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Unnao News: गंगा में डूब गए स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर, बचाने के लिए रुपये मांगने का आरोप

Sun, 01 Sep 2024 03:57 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 01 Sep 2024 03:57 AM IST
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Deputy Director of Health Department drowned in Ganga, accused of demanding money to save him
उन्नाव/बांगरमऊ। स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर कानपुर के नानामऊ घाट पर गंगा में डूब गए। उनके साथ ही स्नान कर रहे दो दोस्तों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हुए। उनका आरोप है कि उन्होंने पास में मौजूद गोताखोरों से मदद मांगी तो वह रुपये की मांग करने लगा। ऑनलाइन रुपये ट्रांसफर करने के बाद उसने तलाश की लेकिन कुछ पता नहीं चला। बिल्हौर थाने की पुलिस, पीएसी और एसडीआरएफ उनकी तलाश में जुटी है। हालांकि देर शाम तक उनका कहीं पता नहीं चला।
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बेहटामुजावर थाना क्षेत्र के ग्राम कबीरपुर खंभौली निवासी रमेशचंद्र सिंचाई विभाग में इंजीनियर थे। रिटायर होने के बाद से वह लखनऊ इंदिरानगर में मकान बनाकर रहते हैं। उनके बेटे आदित्यवर्धन सिंह (44) स्वास्थ्य विभाग में डिप्टी डायरेक्टर हैं। शनिवार सुबह आदित्यवर्धन, बांगरमऊ क्षेत्र के ग्राम पतसिया निवासी दोस्त योगेश्वर मिश्र और लखनऊ के इंदिरानगर निवासी साथी प्रदीप तिवारी के साथ अपनी कार से गंगा स्नान करने कानपुर के बिल्हौर थाना क्षेत्र के नानामऊ गंगाघाट आए थे। प्रदीप ने बताया कि गंगा स्नान करने के बाद उन तीनों को पैतृक गांव कबीरपुर खंभौली जाना था। तीनों लोग सुबह करीब छह बजे नानामऊ घाट पर गंगा स्नान करने लगे, नदी का बहाव काफी तेज होने से अचानक उनका पैर फिसला और वह गहराई में चले गए। दोनों ने लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हो सके। दोस्त प्रदीप के मुताबिक उन्होंने घाट पर मौजूद एक गोताखोर से मदद मांगी लेकिन उसने दस हजार रुपये की मांग की। रुपये उसके खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर करने के बाद नाविक ने तलाश की लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इसी दौरान उन्होंने परिजनों को सूचना दी और कानपुर नगर के कमिश्नर को घटना की जानकारी दी। इसके बाद बिल्हौर थाना पुलिस व अन्य अधिकारी पहुंचे। गोताखोरों की मदद से तलाश शुरू कराई गई। इसके बाद कानपुर कमिश्नर ने एसडीआरएफ और पीएसी की रेस्क्यू टीम को भेजा। टीम मोटर बोट से उनकी तलाश कर रही है। हालांकि देर शाम तक कुछ पता नहीं चला।
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गोताखोर रुपये खाते में आने का इंतजार करता रहा, बह गए आदित्य
गोताखोर के लिए जान से ज्यादा हो गई रुपयों की कीमत
उन्नाव। गंगा में डूबे आदित्यवर्धन सिंह के दोस्त प्रदीप तिवारी ने बताया कि आदित्यवर्धन ने डूबने लगे तो बचाने के लिए आवाज दी। जब प्रयास सफल नहीं हुआ तो उन्होंने घाट पर ही नाव लेकर खड़े गोताखोर से मदद मांगी। उसने भी बिना दस हजार रुपये लिए नाव नहीं बढाई और जब प्रयास किया तब देर हो चुकी थी।
प्रदीप ने बताया कि दोस्त को बचाने के लिए उन्होंने गोताखोर शैलेश कश्यप से गुहार लगाई। लेकिन वह दस हजार रुपये की मांग करता रहा। उन्होंने इतने रुपये जेब में न होने की बात बताई तो उसने ऑनलाइन बैंक खाते में ट्रांसफर करने को कहा। प्रदीप के अनुसार उन्होंने जब दस हजार रुपये गोताखोर शैलेश कश्यप को दे दिए और उसने अपने मोबाइल फोन पर इसका मैसेज देख लिया तब नाव निकाली और तलाश शुरू की, लेकिन तबतक बहुत देर हो चुकी थी। प्रदीप के अनुसार उन्होंने मल्लाह से कहा कि दोस्त को तलाश करके बाहर निकल लो जो भी रुपये बताएगा उससे ज्यादा दिए जाएंगे, लेकिन वह नहीं पसीजा। रुपये मिलने पर उसने इधर उधर नाव घुमाई और कुछ ही देर में लौट आया और कहीं न मिलने की बात बताई। इसके बाद वह घाट पर नाव खड़ी करके भाग गया।
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पत्नी महाराष्ट्र में जज, बेटी आष्ट्रेलिया में, माता-पिता भी वहीं
गंगा में डूबे डिप्टी डायरेक्टर आदित्य वर्धन की पत्नी श्रेया महाराष्ट्र के अकोला जिले में न्यायाधीश के पद पर तैनात हैं। घटना की सूचना पर वह भी कानपुर के लिए निकलीं हैं।
गांव में रहने वाले चाचा शिवकुमार ने बताया कि सूचना पर वह भी नानामऊ घाट पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि भतीजे आदित्यवर्धन की पत्नी श्रेया, महाराष्ट्र से गांव आने के लिए निकलीं हैं। आदित्यवर्धन की बेटी प्रज्ञा आस्ट्रेलिया में इंजीनियर हैं। आदित्य के पिता रमेश चंद्र और मां शिशप्रभा इस समय बेटी के पास आष्ट्रेलिया में ही हैं। बेटी और माता-पिता को भी सूचना दे दी गई है।
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बिहार मुख्यमंत्री के सचिव हैं चचेरे भाई
आदित्यवर्धन के चाचा शिवकुमार ने बताया कि ने बताया कि उनका बेटा (आदित्यवर्धन के चचेरे भाई) अनुपम सिंह बिहार कैडर के आईएएस अफसर हैं। बताया कि अनुपम सिंह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सचिव हैं। वह देर शाम गांव पहुंचे हैं। घटना की सूचना पर क्षेत्रीय विधायक श्रीकांत कटियार भी घाट पहुंचे इसके बाद गांव पहुंचकर परिवार के लोगों से मिले।
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