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Unnao News: आयुर्वेद अस्पताल में पानी व शौचालय न होने से तैनाती से कतरा रहे डॉक्टर

Mon, 04 Aug 2025 12:30 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव Updated Mon, 04 Aug 2025 12:30 AM IST
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Doctors are shying away from posting due to lack of water and toilets in Ayurveda hospital
फोटो नंबर-2
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- 10 साल बाद अप्रैल में डॉक्टर हुई थी तैनाती, लेकिन वह भी चार माह में चली गईं

संवाद न्यूज एजेंसी
बीघापुर। क्षेत्र के गांव रायपुर में संचालित पंडित चक्रधर मिश्रा आयुर्वेदिक अस्पताल में शौचालय और पानी की व्यवस्था नहीं है। इससे डॉक्टर यहां तैनाती से कतराते हैं।
दस साल बाद अप्रैल 2025 में एक डॉक्टर की तैनाती हुई थी। लेकिन यहां की अव्यवस्थाओं से परेशान होकर उन्होंने खुद को दूसरे अस्पताल में संबद्ध करा लिया। इससे मरीजों को स्वास्थ्य सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल के आसपास अतिक्रमण भी समस्या बना है।
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क्षेत्र के गांव रायपुर में 1980 में पंडित चक्रधर मिश्रा आयुर्वेदिक चिकित्सालय का शुभारंभ हुआ था। गंगा कटरी क्षेत्र के जयराज मऊ ,पसनिया खेड़ा, सीताराम खेड़ा, निहालीखेड़ा ,अलीपुर आदि गांव के लोग अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचते है। बीते 10 वर्षों से स्थायी डॉक्टर की तैनाती न होने के चलते लोगों को आयुर्वेद की सुविधा मिलना बंद हो गई। 10 वर्ष बाद अप्रैल 2025 में डॉक्टर ज्योति सिंह की तैनाती हुई।
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अस्पताल में मरीज की प्रतिदिन औसतन 30 मरीज पहुंचने लगे। लेकिन 23 जुलाई को डॉक्टर को दसगवा बांगरमऊ राजकीय आयुर्वैदिक कॉलेज में संबद्ध कर दिया गया। इससे एक बार फिर आयुर्वेदिक अस्पताल की जिम्मेदारी फार्मासिस्ट पर आ गई है। अस्पताल में एक फार्मासिस्ट शिवाकांत व एक सफाई कर्मी छोटेलाल है।
स्थानीय संजय मिश्र, सुरेंद्र तिवारी, सच्चू मिश्र, दिनेश यादव, राजू चौरसिया, पप्पू मिश्रा, राम कुमार यादव, श्रीराम यादव, सच्चू यादव समेत अन्य लोगों ने बताया कि अस्पताल परिसर में न ही पानी की व्यवस्था है न शौचालय है। कर्मचारियों को बगल में स्थित प्राथमिक विद्यालय में शौच व पानी के लिए निर्भर रहना पड़ता है। वहीं दस साल बाद अप्रैल 2025 में डॉक्टर ज्योति सिंह की तैनाती हुई थी। लेकिन दिक्कतों के चलते उन्होंने दूसरे अस्पताल में संबद्ध करा लिया। फार्मासिस्ट शिवाकांत ने बताया कि डॉक्टर न होने से अपने स्तर से ही लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं ।



क्या कहते हैं जिम्मेदार



-जिले के 48 आयुर्वेदिक अस्पतालों में संसाधन व अन्य जो भी व्यवस्था नहीं है। उनकी सूची तैयार करा रहे हैं। शासन को सूची भेजते हुए बजट की मांग की जाएगी। सभी अस्पतालों में समुचित व्यवस्था के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।-डॉ.नीरज, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी




शौचालय व पानी की व्यवस्था के लिए कई बार स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया। लेकिन हर बार जल्द ही समस्या हल करने की बात कहकर टाल दिया गया, अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई।-सधन पाल, ग्राम प्रधान रायपुर



ग्रामीणों ने बताई परेशानी



फोटो नंबर-3

पूर्व प्रधान राम नरेश शुक्ला ने बताया कि लगातार शासन की उपेक्षा के चलते आयुर्वेदिक अस्पताल का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है।



फोटो नंबर-4



प्रेम किशोर ने बताया कि 10 वर्ष बाद डॉक्टर की तैनाती होने से ओपीडी की संख्या दूनी हो गई थी। लेकिन डॉक्टर के चले जाने से संख्या घट गई है।
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