग्रीष्मावकाश में भी बच्चों को मिलेगा एमडीएम
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Fri, 22 May 2015 12:36 AM IST
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उन्नाव। ग्रीष्मावकाश होने के बाद भी जिले के सभी परिषदीय विद्यालयों में एमडीएम बनवाया जाएगा। 2014 में जनपद के सूखाग्रस्त घोषित होने के बाद मध्याह्न भोजन प्राधिकरण उप्र के निदेशक ने डीएम सौम्या अग्रवाल को आदेश जारी किया है। 58 जिले सूखाग्रस्त घोषित किए गए हैं। टीचरों को विद्यालय जाकर एमडीएम का संचालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
जिले में संचालित 2039 प्राथमिक व 803 उच्च प्राथमिक विद्यालयों का संचालन परीक्षाफल वितरण के बाद 20 मई से बंद करने के आदेश थे लेकिन गुरुवार को नया आदेश जारी होने के बाद अब विद्यालय 30 जून तक खुलेंगे। सुबह 9 से 11 बजे तक एमडीएम बनवाया जाएगा।
शासन ने यह व्यवस्था जिले को सूखाग्रस्त देखते हुए संचालित की है। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण की निदेशक श्रद्धा मिश्रा की ओर से डीएम को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मध्याह्न भोजन वितरण का उत्तरदायित्व उन्हीं व्यक्ति व संस्थाओं का है जो पहले से वितरित कर रहे हैं। परिषदीय विद्यालयों के साथ ही मदरसों में भी यह व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित रखी जाएगी।
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एमडीएम का संचालन करने के लिए ग्राम प्रधान, स्वयं सहायता समूह के अलावा छात्रों व उनके अभिभावकों को भी इसकी जानकारी दे दी जाए। रसोइया भी सामान्य दिवसों की तरह ही विद्यालय आएंगे। ग्रीष्मावकाश में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था हेतु अनाज एवं परिवर्तन लागत की उपलब्धता कार्यदायी संस्था के स्तर पर सुनिश्चित की जानी है। विद्यालयों में पेयजल की व्यवस्था भी अनिवार्य है।
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जिले में संचालित 2039 प्राथमिक व 803 उच्च प्राथमिक विद्यालयों का संचालन परीक्षाफल वितरण के बाद 20 मई से बंद करने के आदेश थे लेकिन गुरुवार को नया आदेश जारी होने के बाद अब विद्यालय 30 जून तक खुलेंगे। सुबह 9 से 11 बजे तक एमडीएम बनवाया जाएगा।
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शासन ने यह व्यवस्था जिले को सूखाग्रस्त देखते हुए संचालित की है। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण की निदेशक श्रद्धा मिश्रा की ओर से डीएम को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मध्याह्न भोजन वितरण का उत्तरदायित्व उन्हीं व्यक्ति व संस्थाओं का है जो पहले से वितरित कर रहे हैं। परिषदीय विद्यालयों के साथ ही मदरसों में भी यह व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित रखी जाएगी।
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एमडीएम का संचालन करने के लिए ग्राम प्रधान, स्वयं सहायता समूह के अलावा छात्रों व उनके अभिभावकों को भी इसकी जानकारी दे दी जाए। रसोइया भी सामान्य दिवसों की तरह ही विद्यालय आएंगे। ग्रीष्मावकाश में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था हेतु अनाज एवं परिवर्तन लागत की उपलब्धता कार्यदायी संस्था के स्तर पर सुनिश्चित की जानी है। विद्यालयों में पेयजल की व्यवस्था भी अनिवार्य है।