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Unnao News: हरदोई रोड पुल हुआ जर्जर, स्लैब दरकने के साथ दिख रही सरिया
Tue, 22 Jul 2025 01:23 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
Updated Tue, 22 Jul 2025 01:23 AM IST
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उन्नाव। शहर के सबसे व्यस्ततम हरदोई रोड पुल पर आवागमन किसी बड़े जोखिम से कम नहीं है। यातायात के दबाव की मार झेल रहे पुल की स्लैब दरक रही है। पानी का रिसाव होने से सरिया में जंग लग रहा है और कंक्रीट वाला मसाला गिरने लगा है। कई स्थानों पर गड्ढे होने से सरिया भी बाहर झांकने लगी हैं। बड़ी बात यह है कि 39 साल पहले बने इस पुल के निचले हिस्से की आज तक एक बार भी मरम्मत नहीं हुई है।
वर्ष 1986 में शहर की कल्याणी क्राॅसिंग पर करीब 20 करोड़ की लागत से पुल बना था। हरदोई रोड को जाने वाले मार्ग पर बने इस पुल से रोजाना सैकड़ों की संख्या में वाहन निकलते हैं। इनमें भारी वाहनों की संख्या ज्यादा होती है। पुल को बने 39 साल हो गए हैं। इतने सालों में पुल की कभी पूरी तरह से मरम्मत नहीं हुई, जबकि समय गुजरने के साथ पुल से आवागमन करने वाले वाहनों की संख्या बढ़ती गई। भारी वाहनों के 24 घंटे आवागमन से पुल लगातार कमजोर हो रहा है। पुल के निचले हिस्से में न तो पिलर (कोठी) की मरम्मत हुई और ना ही स्लैब की। वर्तमान समय में पुल की स्लैब दरकने लगी है। पानी का रिसाव होने से सरिया में जंग लग गई है। कोठियों में भी दरारें नजर आ रही हैं। जिससे पुल जर्जर अवस्था में पहुंच रहा है। पुल को अब नीचे से ऊपर तक पूरी तरह से दुरुस्त किया जाना जरूरी है।
इंसेट-1
मरम्मत के लिए 2023 में शासन को भेजा था डेढ़ करोड़ का प्रस्ताव
लोक निर्माण विभाग ने वर्ष 2023 में पुल का सर्वे कराया था। इस दौरान पुल का निचला हिस्सा क्षतिग्रस्त मिला था। इसके बाद मरम्मत के लिए डेढ़ करोड़ का प्रस्ताव तैयार कराकर भेजा गया था। हालांकि लगभग दो साल होने वाले हैं इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल सकी है।
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इंसेट-2
हर छह माह में पुल की सड़क की होती मरम्मत
जब पुल का डिजाइन तैयार हुआ था, उस समय यहां से पांच से छह सौ वाहनों का आवागमन होता था। आज इस पुल से करीब एक हजार वाहन रोजाना आवागमन करते हैं। इनमें भारी वाहनों की संख्या सात सौ से आठ सौ के आसपास है। यातायात अधिक होने से पुल की सड़क अक्सर क्षतिग्रस्त हो जाती है। ऐसे में इसकी मरम्मत तो हर छह माह में करा दी जाती है, लेकिन निचले हिस्से के लिए बजट नहीं मिल पा रहा है।
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यह सही है कि पुल का निचला हिस्सा कमजोर हो रहा है। पूर्व में भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली थी। अब नए सिरे से सालाना कार्ययोजना में डेढ़ करोड़ का प्रस्ताव फिर शामिल किया है। जैसे ही बजट मिलेगा, वैसे ही मरम्मत शुरू करा दी जाएगी।
सुबोध कुमार, एक्सईएन पीडब्लूडी निर्माणखंड।
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वर्ष 1986 में शहर की कल्याणी क्राॅसिंग पर करीब 20 करोड़ की लागत से पुल बना था। हरदोई रोड को जाने वाले मार्ग पर बने इस पुल से रोजाना सैकड़ों की संख्या में वाहन निकलते हैं। इनमें भारी वाहनों की संख्या ज्यादा होती है। पुल को बने 39 साल हो गए हैं। इतने सालों में पुल की कभी पूरी तरह से मरम्मत नहीं हुई, जबकि समय गुजरने के साथ पुल से आवागमन करने वाले वाहनों की संख्या बढ़ती गई। भारी वाहनों के 24 घंटे आवागमन से पुल लगातार कमजोर हो रहा है। पुल के निचले हिस्से में न तो पिलर (कोठी) की मरम्मत हुई और ना ही स्लैब की। वर्तमान समय में पुल की स्लैब दरकने लगी है। पानी का रिसाव होने से सरिया में जंग लग गई है। कोठियों में भी दरारें नजर आ रही हैं। जिससे पुल जर्जर अवस्था में पहुंच रहा है। पुल को अब नीचे से ऊपर तक पूरी तरह से दुरुस्त किया जाना जरूरी है।
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मरम्मत के लिए 2023 में शासन को भेजा था डेढ़ करोड़ का प्रस्ताव
लोक निर्माण विभाग ने वर्ष 2023 में पुल का सर्वे कराया था। इस दौरान पुल का निचला हिस्सा क्षतिग्रस्त मिला था। इसके बाद मरम्मत के लिए डेढ़ करोड़ का प्रस्ताव तैयार कराकर भेजा गया था। हालांकि लगभग दो साल होने वाले हैं इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल सकी है।
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हर छह माह में पुल की सड़क की होती मरम्मत
जब पुल का डिजाइन तैयार हुआ था, उस समय यहां से पांच से छह सौ वाहनों का आवागमन होता था। आज इस पुल से करीब एक हजार वाहन रोजाना आवागमन करते हैं। इनमें भारी वाहनों की संख्या सात सौ से आठ सौ के आसपास है। यातायात अधिक होने से पुल की सड़क अक्सर क्षतिग्रस्त हो जाती है। ऐसे में इसकी मरम्मत तो हर छह माह में करा दी जाती है, लेकिन निचले हिस्से के लिए बजट नहीं मिल पा रहा है।
यह सही है कि पुल का निचला हिस्सा कमजोर हो रहा है। पूर्व में भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली थी। अब नए सिरे से सालाना कार्ययोजना में डेढ़ करोड़ का प्रस्ताव फिर शामिल किया है। जैसे ही बजट मिलेगा, वैसे ही मरम्मत शुरू करा दी जाएगी।
सुबोध कुमार, एक्सईएन पीडब्लूडी निर्माणखंड।