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हर्षोल्लास के साथ मनाई गई होली
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Sun, 08 Mar 2015 12:06 AM IST
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उन्नाव। जनपद में होली का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से शाम तक जमकर रंग चला। सड़कें लाल, नीले, पीले, हरे व गुलाबी रंगों से पुत गईं। देर रात तक लाउडस्पीकरों पर फिल्मी गीत बजते रहे। युवा व बच्चे इन गीतों पर नाचते-झूमते रहे।
बुजुर्गों ने अबीर-गुलाल से अपनों के साथ होली खेली। शाम को घरों में जाकर एक दूसरे के साथ गले मिले और होली की बधाई दी। रंग खेलने में महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं। बच्चे पिचकारियों और गुब्बारों में रंग भरकर एक दूसरे पर डालते रहे व होली के जश्न में डूबे रहे।
शुक्रवार को शहरवासियों पर होली का सुरूर चढ़ा रहा। शहरवासी होली के रंगों में रंगे रहे। लोगों ने सुबह से ही रंग-गुलाल उड़ाना शुरू कर दिया। मुहल्लों में युवकों ने एक-दूसरे को लेकर टोली बनाई और चौराहों व प्रमुख मार्गों पर एकत्र हो गए। युवकों ने एक-दूसरे से जमकर रंग खेला।
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युवाओं ने सड़कों से गुजरने वाले राहगीरों को भी नहीं बख्शा। वाहन सवारों को रोक-रोककर बुरा न मानो होली है कहकर रंग दिया। शहर के चौराहों व गली नुक्कड़ों में लाउडस्पीकरों पर ‘बलम पिचकारी, जो तूने मुझे मारी’ और ‘होली खेले रघुवीरा, अवध में होली खेले रघुवीरा’ आदि फिल्मी गीत बजते रहे।
क्या युवा क्या बच्चे सभी होली के रंग में रंगे नजर आए और गीतों पर खूब जमकर नाचे। इसके बाद दूसरे दिन शनिवार को दूज के दिन भी जमकर रंग चला। हर गली चौराहों पर होरियारों की ही टोलियां नजर आईं। ग्रामीण अंचलों में रंगों के साथ फाग का भी दौर चलता रहा।
सुबह से बच्चे पिचकारियां लेकर छतों पर डटे रहे और घर के बाहर से गुजरने वाले लोगों पर रंग की बौछार करते रहे। वृद्ध भी होली के रंग में सराबोर रहे और शाम को घर जाकर बधाई देने का दौर शुरु हुआ। एक-दूसरे के घर जाकर अबीर-गुलाल लगाया। गुझिया व नमकीन खाकर होली की बधाई दी। साथ ही लोगों ने पुराने गिले-शिकवे दूरकर एक दूसरे के गले मिले। दो दिनों तक लोग होली के रंग में रंगे रहे।
शुक्लागंज संवाददाता के अनुसार, डीजे की धुन पर लोगों ने रंगों का त्योहार मनाया। होरियारों की टोलियां सड़कों पर निकलीं और जमकर रंग बरसा। लोगों ने गुझिया और पापड़ोें से एक-दूसरे का स्वागत किया। जहां एक ओर युवाओं की टोलियों ने फिल्मी धुनों पर जमकर मस्ती की ,वहीं बच्चों ने राहगीरों पर कभी पिचकारी से तो कभी रंग भरे गुब्बारे फेंक मजा लिया।
रंग के साथ-साथ लोगों ने घरों में बने स्वादिष्ट पकवान का भी लुप्त उठाया। रंग खेलने का सिलसिला दोपहर 3 बजे तक चला। रंग खत्म होते ही लोग एक दूसरे के घरों में पहुंचे और होली की बंधाई दी। इस मौके पर घरों पर पहुंचे मेहमानों का तरह-तरह के होली में बनने वाले पकवानों से स्वागत किया गया। देर रात तक यह सिलसिला चलता रहा।
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बुजुर्गों ने अबीर-गुलाल से अपनों के साथ होली खेली। शाम को घरों में जाकर एक दूसरे के साथ गले मिले और होली की बधाई दी। रंग खेलने में महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं। बच्चे पिचकारियों और गुब्बारों में रंग भरकर एक दूसरे पर डालते रहे व होली के जश्न में डूबे रहे।
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शुक्रवार को शहरवासियों पर होली का सुरूर चढ़ा रहा। शहरवासी होली के रंगों में रंगे रहे। लोगों ने सुबह से ही रंग-गुलाल उड़ाना शुरू कर दिया। मुहल्लों में युवकों ने एक-दूसरे को लेकर टोली बनाई और चौराहों व प्रमुख मार्गों पर एकत्र हो गए। युवकों ने एक-दूसरे से जमकर रंग खेला।
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युवाओं ने सड़कों से गुजरने वाले राहगीरों को भी नहीं बख्शा। वाहन सवारों को रोक-रोककर बुरा न मानो होली है कहकर रंग दिया। शहर के चौराहों व गली नुक्कड़ों में लाउडस्पीकरों पर ‘बलम पिचकारी, जो तूने मुझे मारी’ और ‘होली खेले रघुवीरा, अवध में होली खेले रघुवीरा’ आदि फिल्मी गीत बजते रहे।
क्या युवा क्या बच्चे सभी होली के रंग में रंगे नजर आए और गीतों पर खूब जमकर नाचे। इसके बाद दूसरे दिन शनिवार को दूज के दिन भी जमकर रंग चला। हर गली चौराहों पर होरियारों की ही टोलियां नजर आईं। ग्रामीण अंचलों में रंगों के साथ फाग का भी दौर चलता रहा।
सुबह से बच्चे पिचकारियां लेकर छतों पर डटे रहे और घर के बाहर से गुजरने वाले लोगों पर रंग की बौछार करते रहे। वृद्ध भी होली के रंग में सराबोर रहे और शाम को घर जाकर बधाई देने का दौर शुरु हुआ। एक-दूसरे के घर जाकर अबीर-गुलाल लगाया। गुझिया व नमकीन खाकर होली की बधाई दी। साथ ही लोगों ने पुराने गिले-शिकवे दूरकर एक दूसरे के गले मिले। दो दिनों तक लोग होली के रंग में रंगे रहे।
शुक्लागंज संवाददाता के अनुसार, डीजे की धुन पर लोगों ने रंगों का त्योहार मनाया। होरियारों की टोलियां सड़कों पर निकलीं और जमकर रंग बरसा। लोगों ने गुझिया और पापड़ोें से एक-दूसरे का स्वागत किया। जहां एक ओर युवाओं की टोलियों ने फिल्मी धुनों पर जमकर मस्ती की ,वहीं बच्चों ने राहगीरों पर कभी पिचकारी से तो कभी रंग भरे गुब्बारे फेंक मजा लिया।
रंग के साथ-साथ लोगों ने घरों में बने स्वादिष्ट पकवान का भी लुप्त उठाया। रंग खेलने का सिलसिला दोपहर 3 बजे तक चला। रंग खत्म होते ही लोग एक दूसरे के घरों में पहुंचे और होली की बंधाई दी। इस मौके पर घरों पर पहुंचे मेहमानों का तरह-तरह के होली में बनने वाले पकवानों से स्वागत किया गया। देर रात तक यह सिलसिला चलता रहा।