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डेढ़ करोड़ खर्च कर बैक्टीरिया को दी जिंदगी
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सीईटीपी दही चौकी में चलता एरियटर टैंक।
- फोटो : UNNAO
उन्नाव। सीईटीपी में प्रदूषित उत्प्रवाह को शुद्ध करने के लिए प्रयोग होने वाले सीडोमास बैक्टीरिया को जिंदा रखने के लिए सीईटीपी प्रबंधतंत्र दो माह में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। आने वाले समय में बैक्टीरिया के घनत्व के बनाए रखने की भी कार्ययोजना बनाई जा रही है। बैक्टीरिया के जिंदा रहने पर ही सीईटीपी को खोलने की क्लीनचिट सीपीसीबी की ओर से मिलेगी।
सीईटीपी दही चौकी व बंथर में टेनरियों से आने वाले प्रदूषित पानी को शुद्ध करने के लिए सीडोमास बैक्टीरिया का प्रयोग होता है। पानी में घुले प्रदूषित तत्वों से ही बैक्टीरिया को पोषण मिलता है और वह इसी के जरिए जिंदा रहता है। दो माह पूर्व एनजीटी ने प्रदूषित उत्प्रवाह मिलने पर दोनों सीईटीपी व उससे जुड़ी टेनरियों को बंद करा दिया था। जिसके बाद सीईटीपी में प्रदूषित उत्प्रवाह आना बंद हो गया। ऐसे में सीडोमास बैक्टीरिया को जिंदा रखने की मुश्किल सामने आ गई। इस पर सीईटीपी प्रबंधतंत्र ने प्लांट के एरियटर चैंबर में ऑक्सीजन पहुंचाने के साथ ही गुड़, मक्का, मोलेसिस, गोबर, डीएपी, यूरिया व स्टार्च का भोजन बैक्टीरिया को देना शुरू किया। यह कवायद पिछले दो माह से लगातार की जा रही है। बैक्टीरिया इन्हीं पदार्थों से अपने लिए पोषण पा रहा है। सीईटीपी प्रबंधतंत्र के अनुसार सीपीसीबी के निरीक्षण में अगर बैक्टीरिया निष्क्रिय मिलेगा तो सीईटीपी को कभी खोलने का आदेश नहीं जारी किया जाएगा। जिसके चलते वह हर हाल में बैक्टीरिया को जिंदा रखना चाहते हैं। इस प्रक्रिया में अब तक डेढ़ करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। सीईटीपी दही चौकी के कंसल्टेंट आशुतोष टंडन ने बताया कि पोषक तत्व देकर बैक्टीरिया को जिंदा रखने की कवायद की जा रही है। घनत्व बढ़ाने के लिए बैक्टीरिया मंगाया गया है।
टेनरी से मिलता है पैसा
सीईटीपी को चलाने के लिए टेनरियों की ओर से पैसा दिया जाता है। प्रत्येक माह लगभग 20 से 25 लाख रुपये का खर्च आता था। हालांकि सीईटीपी बंद होने व बैक्टीरिया को जिंदा रखने की कोशिश में खर्च कई गुना बढ़ गया।
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सीईटीपी खुलने के आसार नहीं
एनजीटी के आदेश पर बंद किए गए दोनों सीईटीपी प्लांट व उससे जुड़ी टेनरियों के खुलने के आसार अभी नजर नहीं आ रहे हैं। दो दिन बाद सीपीसीबी व यूपीपीसीबी संयुक्त रूप से सीईटीपी का निरीक्षण करेगी। जिसके बाद रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी जाएगी।
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सीईटीपी दही चौकी व बंथर में टेनरियों से आने वाले प्रदूषित पानी को शुद्ध करने के लिए सीडोमास बैक्टीरिया का प्रयोग होता है। पानी में घुले प्रदूषित तत्वों से ही बैक्टीरिया को पोषण मिलता है और वह इसी के जरिए जिंदा रहता है। दो माह पूर्व एनजीटी ने प्रदूषित उत्प्रवाह मिलने पर दोनों सीईटीपी व उससे जुड़ी टेनरियों को बंद करा दिया था। जिसके बाद सीईटीपी में प्रदूषित उत्प्रवाह आना बंद हो गया। ऐसे में सीडोमास बैक्टीरिया को जिंदा रखने की मुश्किल सामने आ गई। इस पर सीईटीपी प्रबंधतंत्र ने प्लांट के एरियटर चैंबर में ऑक्सीजन पहुंचाने के साथ ही गुड़, मक्का, मोलेसिस, गोबर, डीएपी, यूरिया व स्टार्च का भोजन बैक्टीरिया को देना शुरू किया। यह कवायद पिछले दो माह से लगातार की जा रही है। बैक्टीरिया इन्हीं पदार्थों से अपने लिए पोषण पा रहा है। सीईटीपी प्रबंधतंत्र के अनुसार सीपीसीबी के निरीक्षण में अगर बैक्टीरिया निष्क्रिय मिलेगा तो सीईटीपी को कभी खोलने का आदेश नहीं जारी किया जाएगा। जिसके चलते वह हर हाल में बैक्टीरिया को जिंदा रखना चाहते हैं। इस प्रक्रिया में अब तक डेढ़ करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। सीईटीपी दही चौकी के कंसल्टेंट आशुतोष टंडन ने बताया कि पोषक तत्व देकर बैक्टीरिया को जिंदा रखने की कवायद की जा रही है। घनत्व बढ़ाने के लिए बैक्टीरिया मंगाया गया है।
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टेनरी से मिलता है पैसा
सीईटीपी को चलाने के लिए टेनरियों की ओर से पैसा दिया जाता है। प्रत्येक माह लगभग 20 से 25 लाख रुपये का खर्च आता था। हालांकि सीईटीपी बंद होने व बैक्टीरिया को जिंदा रखने की कोशिश में खर्च कई गुना बढ़ गया।
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सीईटीपी खुलने के आसार नहीं
एनजीटी के आदेश पर बंद किए गए दोनों सीईटीपी प्लांट व उससे जुड़ी टेनरियों के खुलने के आसार अभी नजर नहीं आ रहे हैं। दो दिन बाद सीपीसीबी व यूपीपीसीबी संयुक्त रूप से सीईटीपी का निरीक्षण करेगी। जिसके बाद रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी जाएगी।