साखौ पुल पर मिला युवक का शव
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असोहा। पुरवा कोतवाली क्षेत्र के भादिन गांव निवासी युवक का शव साखौ पुल के निकट पड़ा मिला। युवक गाजीपुर के मोहम्मदाबाद में पेठा फैक्ट्री में काम करता था। दो दिन पहले वह फैक्ट्री से बिना बताए निकला था। फोन फैक्ट्री में ही छोड़ आने से पिता ने जब फोन मिलाया तो परिजनों को वहां से चले आने की जानकारी मिली। उसके बाद पिता ने खोजबीन शुरू की। मंगलवार सुबह उसका शव पड़ा मिला। ग्रामसभा कोडरा के मजरे भादिन निवासी सुरेश (20) पुत्र नरेश गाजीपुर के मोहम्मदाबाद में पेठा बनाने वाली फैक्ट्री में काम करता था। फैक्ट्री में कोतवाली क्षेत्र के ही गांव ईश्वरीखेड़ा निवासी बिंदई पुत्र भीखा ठेकेदार है। उन्होंने ही सुरेश को वहां लगवाया था। बीस दिन पहले सुरेश घर आया था और छह दिन रुकने के बाद वापस चला गया था। दो दिन पहले वह फैक्ट्री में बिना किसी को बताए वहां से निकला। फोन भी वहीं छोड़ आया। पिता नरेश ने जब उसके मोबाइल पर फोन मिलाया तो साथ काम करने वाले लोगों ने बताया कि वह दो दिन पहले वहां से निकला और फोन वहीं भूल आया। घर न आने पर परिजनों ने रिश्तेदारी में पता लगाया लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। बाद में पिता उसे ढूंढने निकला। मंगलवार सुबह सुरेश का शव साखो पुल के निकट पड़ा मिला। शव पड़े होने की जानकारी पर मृतक की मां बिंदेश्वरी मौके पर पहुंची और सुरेश के रूप में पहचान की। बाद में पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। जामा तलाशी में सुरेश की जेब से गाजीपुर से लखनऊ का टिकट, सौ रुपये व तीन गुल मंजन के पैकेट मिले हैं।
15 दिन पहले गांव आया था युवक
सुरेश की मां बिंदेश्वरी ने बताया कि उसकी शादी की चर्चा चल रही थी। पंद्रह दिन पहले वह लड़की को देखने आया था लेकिन बाद में उसने कोई जवाब नहीं दिया और वापस मोहम्मदाबाद चला गया। 15 जनवरी को साथ काम कर रहे ईश्वरीयखेड़ा निवासी बिंदई का फोन आया कि वह फैक्ट्री से चला गया है। तबसे उसकी खोजबीन की जा रही थी। पिता मंगलवार को बेटे की खोज में बनारस पहुंचा था। बेटे के मौत की खबर मिलते ही उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।
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परिवार का सहारा था सुरेश
सुरेश पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। वह पिता नरेश के साथ परिवार के संचालन में हाथ बंटाता था। छोटा भाई चंद्रिका (पांच) व तीन बहनों में रोशनी, रेशमी व आसनी हैं। पिता खेती कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सुरेश की मौत ने परिवार में कोहराम सा मचा दिया।