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खतरनाक होता जा रहा है भूगर्भ जल
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Thu, 01 Oct 2015 12:03 AM IST
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उन्नाव। उद्योगों से जिले के औद्योगिक विकास ने तो जबरदस्त रफ्तार पकड़ी है, लेकिन इनसे होने वाले प्रदूषण ने जिला वासियों को दूषित वातावरण की चपेट में ला दिया है। हालात ये हो गए हैं कि लोग चाहे लखनऊ हो या कानपुर किसी भी ओर से शहर की ओर बढ़ते हैं तो उन्हें यहां की आबोहवा में फैली दुर्गंध से ही उन्नाव के आने का पता चल जाता है।
जिले की औद्योगिक इकाइयों मेें लगी चिमनियों से निकलने वाले जहरीले धुएं के कारण यहां की आबोहवा में प्रदूषण चरम पर है। इससे क्षेत्र के निवासियों का सांस लेना भी दूभर होता जा रहा है। आम जनता की इस गंभीर समस्या को लेकर प्रदूषण विभाग के अधिकारी अनजान बने हुए हैं। कोई भी अपनी जिम्मेदारी की ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
चारों ओर से उन्नाव इंडस्ट्रीज से घिरा हुआ है। इसमें सैकड़ों की संख्या में वायु और जल प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियां भी हैं।
कारखानों की चिमनियां एक ओर जहरीला धुआं उगल रही हैं वहीं दूसरी ओर इन फैक्ट्रियों से दूषित जल भी खुलेआम नालों में बहाया जा रहा है। इससे आबोहवा दूषित हो रही है। इन चिमनियों से निकल रहा जहरीला धुआं लोगों को विभिन्न प्रकार की बीमारियों से भी ग्रसित कर रहा है। वर्तमान में जिले की आबोहवा प्रदूषित होती जा रही है जो आम जनमानस को भयंकर बीमारियों की चपेट में लेने के लिए पर्याप्त हैं।
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इस प्रकार वातावरण में लगातार बढ़ रहा वायु प्रदूषण जिले के निवासियों को खुली हवा में सोने व घूमने पर पाबंदी लगा सकता है। इसमें सबसे अधिक चिंता का विषय यह है कि वातावरण में फैल रहे प्रदूषण की ओर शासन-प्रशासन की ओर से कोई भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
औद्योगिक क्षेत्रों से घिरा है उन्नाव
उन्नाव। जिला चार मुख्य औद्योगिक क्षेत्रों से घिरा हुआ है। इसमें पहला दही चौकी का साइट नं-1, दूसरा साइट नं-2, तीसरा लेदर टेक्रोलॉजी पार्क बंथर और मगरवारा इंडस्ट्रीज एरिया मुख्य है। इन सभी में लगभग 125 फैक्ट्रियां ऐसी हैं जो चिमनियों के जरिए जिले की आबोहवा में जहरीला धुआं घोल रही हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के चलते इन फैक्ट्रियों की मनमानी पर लगाम नहीं लग पा रही है।
वर्जन
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की टीम ही अब जिले में मानक विहीन फैक्ट्रियों पर कार्रवाई करती है। बिना टीम के विभाग के अधिकारी इन फैक्ट्रियों की जांच नहीं करते हैं। इस कारण रूटीन चेकिंग के अलावा अधिक सख्ती नहीं की जा रही है। - डॉ. रामकरन, आरओ, जिला प्रदूषण नियंत्रण कंट्रोल बोर्ड।
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जिले की औद्योगिक इकाइयों मेें लगी चिमनियों से निकलने वाले जहरीले धुएं के कारण यहां की आबोहवा में प्रदूषण चरम पर है। इससे क्षेत्र के निवासियों का सांस लेना भी दूभर होता जा रहा है। आम जनता की इस गंभीर समस्या को लेकर प्रदूषण विभाग के अधिकारी अनजान बने हुए हैं। कोई भी अपनी जिम्मेदारी की ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
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चारों ओर से उन्नाव इंडस्ट्रीज से घिरा हुआ है। इसमें सैकड़ों की संख्या में वायु और जल प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियां भी हैं।
कारखानों की चिमनियां एक ओर जहरीला धुआं उगल रही हैं वहीं दूसरी ओर इन फैक्ट्रियों से दूषित जल भी खुलेआम नालों में बहाया जा रहा है। इससे आबोहवा दूषित हो रही है। इन चिमनियों से निकल रहा जहरीला धुआं लोगों को विभिन्न प्रकार की बीमारियों से भी ग्रसित कर रहा है। वर्तमान में जिले की आबोहवा प्रदूषित होती जा रही है जो आम जनमानस को भयंकर बीमारियों की चपेट में लेने के लिए पर्याप्त हैं।
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इस प्रकार वातावरण में लगातार बढ़ रहा वायु प्रदूषण जिले के निवासियों को खुली हवा में सोने व घूमने पर पाबंदी लगा सकता है। इसमें सबसे अधिक चिंता का विषय यह है कि वातावरण में फैल रहे प्रदूषण की ओर शासन-प्रशासन की ओर से कोई भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
औद्योगिक क्षेत्रों से घिरा है उन्नाव
उन्नाव। जिला चार मुख्य औद्योगिक क्षेत्रों से घिरा हुआ है। इसमें पहला दही चौकी का साइट नं-1, दूसरा साइट नं-2, तीसरा लेदर टेक्रोलॉजी पार्क बंथर और मगरवारा इंडस्ट्रीज एरिया मुख्य है। इन सभी में लगभग 125 फैक्ट्रियां ऐसी हैं जो चिमनियों के जरिए जिले की आबोहवा में जहरीला धुआं घोल रही हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के चलते इन फैक्ट्रियों की मनमानी पर लगाम नहीं लग पा रही है।
वर्जन
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की टीम ही अब जिले में मानक विहीन फैक्ट्रियों पर कार्रवाई करती है। बिना टीम के विभाग के अधिकारी इन फैक्ट्रियों की जांच नहीं करते हैं। इस कारण रूटीन चेकिंग के अलावा अधिक सख्ती नहीं की जा रही है। - डॉ. रामकरन, आरओ, जिला प्रदूषण नियंत्रण कंट्रोल बोर्ड।