{"_id":"5fc91e7a8ebc3eefb87e0817","slug":"crime-unnao-news-knp597816629","type":"story","status":"publish","title_hn":"जंगल बुजुर्ग में 6.28 लाख का घोटाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जंगल बुजुर्ग में 6.28 लाख का घोटाला
विज्ञापन
उन्नाव। सुमेरपुर की ग्राम पंचायत जंगल बुजुर्ग में बिना काम कराए ही प्रधान व सचिव ने 6.28 लाख रुपये निकाल लिए। ग्रामीणों की शिकायत पर हुई जांच में पुष्टि होने पर प्रधान के प्रशासनिक व वित्तीय अधिकार सीज कर दिए गए हैं। सचिव को निलंबित कर दिया गया है। जेई पर भी कार्रवाई के लिए लिखा गया है।
जंगल बुजुर्ग के विश्वजीत व देवेश प्रताप सिंह ने डीएम को दिए शिकायतीपत्र में विकास कार्यों के नाम पर धनराशि निकालने और हकीकत में एक भी कार्य न कराए जाने की जानकारी दी थी। डीएम ने मामले की जांच उपायुक्त मनरेगा व सहायक अभियंता डीआरडीए को सौंपी थी। दोनों अधिकारियों ने गांव में जाकर जांच की थी। इस दौरान वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 व 2019-20 में राज्य व 14वें वित्त आयोग से विभिन्न कार्यों पर खर्च की गई धनराशि का सत्यापन किया। इसमें पांच काम कागजों पर ही कराए जाने की पुष्टि हुई। इन पांचों कामों में छह लाख 28 हजार 305 रुपये का घोटाला किए जाने की जानकारी हुई। इसमें प्रधान, सचिव व अवर अभियंता लघु सिंचाई को दोषी माना गया। 47 शौचालय व दो प्रधानमंत्री आवास अपूर्ण मिले। आवास के लिए चयनित 39 लाभार्थियों में 31 अपात्र मिले।
जांच रिपोर्ट मिलने पर डीएम ने प्रधान, सचिव और जेई को दोषी मानते हुए नोटिस जारी करके स्पष्टीकरण तलब करने के आदेश दिए थे। तीनों का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया। प्रधान शिवेंद्र सिंह के प्रशासनिक व वित्तीय अधिकार सीज कर दिए गए। सचिव अनूप सिंह को निलंबित कर दिया गया। जेई पर भी कार्रवाई के लिए विभागीय अधिकारी को पत्र भेजा गया है। मामले की अंतिम जांच परियोजना निदेशक डीआरडीए को सौंपी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जंगल बुजुर्ग के विश्वजीत व देवेश प्रताप सिंह ने डीएम को दिए शिकायतीपत्र में विकास कार्यों के नाम पर धनराशि निकालने और हकीकत में एक भी कार्य न कराए जाने की जानकारी दी थी। डीएम ने मामले की जांच उपायुक्त मनरेगा व सहायक अभियंता डीआरडीए को सौंपी थी। दोनों अधिकारियों ने गांव में जाकर जांच की थी। इस दौरान वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 व 2019-20 में राज्य व 14वें वित्त आयोग से विभिन्न कार्यों पर खर्च की गई धनराशि का सत्यापन किया। इसमें पांच काम कागजों पर ही कराए जाने की पुष्टि हुई। इन पांचों कामों में छह लाख 28 हजार 305 रुपये का घोटाला किए जाने की जानकारी हुई। इसमें प्रधान, सचिव व अवर अभियंता लघु सिंचाई को दोषी माना गया। 47 शौचालय व दो प्रधानमंत्री आवास अपूर्ण मिले। आवास के लिए चयनित 39 लाभार्थियों में 31 अपात्र मिले।
विज्ञापन
जांच रिपोर्ट मिलने पर डीएम ने प्रधान, सचिव और जेई को दोषी मानते हुए नोटिस जारी करके स्पष्टीकरण तलब करने के आदेश दिए थे। तीनों का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया। प्रधान शिवेंद्र सिंह के प्रशासनिक व वित्तीय अधिकार सीज कर दिए गए। सचिव अनूप सिंह को निलंबित कर दिया गया। जेई पर भी कार्रवाई के लिए विभागीय अधिकारी को पत्र भेजा गया है। मामले की अंतिम जांच परियोजना निदेशक डीआरडीए को सौंपी गई है।
विज्ञापन