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हादसे में तीन किसानों की मौत
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
Updated Tue, 02 Aug 2016 12:52 AM IST
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मृतक के परिजन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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आसीवन थाना क्षेत्र में रविवार रात डेयरी का लोडर तीन किसानों के लिए काल बन गया। हादसे ने तीन परिवारों की खुशियां एक साथ छीन ली। मृतकों में सभी पर अपने परिवार की जिम्मेदारी थी। सभी खेतीबाड़ी से परिवार का पेट पाल रहे थे। अब परिवारों पर रोजी-रोटी का संकट आ गया है। घटना के बाद कोई जनप्रतिनिध न ही पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा और न ही देर शाम तक मृतकों के घर। पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचते ही कोहराम मच गया।
आसीवन के नई बस्ती गांव निवासी राहुल यादव पांच भाइयों में सबसे बड़ा था। भाइयों की देखरेख व उनकी पढ़ाई के साथ वह अपने माता-पिता का भी बखूबी ध्यान रखता था। उसके पास महज तेरह बिसुवा खेती थी। इतना ही नहीं परिवार में सबकी जरूरत पूरी हो, राहुल ने गांव के जगदीश मास्टर का खेत भी बटाई पर लिया था। धान की बेड़ लगाने के लिए वह रविवार रात नहर से खेत में पानी भरने पहुंचा था। जहां देर रात वह सड़क हादसे का शिकार हो गया। हादसे मेें दूसरे मृतक मटरू के भी हालात कुछ इसी तरह के थे। डेढ़ बीघा खेती में वह पत्नी महराना व तीन बेटियों का भरण पोषण अच्छी तरह नहीं कर पा रहा था। जिस पर उसने भी गांव के जगदीश का खेत बटाई पर लिया था। सोमवार रात हुई घटना में वह भी राहुल के साथ नहर से खेत में पानी भरने पहुंचा था। नईमउल्लाखेड़ा गांव निवासी मूलचंद्र के पास 10 बिस्वा खेती थी। उसने गांव के जगदीश के इसी खेत का कुछ हिस्सा बटाई पर ले रखा था।
राहुल की शादी की चल रही थी बात
राहुल का पिता तोताराम व मां गुड्डी बेटे की शादी के लिए बेताब थे। कई रिश्ते भी घर आ चुके थे। राहुल ने मकान बनवाने के साथ कुछ धन जोड़ लेने की सोच शादी से मना कर रखा था। माता-पिता की जिद पर वह मुश्किल से शादी के लिए तैयार हुआ था। एक सप्ताह पहले घर आए रिश्ते के लिए उसने हामी भी भर दी थी। बातचीत का दौर आगे बढ़ता इससे पहले ही राहुल दुनिया छोड़कर चला गया। जवान बेटी की मौत से परिवार पर दु:खों का साया मंडरा उठा।
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छाती पीट-पीटकर रोई पत्नी
मूलचंद्र की सड़क हादसे में मौत की खबर घर पहुंचते ही रोने-चिल्लाने की आवाजे गूंज उठी। देर शाम शव जैसे ही घर पहुंचा। पत्नी नीलम शव देख छाती पीट-पीटकर रो पड़ी। नीलम को बिलखता देख उसके बच्चे सरोज, सौरभ, सरोजनी भी सिसक उठी। तीन साल का सबसे छोटा बेटा सनी इस दु:ख से अंजान था। उसे इस बात का भी आभास नहीं था कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा-हमेशा के लिए उठ गया। यही हाल मटरू के परिवार का भी रहा। उसकी पत्नी महराना अपने बच्चों को कलेजे से लगा तड़पती रही।
इंसेट
नहीं जले घरों के चूल्हे
सोमवार देर रात हुई घटना के दूसरे दिन तक मृतकों के घरों के चूल्हे ठंडे पड़े रहे। बदहवाश परिजन शवों की आने का इंतजार करते रहे। पड़ोसियों का ढांढस भी उनके दु:ख को कम नहीं कर पा रहा था। हादसे की वजह बने लोडर चालक को सभी कोसते रहे।
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आसीवन के नई बस्ती गांव निवासी राहुल यादव पांच भाइयों में सबसे बड़ा था। भाइयों की देखरेख व उनकी पढ़ाई के साथ वह अपने माता-पिता का भी बखूबी ध्यान रखता था। उसके पास महज तेरह बिसुवा खेती थी। इतना ही नहीं परिवार में सबकी जरूरत पूरी हो, राहुल ने गांव के जगदीश मास्टर का खेत भी बटाई पर लिया था। धान की बेड़ लगाने के लिए वह रविवार रात नहर से खेत में पानी भरने पहुंचा था। जहां देर रात वह सड़क हादसे का शिकार हो गया। हादसे मेें दूसरे मृतक मटरू के भी हालात कुछ इसी तरह के थे। डेढ़ बीघा खेती में वह पत्नी महराना व तीन बेटियों का भरण पोषण अच्छी तरह नहीं कर पा रहा था। जिस पर उसने भी गांव के जगदीश का खेत बटाई पर लिया था। सोमवार रात हुई घटना में वह भी राहुल के साथ नहर से खेत में पानी भरने पहुंचा था। नईमउल्लाखेड़ा गांव निवासी मूलचंद्र के पास 10 बिस्वा खेती थी। उसने गांव के जगदीश के इसी खेत का कुछ हिस्सा बटाई पर ले रखा था।
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राहुल की शादी की चल रही थी बात
राहुल का पिता तोताराम व मां गुड्डी बेटे की शादी के लिए बेताब थे। कई रिश्ते भी घर आ चुके थे। राहुल ने मकान बनवाने के साथ कुछ धन जोड़ लेने की सोच शादी से मना कर रखा था। माता-पिता की जिद पर वह मुश्किल से शादी के लिए तैयार हुआ था। एक सप्ताह पहले घर आए रिश्ते के लिए उसने हामी भी भर दी थी। बातचीत का दौर आगे बढ़ता इससे पहले ही राहुल दुनिया छोड़कर चला गया। जवान बेटी की मौत से परिवार पर दु:खों का साया मंडरा उठा।
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छाती पीट-पीटकर रोई पत्नी
मूलचंद्र की सड़क हादसे में मौत की खबर घर पहुंचते ही रोने-चिल्लाने की आवाजे गूंज उठी। देर शाम शव जैसे ही घर पहुंचा। पत्नी नीलम शव देख छाती पीट-पीटकर रो पड़ी। नीलम को बिलखता देख उसके बच्चे सरोज, सौरभ, सरोजनी भी सिसक उठी। तीन साल का सबसे छोटा बेटा सनी इस दु:ख से अंजान था। उसे इस बात का भी आभास नहीं था कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा-हमेशा के लिए उठ गया। यही हाल मटरू के परिवार का भी रहा। उसकी पत्नी महराना अपने बच्चों को कलेजे से लगा तड़पती रही।
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नहीं जले घरों के चूल्हे
सोमवार देर रात हुई घटना के दूसरे दिन तक मृतकों के घरों के चूल्हे ठंडे पड़े रहे। बदहवाश परिजन शवों की आने का इंतजार करते रहे। पड़ोसियों का ढांढस भी उनके दु:ख को कम नहीं कर पा रहा था। हादसे की वजह बने लोडर चालक को सभी कोसते रहे।