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गंगा में डूबने से युवती की मौत, भतीजी को बचाया
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बक्सर गंगा नदी में डूब रही नैंसी को बाहर निकालता नाविक। संवाद
- फोटो : UNNAO
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बीघापुर/बारासगवर। बक्सर स्थित चंद्रिका देवी मंदिर में बच्चे के मुंडन संस्कार के दौरान सीढ़ियों पर बैठकर स्नान करते समय पैर फिसलने से युवती और भतीजी गंगा में गिर गईं। दोनों को डूबता देख नाविक गंगा में कूद गए। किशोरी को तो बचा लिया पर उसकी मौसी का पता नहीं चला। शुक्लागंज के गोताखोरों ने तीन घंटे की मशक्कत के बाद घटनास्थल से 150 मीटर दूर युवती का शव बरामद कर लिया। शव देख मांगलिक कार्यक्रम की खुशियां मातम में बदल गईं।
असोहा के दऊ गांव निवासी ओमप्रकाश चौरसिया अपने तीन वर्षीय बेटे अक्षत का मुंडन कराने के लिए शुक्रवार सुबह लोडर से परिवार व रिश्तेदारों के साथ बक्सर स्थित चंद्रिका देवी मंदिर पहुंचे। दोपहर एक बजे ओमप्रकाश की 15 वर्षीय बेटी नैंसी व लखनऊ मोहनलालगंज क्षेत्र के सुसैंडी रायपुर निवासी हाईकोर्ट में अधिवक्त सुरेश कुमार की 18 वर्षीय पुत्री अनुरागिनी (ओमप्रकाश की साली) मंदिर की सीढ़ियों में बैठकर स्नान करने लगीं। अचानक पैर फिसलने से दोनों गंगा में गिर गईं और गहराई में जाकर डूबने लगी। दोनों को बचाने के लिए परिवार का एक सदस्य भी नदी में कूद गया। उसे डूबता देख पास खड़े नाविक ने उसे बाहर खींच लिया। दूसरे नाविक ने समय रहते नैंसी को जीवित बाहर निकाल लिया। अनुरागिनी का पता न चलने से कोहराम मच गया।
सीओ सिटी कृपाशंकर बारासगवर थाना व बक्सर चौकी पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे और अनुरागिनी की तलाश शुरू कराई। शव न मिलने पर शुक्लागंज से गोताखोर बुलाए गए। गोताखोरों ने तीन घंटे की मशक्कत के बाद घटनास्थल से 150 मीटर दूर अनुरागिनी का शव खोज निकाला। शव देख परिजन बदहवास हो गए। मुंडन संस्कार की खुशियां मातम में बदल गईं। मृतका तीन भाई व बहनों में दूसरे नंबर की थी। मां अनीता सहित अन्य परिजन बेहाल है।
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सीढ़ियों से गिरी युवती व भतीजी को डूबता देख एक नाविक नाव लेकर 15 वर्षीय किशोरी नैंसी के पास पहुंचा और उसे बचाने के लिए नदी में छलांग लगा दी। गहराई अधिक होने के बाद उसने हिम्मत दिखाते हुए किशोरी को बाहर निकाल लिया। उसकी हिम्मत की वहां मौजूद लोगों ने खूब सराहना की।
नदी में मौसी और भतीजी को डूबता देख परिवार के कुछ लोग पास खड़ी नाव में चढ़ गए। भार अधिक होने से नाव पलट गई। गनीमत रही कि नाव गंगा के किनारे सीढ़ियों के पास थी। इससे उनकी जान बच गई। इस दौरान बक्सर घाट पर सैकड़ों की भीड़ डूब रही मौसी और भतीजी को बचाने के लिए शोर मचाती रहीं।
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असोहा के दऊ गांव निवासी ओमप्रकाश चौरसिया अपने तीन वर्षीय बेटे अक्षत का मुंडन कराने के लिए शुक्रवार सुबह लोडर से परिवार व रिश्तेदारों के साथ बक्सर स्थित चंद्रिका देवी मंदिर पहुंचे। दोपहर एक बजे ओमप्रकाश की 15 वर्षीय बेटी नैंसी व लखनऊ मोहनलालगंज क्षेत्र के सुसैंडी रायपुर निवासी हाईकोर्ट में अधिवक्त सुरेश कुमार की 18 वर्षीय पुत्री अनुरागिनी (ओमप्रकाश की साली) मंदिर की सीढ़ियों में बैठकर स्नान करने लगीं। अचानक पैर फिसलने से दोनों गंगा में गिर गईं और गहराई में जाकर डूबने लगी। दोनों को बचाने के लिए परिवार का एक सदस्य भी नदी में कूद गया। उसे डूबता देख पास खड़े नाविक ने उसे बाहर खींच लिया। दूसरे नाविक ने समय रहते नैंसी को जीवित बाहर निकाल लिया। अनुरागिनी का पता न चलने से कोहराम मच गया।
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सीओ सिटी कृपाशंकर बारासगवर थाना व बक्सर चौकी पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे और अनुरागिनी की तलाश शुरू कराई। शव न मिलने पर शुक्लागंज से गोताखोर बुलाए गए। गोताखोरों ने तीन घंटे की मशक्कत के बाद घटनास्थल से 150 मीटर दूर अनुरागिनी का शव खोज निकाला। शव देख परिजन बदहवास हो गए। मुंडन संस्कार की खुशियां मातम में बदल गईं। मृतका तीन भाई व बहनों में दूसरे नंबर की थी। मां अनीता सहित अन्य परिजन बेहाल है।
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सीढ़ियों से गिरी युवती व भतीजी को डूबता देख एक नाविक नाव लेकर 15 वर्षीय किशोरी नैंसी के पास पहुंचा और उसे बचाने के लिए नदी में छलांग लगा दी। गहराई अधिक होने के बाद उसने हिम्मत दिखाते हुए किशोरी को बाहर निकाल लिया। उसकी हिम्मत की वहां मौजूद लोगों ने खूब सराहना की।
नदी में मौसी और भतीजी को डूबता देख परिवार के कुछ लोग पास खड़ी नाव में चढ़ गए। भार अधिक होने से नाव पलट गई। गनीमत रही कि नाव गंगा के किनारे सीढ़ियों के पास थी। इससे उनकी जान बच गई। इस दौरान बक्सर घाट पर सैकड़ों की भीड़ डूब रही मौसी और भतीजी को बचाने के लिए शोर मचाती रहीं।