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उन्नाव: बीमारी से परेशान युवक ने ब्लेड से रेत ली गर्दन, दर्दनाक मौत
Wed, 14 Jul 2021 06:45 PM IST
कानपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 14 Jul 2021 06:45 PM IST
सार
पत्थर की धूल शरीर के अंदर जाने से वह सिल्कोसिस बीमारी से ग्रसित हो गया था। बीमारी घातक हुई तो रामप्रताप चार वर्ष पहले हरियाणा से घर लौट आया। परिजनों ने उसका इलाज कराया। हालत सुधरने की जगह बिगड़ती चली गई।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
उन्नाव जिले के गंजमुरादाबाद में सिल्कोसिस बीमारी से परेशान युवक ने ब्लेड से गर्दन रेतकर आत्महत्या कर दी। उसकी मौत से परिजनों का रोकर बुरा हाल रहा। ग्राम सिरधरपुर के मजरा बदलीपुरवा निवासी रामप्रताप निषाद (23) हरियाणा में रहकर स्टोन फैक्टरी में काम करता था।
पत्थर की धूल शरीर के अंदर जाने से वह सिल्कोसिस बीमारी से ग्रसित हो गया था। बीमारी घातक हुई तो रामप्रताप चार वर्ष पहले हरियाणा से घर लौट आया। परिजनों ने उसका इलाज कराया। हालत सुधरने की जगह बिगड़ती चली गई। शरीर बेहद कमजोर होने जाने से वह चलने-फिरने से असमर्थ हो गया।
बुधवार सुबह नौ बजे उसने अपनी मां मूला से सेविंग के लिए ब्लेड मंगाई। ब्लेड देकर मां घरेलू काम करने लगी। इसी दौरान उसने ब्लेड से खुद की गर्दन रेत ली। उसकी चीख सुन मां भागकर पहुंची तो उसे लहूलुहान हालत में तड़पता देख कांप गई।
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पत्थर की धूल शरीर के अंदर जाने से वह सिल्कोसिस बीमारी से ग्रसित हो गया था। बीमारी घातक हुई तो रामप्रताप चार वर्ष पहले हरियाणा से घर लौट आया। परिजनों ने उसका इलाज कराया। हालत सुधरने की जगह बिगड़ती चली गई। शरीर बेहद कमजोर होने जाने से वह चलने-फिरने से असमर्थ हो गया।
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बुधवार सुबह नौ बजे उसने अपनी मां मूला से सेविंग के लिए ब्लेड मंगाई। ब्लेड देकर मां घरेलू काम करने लगी। इसी दौरान उसने ब्लेड से खुद की गर्दन रेत ली। उसकी चीख सुन मां भागकर पहुंची तो उसे लहूलुहान हालत में तड़पता देख कांप गई।
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इलाज के लिए ले जाने से पहले उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। नन्हू की मौत से मां मूला, पिता मन्नीलाल, बड़ा भाई रामराज, रंजीत, व नीरज का रो-रोकर बुरा हाल रहा। मां मूला के अनुसार उसके बड़े बेटे गोविंद की इसी बीमारी से पांच वर्ष पहले मौत हो गई थी।
वह भी हरियाणा में स्टोन फैक्टरी में काम करने के दौरान बीमार हुआ था। सिल्कोसिस एक घातक बीमारी है। यह बीमारी पत्थर की धूल से होती है। हरियाणा में स्टोन फैक्टरी में बदलीपुरवा गांव के 12 से अधिक मजदूर काम करते थे।
पांच वर्षों में इसी बीमारी से ग्रसित होकर 10 मजदूर दम तोड़ चुके हैं। मृतकों में संतोष उसका छोटा भाई ज्ञानी, रामसिंह, उसका छोटा भाई नन्हे, श्याम सिंह, अखिलेश कुमार, सुनील कुमार, रामनारायण व और नारेंद्र समेत अन्य एक मजदूर शामिल है।
वह भी हरियाणा में स्टोन फैक्टरी में काम करने के दौरान बीमार हुआ था। सिल्कोसिस एक घातक बीमारी है। यह बीमारी पत्थर की धूल से होती है। हरियाणा में स्टोन फैक्टरी में बदलीपुरवा गांव के 12 से अधिक मजदूर काम करते थे।
पांच वर्षों में इसी बीमारी से ग्रसित होकर 10 मजदूर दम तोड़ चुके हैं। मृतकों में संतोष उसका छोटा भाई ज्ञानी, रामसिंह, उसका छोटा भाई नन्हे, श्याम सिंह, अखिलेश कुमार, सुनील कुमार, रामनारायण व और नारेंद्र समेत अन्य एक मजदूर शामिल है।