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कुटीर उद्योग की तरह चल रहा कच्ची शराब का कारोबार

Mon, 18 Jul 2016 11:46 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव Updated Mon, 18 Jul 2016 11:46 PM IST
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Cottage industry operates like raw liquor business
बन रही दारू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
जिले में  कच्ची शराब का कारोबार कुटीर उद्योग की तरह चल रहा है। इस पर नकेल कसने के लिए समय-समय पर चलाने वाले अभियान बेमतलब साबित हो रहे हैं। गंगा कटरी और सई नदी के तराई वाले इलाकों में यह अवैध कारोबार खूब फल-फूल रहा है। 
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इस धंधे से जुड़े लोगों ने आसपास के कई जिलों तक अपना जाल फैला रखा है। हालांकि एटा और फर्रुखाबाद में शराब से कई लोगों की मौत के बाद जिलाधिकारी ने अलर्ट जारी कर दिया है। टीम छापेमारी में जुटी है, लेकिन यह कारोबार खत्म हो पाएगा, इस पर संशय है। एटा के अलीगंज की तरह ही कुछ समय पहले उन्नाव में भी जहरीली शराब ने कहर बरपाया था।
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12 जनवरी 2015 को कच्ची शराब से 45 लोगों की मौत हुई थी तो वर्ष 2006 में 12 लोगों ने दम तोड़ दिया था। इसके बाद कच्ची शराब का कारोबार नेस्तनाबूत करने को लगातार अभियान चले, लेकिन ये सारे अभियान चंद दिनों के बाद हवाई साबित हुए। हैरानी की बात यह है आबकारी विभाग के राजस्व में हर महीने लाखों का चूना और बढ़ते अपराधों के चलते पुलिस के लिए सिरदर्द बने इस कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जाने के दावों के बाद भी यह धंधा कभी मंदा नहीं हुआ।
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आबकारी विभाग के सूत्रों बताते हैं कि जिले में प्रतिदिन 10 से 15 हजार लीटर कच्ची शराब बनाई और बेची जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों लोगों ने इसे आजीविका का सराहा बना लिया है। आलम यह है कि बीघापुर, भगवंतनगर, सफीपुर, बांगरमऊ, गंगाघाट, मौरावां समेत कई क्षेत्र कच्ची शराब के कारोबार के लिए बदनाम हैं। कई क्षेत्रों में साप्ताहिक बाजारों में कच्ची शराब की दुकानें सजतीं हैं।जिला अबकारी अधिकारी एसके दुबे ने बताया कि डीएम के निर्देश पर मंगलवार से पूरे जिले में छापामार अभियान चलाया जाएगा।
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