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Unnao News: बाढ़ पीड़ितों को न खाना मिल रहा और न राशन, रहने के स्थान पर ताला
Thu, 21 Aug 2025 01:04 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
Updated Thu, 21 Aug 2025 01:04 AM IST
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फोटो नंबर 32-उम्मेदखेड़ा गांव में नाव से चारा ले जाता ग्रामीण। संवाद
परियर(उन्नाव)। बाढ़ पीड़ितों को केवल कागजों पर ही राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। धरातल पर पीड़ितों के न खाना मिल रहा है और न ही राशन। यहां तक की पीड़ितों के लिए तैयार की गई बाढ़ चौकी में ताले लटक रहा है। व्यवस्थाओं की यह असलियत पीड़ितों ने बुधवार शाम को राहत सुविधाओं का जायजा लेने पहुंचे डीएम गौरांग राठी को बताई। इसके बाद डीएम ने अधीनस्थों को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का निर्देश दिया और बाढ़ का पानी भरा देख माना बंगला के आधे रास्ते से लौट गए।
बुधवार शाम करीब 6:15 बजे डीएम गौरांग राठी व एसपी दीपक भूकर तहसील व सिंचाई विभाग के अफसरों के साथ बाढ़ प्रभावित परियर क्षेत्र में निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने बाढ़ चौकी जानकीकुंड परियर का निरीक्षण किया। चौकी में बिजली, खाने पीने, रहने, दवाओं, स्नान व शौचालय की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और पीड़ितों से सुविधाओं की जानकारी ली। माना बंगला निवासी कार्तिक, आदर्श, मान्या, शिवा, रामाकांति व उमंग के परिजनों ने डीएम को बताया कि बच्चे पैरों में दाने व आंखों में दर्द की समस्या से परेशान हैं। कोई स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल रही है। बाबूबंगला निवासी दिव्यांग शुभम ने खाने व बिजली की समस्या बताई। प्राथमिक विद्यालय में रह रहीं बाबू बंगला की वंदना ने डीएम को बताया कि उन्हें राशन नहीं मिला है। जब डीएम ने तीन बार खाना मिलने के बारे में पूछा तो वंदना ने एक दिन भी खाना न मिलने की जानकारी दी। देवीपुरवा निवासी रामविलास ने बाढ़ चौकी के कमरों में लगे ताला खुलवाने की मांग की। डीएम ने बाढ़ चौकी में मौजूद बच्चों को चॉकलेट व बिस्किट वितरित किए। वापसी के दौरान माना बंगला के रास्ते पर लगभग एक किमी पहले ही पानी भरा होने से डीएम वहीं से बाढ़ की स्थिति देख लौट गए। इस दौरान एसडीएम सदर क्षितिज द्विवेदी, सफीपुर सीओ सोनम सिंह व एडीओ पंचायत विनोद वर्मा सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।
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छतों पर गुजर बसर कर रहे ग्रामीण
परियर (उन्नाव)। सदर तहसील क्षेत्र के पनपथा, माना बंगला, देवीपुरवा, बाबू बंगला, चंडी बंगला, पनपथा, बेनीपुरवा, कोलवा, टपरा आदि गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। यहां पर ग्रामीण मजबूरी में घरों की छत पर रहकर गुजर बसर कर रहे हैं। छतों पर ही रहना और खाना हो रहा है। इन गांवों में ज्यादातर लोग बुखार, जुकाम, शरीर में दर्द व पानी में रहने के चलते पैरों में दाने व खुजली से परेशान हैं। पानी भरा होने से घरों से निकलकर दवा लेने के लिए मेडिकल स्टोर नहीं जा पा रहे हैं। देवीपुरवा व माना बंगला से सिर्फ पांच परिवार ही घरों से निकल कर सड़क पर तंबू लगाकर रह रहे हैं। पीएचसी प्रभारी डॉ. विकास आनंद ने बताया कि बुधवार को नगवा में दवा वितरित की गई है। जानकीकुंड में भी स्वास्थ्यकर्मी मौजूद है।
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ऊंचे स्थान पर पढ़ाया जा रहा बच्चों को
फतेहपुर चौरासी (उन्नाव)। जगतनगर सहजनी मार्ग पर गांव मन्नानगर के पास पानी भर जाने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है। गांव भुलभुलियाखेड़ा के कंपोजिट विद्यालय में पानी भर जाने बच्चों को पास में ऊंचे स्थान पर पढ़ाया जा रहा है। गंगा का पानी बढ़ने से अब आसपास क्षेत्र में फैलने लगा है। मन्नानगर में पुलिया के पास कटरी क्षेत्र के प्रमुख मार्ग पर पानी भर जाने से गांव जाजामाऊ, रुस्तमपुर,उम्मरपुर प्रीतम, हरदासपुर सहित कई गांवों का आवागमन प्रभावित हो गया है। पूर्व प्रधान विनोद व संतोष अग्निहोत्री ने बताया कि इस मार्ग के कटने से बाढ़ का पानी इस्माइलपुर नौगवां, पंडितखेड़ा, बरधाई, सरहा आदि गांवों में पानी फैल जाएगा। बीईओ विनय कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि भुलभुलियाखेड़ा कंपोजिट विद्यालय में पानी भर जाने से पास में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।
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फोटो
रसूलपुर बकिया-अकबरपुर संपर्क मार्ग से आवागमन बंद
हसनगंज (उन्नाव)। तहसील क्षेत्र के रसूलपुर बकिया गांव के बाहर से निकली सई नदी का जलस्तर बढ़ने की वजह से अकबरपुर संपर्क मार्ग के ऊपर से पानी बहने लगा है। पानी के तेज बहाव के चलते सड़क क्षतिग्रस्त हो गई। इससे आने जाने वाले राहगीर व स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राए जान जोखिम में डालकर निकलते रहे। जानकारी होने पर नायब तहसीलदार प्रीति सिंह राजस्व टीम के साथ पहुंची और सड़क के दोनों तरफ रस्सी व बोरियां लगवाकर सुरक्षा को देखते हुए आवागमन बंद करा दिया। इससे अब ग्रामीणों को मियागंज जाने के लिए दस किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाकर छित्तेपुर मार्ग से होते हुए आवागमन करना पड़ेगा।
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घरों के दरवाजों तक भरा पानी
चकलवंशी (उन्नाव)। गंगा के उफनाने से बाढ़ का पानी गांव में जमा होकर रास्ते अवरुद्ध कर रहा है। दरवाजे के सामने भरे पानी से नौनिहालों पर खतरा मंडरा रहा है। सबसे अधिक उम्मेदखेड़ा गांव के अंदर पानी है। गांव के भैयालाल, कल्लू, रामपाल, रामसजीवन मुकेश आदि ने बताया कि गांव के रास्तों में दरवाजे तक पानी भर गया है। इससे नौनिहालों के लिए पानी खतरनाक हो गया है। वहीं मवेशियों को चारे की समस्या विकराल होती जा रही है। खेत में तरोई, बैगन की सब्जी सड़ रही है। ब्लाक सरोसी क्षेत्र के ग्राम पंचायत सथरा और प्यारेपुर के 10 गांव पहले से ही बाढ़ की चपेट में हैं।
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बाढ़ में बहे करेला किसानों के अरमान
गंजमुरादाबाद (उन्नाव)। कटरी इलाके की प्रमुख करेले की फसल गंगा नदी में आई भीषण बाढ़ की भेंट चढ़ गई है। करीब 100 बीघा करेले की फसल जलमग्न होकर सड़ गई है। किसान सड़ी बेल में लगी करेले की फसल तोड़ने में जुटे हुए हैं। कटरी इलाके के सिरधरपुर, गहरपुरवा, बगिया, बदलीपुरवा आदि गांवों में करेले की खेती की जाती है। करेला 3000-3500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से आसानी से बिक जाता है। किसान को एक बीघा करेले की खेती करने के लिए करीब 25 हजार रुपये लागत आती है। जबकि एक बीघा भूमि में करीब 70-80 क्विंटल करेला निकल आता है। जिसकी कीमत मंडी में करीब दो लाख हो जाती है। जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिल जाता है। इस बार यहां की करीब 100 बीघा करेले की फसल गंगा नदी में आई भीषण बाढ़ की भेंट चढ़ गई है। जो एक सप्ताह से जलमग्न होकर सड़ गई है। जिससे किसानों को भारी नुकसान पहुंचा है।
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सई नदी का जलस्तर बढ़ा, फसलें जलमग्न
औरास (उन्नाव)। कस्बा औरास से होकर गुजरी सई नदी का जलस्तर बढ़ने से कबरोई, भटपुरवा, धानमऊ, लोधाटिकुर बर्रा व नई बस्ती गांव की हजारों बीघे धान की सफल जलमग्न हो गई है। खेतों में जानवरों के लिए खड़े हरे चारे व मक्का सहित अन्य फसलें बर्बाद हो गई हैं। किसान विजय सिंह, काका सिंह, राकेश रावत, शिवकुमार व लल्लन यादव आदि ने बताया कि फसलें बर्बाद हो गई हैं। जानवरों के लिए खेतों में खड़ा हरा चारा खराब हो गया है। पानी अधिक होने से खेत तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
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बुधवार शाम करीब 6:15 बजे डीएम गौरांग राठी व एसपी दीपक भूकर तहसील व सिंचाई विभाग के अफसरों के साथ बाढ़ प्रभावित परियर क्षेत्र में निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने बाढ़ चौकी जानकीकुंड परियर का निरीक्षण किया। चौकी में बिजली, खाने पीने, रहने, दवाओं, स्नान व शौचालय की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और पीड़ितों से सुविधाओं की जानकारी ली। माना बंगला निवासी कार्तिक, आदर्श, मान्या, शिवा, रामाकांति व उमंग के परिजनों ने डीएम को बताया कि बच्चे पैरों में दाने व आंखों में दर्द की समस्या से परेशान हैं। कोई स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल रही है। बाबूबंगला निवासी दिव्यांग शुभम ने खाने व बिजली की समस्या बताई। प्राथमिक विद्यालय में रह रहीं बाबू बंगला की वंदना ने डीएम को बताया कि उन्हें राशन नहीं मिला है। जब डीएम ने तीन बार खाना मिलने के बारे में पूछा तो वंदना ने एक दिन भी खाना न मिलने की जानकारी दी। देवीपुरवा निवासी रामविलास ने बाढ़ चौकी के कमरों में लगे ताला खुलवाने की मांग की। डीएम ने बाढ़ चौकी में मौजूद बच्चों को चॉकलेट व बिस्किट वितरित किए। वापसी के दौरान माना बंगला के रास्ते पर लगभग एक किमी पहले ही पानी भरा होने से डीएम वहीं से बाढ़ की स्थिति देख लौट गए। इस दौरान एसडीएम सदर क्षितिज द्विवेदी, सफीपुर सीओ सोनम सिंह व एडीओ पंचायत विनोद वर्मा सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।
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छतों पर गुजर बसर कर रहे ग्रामीण
परियर (उन्नाव)। सदर तहसील क्षेत्र के पनपथा, माना बंगला, देवीपुरवा, बाबू बंगला, चंडी बंगला, पनपथा, बेनीपुरवा, कोलवा, टपरा आदि गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। यहां पर ग्रामीण मजबूरी में घरों की छत पर रहकर गुजर बसर कर रहे हैं। छतों पर ही रहना और खाना हो रहा है। इन गांवों में ज्यादातर लोग बुखार, जुकाम, शरीर में दर्द व पानी में रहने के चलते पैरों में दाने व खुजली से परेशान हैं। पानी भरा होने से घरों से निकलकर दवा लेने के लिए मेडिकल स्टोर नहीं जा पा रहे हैं। देवीपुरवा व माना बंगला से सिर्फ पांच परिवार ही घरों से निकल कर सड़क पर तंबू लगाकर रह रहे हैं। पीएचसी प्रभारी डॉ. विकास आनंद ने बताया कि बुधवार को नगवा में दवा वितरित की गई है। जानकीकुंड में भी स्वास्थ्यकर्मी मौजूद है।
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फतेहपुर चौरासी (उन्नाव)। जगतनगर सहजनी मार्ग पर गांव मन्नानगर के पास पानी भर जाने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है। गांव भुलभुलियाखेड़ा के कंपोजिट विद्यालय में पानी भर जाने बच्चों को पास में ऊंचे स्थान पर पढ़ाया जा रहा है। गंगा का पानी बढ़ने से अब आसपास क्षेत्र में फैलने लगा है। मन्नानगर में पुलिया के पास कटरी क्षेत्र के प्रमुख मार्ग पर पानी भर जाने से गांव जाजामाऊ, रुस्तमपुर,उम्मरपुर प्रीतम, हरदासपुर सहित कई गांवों का आवागमन प्रभावित हो गया है। पूर्व प्रधान विनोद व संतोष अग्निहोत्री ने बताया कि इस मार्ग के कटने से बाढ़ का पानी इस्माइलपुर नौगवां, पंडितखेड़ा, बरधाई, सरहा आदि गांवों में पानी फैल जाएगा। बीईओ विनय कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि भुलभुलियाखेड़ा कंपोजिट विद्यालय में पानी भर जाने से पास में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।
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रसूलपुर बकिया-अकबरपुर संपर्क मार्ग से आवागमन बंद
हसनगंज (उन्नाव)। तहसील क्षेत्र के रसूलपुर बकिया गांव के बाहर से निकली सई नदी का जलस्तर बढ़ने की वजह से अकबरपुर संपर्क मार्ग के ऊपर से पानी बहने लगा है। पानी के तेज बहाव के चलते सड़क क्षतिग्रस्त हो गई। इससे आने जाने वाले राहगीर व स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राए जान जोखिम में डालकर निकलते रहे। जानकारी होने पर नायब तहसीलदार प्रीति सिंह राजस्व टीम के साथ पहुंची और सड़क के दोनों तरफ रस्सी व बोरियां लगवाकर सुरक्षा को देखते हुए आवागमन बंद करा दिया। इससे अब ग्रामीणों को मियागंज जाने के लिए दस किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाकर छित्तेपुर मार्ग से होते हुए आवागमन करना पड़ेगा।
घरों के दरवाजों तक भरा पानी
चकलवंशी (उन्नाव)। गंगा के उफनाने से बाढ़ का पानी गांव में जमा होकर रास्ते अवरुद्ध कर रहा है। दरवाजे के सामने भरे पानी से नौनिहालों पर खतरा मंडरा रहा है। सबसे अधिक उम्मेदखेड़ा गांव के अंदर पानी है। गांव के भैयालाल, कल्लू, रामपाल, रामसजीवन मुकेश आदि ने बताया कि गांव के रास्तों में दरवाजे तक पानी भर गया है। इससे नौनिहालों के लिए पानी खतरनाक हो गया है। वहीं मवेशियों को चारे की समस्या विकराल होती जा रही है। खेत में तरोई, बैगन की सब्जी सड़ रही है। ब्लाक सरोसी क्षेत्र के ग्राम पंचायत सथरा और प्यारेपुर के 10 गांव पहले से ही बाढ़ की चपेट में हैं।
बाढ़ में बहे करेला किसानों के अरमान
गंजमुरादाबाद (उन्नाव)। कटरी इलाके की प्रमुख करेले की फसल गंगा नदी में आई भीषण बाढ़ की भेंट चढ़ गई है। करीब 100 बीघा करेले की फसल जलमग्न होकर सड़ गई है। किसान सड़ी बेल में लगी करेले की फसल तोड़ने में जुटे हुए हैं। कटरी इलाके के सिरधरपुर, गहरपुरवा, बगिया, बदलीपुरवा आदि गांवों में करेले की खेती की जाती है। करेला 3000-3500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से आसानी से बिक जाता है। किसान को एक बीघा करेले की खेती करने के लिए करीब 25 हजार रुपये लागत आती है। जबकि एक बीघा भूमि में करीब 70-80 क्विंटल करेला निकल आता है। जिसकी कीमत मंडी में करीब दो लाख हो जाती है। जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिल जाता है। इस बार यहां की करीब 100 बीघा करेले की फसल गंगा नदी में आई भीषण बाढ़ की भेंट चढ़ गई है। जो एक सप्ताह से जलमग्न होकर सड़ गई है। जिससे किसानों को भारी नुकसान पहुंचा है।
सई नदी का जलस्तर बढ़ा, फसलें जलमग्न
औरास (उन्नाव)। कस्बा औरास से होकर गुजरी सई नदी का जलस्तर बढ़ने से कबरोई, भटपुरवा, धानमऊ, लोधाटिकुर बर्रा व नई बस्ती गांव की हजारों बीघे धान की सफल जलमग्न हो गई है। खेतों में जानवरों के लिए खड़े हरे चारे व मक्का सहित अन्य फसलें बर्बाद हो गई हैं। किसान विजय सिंह, काका सिंह, राकेश रावत, शिवकुमार व लल्लन यादव आदि ने बताया कि फसलें बर्बाद हो गई हैं। जानवरों के लिए खेतों में खड़ा हरा चारा खराब हो गया है। पानी अधिक होने से खेत तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

फोटो नंबर 32-उम्मेदखेड़ा गांव में नाव से चारा ले जाता ग्रामीण। संवाद

फोटो नंबर 32-उम्मेदखेड़ा गांव में नाव से चारा ले जाता ग्रामीण। संवाद

फोटो नंबर 32-उम्मेदखेड़ा गांव में नाव से चारा ले जाता ग्रामीण। संवाद

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