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डायरिया का कहर, 35 बच्चे अस्पताल में भर्ती
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
Updated Sat, 02 Apr 2016 12:37 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मौसमी फेरबदल से बुजुर्गों व बच्चों का सबसे ज्यादा बुरा हाल है। अकेले जिला अस्पताल में तीन दिन में डायरिया से पीड़ित 34 बच्चों को भर्ती कराया गया है। जिनमें 14 बच्चों की हालत गंभीर है। मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पताल में बेड कम पड़ रहे हैं। इसके चलते एक बेड पर दो-दो बच्चों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। कुछ ऐसे भी बच्चे रहे जो ठीक होने के बाद घर चले गए। दोबारा हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अजगैन के चमरौली निवासी राकेश के 8 माह के बेटे आयुष को मंगलवार शाम अचानक उल्टी-दस्त शुरू हो गए। किसी तरह रात बिताने के बाद गुरुवार सुबह परिजनों ने बच्चे को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। ठीक दो दिन बाद उसकी बेटी वैष्णवी (4) भी डायरिया की चपेट में आ गई। उल्टी-दस्त आने पर उसे भी अस्पताल में भर्ती कराया गया। दोनों की हालत में कुछ सुधार होने की बात डॉक्टरों ने कही है।
इसी क्रम में शहर कोतवाली के शेखपुर शराब मील निवासी रामबाबू के 5 वर्षीय पुत्र राज, सदर कोतवाली कैंपस निवासी अमित के 9 माह के पुत्र सजल, शहर के मोहल्ला कंजी निवासी अहमद का डेढ़ वर्षीय पुत्र अमीर, सफीपुर के मतलबपुर गांव निवासी जितेंद्र सिंह का तीन वर्षीय पुत्र प्रांजुल, शहर कोतवाली के सुल्तानखेड़ा गांव निवासी रामचंद्र का एक वर्षीय पुत्र कृष्णा, मांखी के सथरा गांव निवासी रमेश की 8 वर्षीय पुत्री नैंसी समेत दो अन्य को उल्टी, दस्त शुरू होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। बच्चों की संख्या बढ़ने से अस्पताल में बेड का टोटा है। जिसको देखते हुए एक बेड पर दो बच्चों को लिटाकर इलाज किया जा रहा है।
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इनसेट
बासी भोजन से करें परहेज, साफ पानी पीएं
बाल रोग विशेषज्ञ डा. ब्रज कुमार ने गर्मी की शुरूआत के साथ ही डायरिया पैर पसारने लगता है। ऐसे में बासी खाने से दूर रहे, ताजे भोजन का सेवन करें। कर्म मिर्च मसाले वाला भोजन ही प्रयोग करें। साफ पानी पीएं। हो सके तो पानी को उबालकर पीएं। बाहर की चीजों से परहेज करें। धूप में निकलते समय सिर जरूर ढक लें। धूप से आने के बाद पानी न पिएं। बच्चों को ओआरएस का घोल दें। उन्होंने बताया कि ओपीडी में रोजाना औसतन सौ मरीज देखे जाते है। जिनमें चालीस डायरिया के होते है। गंभीर होने पर उन्हें तत्काल भर्ती किया जाता है।
इनसेट
110 बेड का अस्पताल है। हमें इसी में डायरिया के साथ अन्य रोगियों का इलाज करना है। मरीजों की संख्या बढ़ने से एक बेड पर दो को लिटाकर इलाज किया जा रहा है। यदि और मरीज बढ़े तो छोटी चारपाई वार्ड में डलवाकर इलाज किया जाएगा। अस्पताल में मौजूदा संसाधनों की उपलब्धता के हिसाब से मरीजों को बेहतर इलाज देने का प्रयास रहता है। एसपी चौधरी, सीएमएस जिला अस्पताल।
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अजगैन के चमरौली निवासी राकेश के 8 माह के बेटे आयुष को मंगलवार शाम अचानक उल्टी-दस्त शुरू हो गए। किसी तरह रात बिताने के बाद गुरुवार सुबह परिजनों ने बच्चे को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। ठीक दो दिन बाद उसकी बेटी वैष्णवी (4) भी डायरिया की चपेट में आ गई। उल्टी-दस्त आने पर उसे भी अस्पताल में भर्ती कराया गया। दोनों की हालत में कुछ सुधार होने की बात डॉक्टरों ने कही है।
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इसी क्रम में शहर कोतवाली के शेखपुर शराब मील निवासी रामबाबू के 5 वर्षीय पुत्र राज, सदर कोतवाली कैंपस निवासी अमित के 9 माह के पुत्र सजल, शहर के मोहल्ला कंजी निवासी अहमद का डेढ़ वर्षीय पुत्र अमीर, सफीपुर के मतलबपुर गांव निवासी जितेंद्र सिंह का तीन वर्षीय पुत्र प्रांजुल, शहर कोतवाली के सुल्तानखेड़ा गांव निवासी रामचंद्र का एक वर्षीय पुत्र कृष्णा, मांखी के सथरा गांव निवासी रमेश की 8 वर्षीय पुत्री नैंसी समेत दो अन्य को उल्टी, दस्त शुरू होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। बच्चों की संख्या बढ़ने से अस्पताल में बेड का टोटा है। जिसको देखते हुए एक बेड पर दो बच्चों को लिटाकर इलाज किया जा रहा है।
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बासी भोजन से करें परहेज, साफ पानी पीएं
बाल रोग विशेषज्ञ डा. ब्रज कुमार ने गर्मी की शुरूआत के साथ ही डायरिया पैर पसारने लगता है। ऐसे में बासी खाने से दूर रहे, ताजे भोजन का सेवन करें। कर्म मिर्च मसाले वाला भोजन ही प्रयोग करें। साफ पानी पीएं। हो सके तो पानी को उबालकर पीएं। बाहर की चीजों से परहेज करें। धूप में निकलते समय सिर जरूर ढक लें। धूप से आने के बाद पानी न पिएं। बच्चों को ओआरएस का घोल दें। उन्होंने बताया कि ओपीडी में रोजाना औसतन सौ मरीज देखे जाते है। जिनमें चालीस डायरिया के होते है। गंभीर होने पर उन्हें तत्काल भर्ती किया जाता है।
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110 बेड का अस्पताल है। हमें इसी में डायरिया के साथ अन्य रोगियों का इलाज करना है। मरीजों की संख्या बढ़ने से एक बेड पर दो को लिटाकर इलाज किया जा रहा है। यदि और मरीज बढ़े तो छोटी चारपाई वार्ड में डलवाकर इलाज किया जाएगा। अस्पताल में मौजूदा संसाधनों की उपलब्धता के हिसाब से मरीजों को बेहतर इलाज देने का प्रयास रहता है। एसपी चौधरी, सीएमएस जिला अस्पताल।