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मुआवजे के लिए भटक रहे किसान
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Sun, 05 Apr 2015 11:37 PM IST
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उन्नाव। किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने और लोन लेने के बाद स्वत: फसल बीमा होने का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। पहले तो संबंधित बैंकों ने फसल बीमा के नाम पर प्रीमियम की धनराशि काट कर संबंधित बीमा एजेंसी को भेज दी उसके बाद जब किसान मुआवजे की जानकारी के लिए बैंक पहुंचे तो उन्हें बिना सही जानकारी दिए कर्मचारी वापस लौटा रहे हैं।
इससे प्रकृति की मार से बेहाल किसानों को शासन, प्रशासन से कोई मदद नहीं मिल पा रही है। अमर उजाला में रविवार को फसल बीमा से संबंधित खबर छपने के बाद कई किसानों ने फोन पर अपना दुखड़ा सुनाया। पेश है कुछ किसानों का जुबानी दर्द......
- असोहा ब्लाक के कांथा निवासी संतोष कुमार तिवारी ने बताया कि लगभग 15 बीघा में गेहूं की फसल बोई थी। ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त की कांथा शाखा से उन्होंने केसीसी बनवाया है। बैंक ने 18 सौ रुपये प्रीमियम की राशि काट ली। इसके बाद भी अभी तक फसल क्षतिपूर्ति का मुआवजा नहीं मिल पाया है।
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- सुमेरपुर के धनकोली निवासी रोहित सिंह ने बताया कि उनकी 20 बीघा गेहूं की फसल बारिश व ओलावृष्टि से नष्ट हो गई है। केसीसी धारक होने के बावजूद उन्हें अभी तक न तो मुआवजा मिला है न ही कोई सर्वे करने आया है। बैंक मैनेजर ने कहा कि बीमा की राशि कंपनी को भेज दी है। हमसे कोई मतलब नहीं है। एसडीएम बीघापुर भी बीमा कंपनी के विषय में जानकारी नहीं दे सके। अब खेतों में खड़ी बची फसल काटे या रोकें इसको लेकर ऊहापोह है।
- महेंद्र प्रताप महोलिया गंजमुरादाबाद ने बताया कि उनकी आठ बीघा गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है। बैंक गए तो सही जानकारी नहीं दी गई। पहले भी धान की फसल सूखे की मार से बर्बाद हो चुकी है। पूर्व की नष्ट हुई फसल का भी अभी तक मुआवजा नहीं मिल पाया है।
- असोहा ब्लाक निवासी सिद्धगोपाल तिवारी ने बताया कि आठ बीघा गेहूं की फसल बोई थी। वह केसीसीधारक हैं। प्रति फसल बीमा का प्रीमियम देते हैं। इस बार जो नुकसान हुआ उसके मुआवजे के लिए आर्यावर्त की कांथा शाखा गए परंतु वहां कोई सटीक जानकारी नहीं हो सका। तबसे वह खासे परेशान हैं। कुछ इसी तरह की समस्याएं रूरी पृथ्वीखेड़ा के सुधीर सिंह, सिकंदरपुर कर्ण के बंथर के अवध किशोर तिवारी, असोहा के रघुनाथ, बांगरमऊ के मोहलिया हरईपुर के महेंद्र प्रताप आदि किसानों ने भी बताईं। कहा कि शासन, प्रशासन से लेकर बैंक व बीमा कंपनी कोई भी उनके आंसू पोंछने की कोशिश नहीं कर रहा है।
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इससे प्रकृति की मार से बेहाल किसानों को शासन, प्रशासन से कोई मदद नहीं मिल पा रही है। अमर उजाला में रविवार को फसल बीमा से संबंधित खबर छपने के बाद कई किसानों ने फोन पर अपना दुखड़ा सुनाया। पेश है कुछ किसानों का जुबानी दर्द......
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- असोहा ब्लाक के कांथा निवासी संतोष कुमार तिवारी ने बताया कि लगभग 15 बीघा में गेहूं की फसल बोई थी। ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त की कांथा शाखा से उन्होंने केसीसी बनवाया है। बैंक ने 18 सौ रुपये प्रीमियम की राशि काट ली। इसके बाद भी अभी तक फसल क्षतिपूर्ति का मुआवजा नहीं मिल पाया है।
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- सुमेरपुर के धनकोली निवासी रोहित सिंह ने बताया कि उनकी 20 बीघा गेहूं की फसल बारिश व ओलावृष्टि से नष्ट हो गई है। केसीसी धारक होने के बावजूद उन्हें अभी तक न तो मुआवजा मिला है न ही कोई सर्वे करने आया है। बैंक मैनेजर ने कहा कि बीमा की राशि कंपनी को भेज दी है। हमसे कोई मतलब नहीं है। एसडीएम बीघापुर भी बीमा कंपनी के विषय में जानकारी नहीं दे सके। अब खेतों में खड़ी बची फसल काटे या रोकें इसको लेकर ऊहापोह है।
- महेंद्र प्रताप महोलिया गंजमुरादाबाद ने बताया कि उनकी आठ बीघा गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है। बैंक गए तो सही जानकारी नहीं दी गई। पहले भी धान की फसल सूखे की मार से बर्बाद हो चुकी है। पूर्व की नष्ट हुई फसल का भी अभी तक मुआवजा नहीं मिल पाया है।
- असोहा ब्लाक निवासी सिद्धगोपाल तिवारी ने बताया कि आठ बीघा गेहूं की फसल बोई थी। वह केसीसीधारक हैं। प्रति फसल बीमा का प्रीमियम देते हैं। इस बार जो नुकसान हुआ उसके मुआवजे के लिए आर्यावर्त की कांथा शाखा गए परंतु वहां कोई सटीक जानकारी नहीं हो सका। तबसे वह खासे परेशान हैं। कुछ इसी तरह की समस्याएं रूरी पृथ्वीखेड़ा के सुधीर सिंह, सिकंदरपुर कर्ण के बंथर के अवध किशोर तिवारी, असोहा के रघुनाथ, बांगरमऊ के मोहलिया हरईपुर के महेंद्र प्रताप आदि किसानों ने भी बताईं। कहा कि शासन, प्रशासन से लेकर बैंक व बीमा कंपनी कोई भी उनके आंसू पोंछने की कोशिश नहीं कर रहा है।