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हरियाणा में बनेगा उन्नाव जैसा एफएसटीपी

Mon, 27 Dec 2021 05:57 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 27 Dec 2021 05:57 PM IST
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जलनिगम के इंजीनियर से प्लांट की तकनीकी जानकारी लेते हरियाणा राज्य के अधिकारी। संवाद - फोटो : UNNAO
उन्नाव। शहर में घरों से निकलने वाले सीवरेज (अपशिष्ट) से वायु व भूगर्भ जल प्रदूषण से निजात के लिए बनाए गए एफएसटीपी (फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) की तर्ज पर हरियाणा में एफएसटीपी की स्थापना होगी। सोमवार को हरियाणा विकास विभाग के अधिकारियों ने इसका निरीक्षण कर तकनीकी जानकारी ली।
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शहर के मकानों में सीवर टैंक या सोख्ता पिट बनाकर सीवर का भंडारण किया जाता है। टैंक भरने पर उसे नालियों में बहाया या टैंकर से दूसरे स्थानों पर नालों में फेंका जाता है। प्रदूषण के निजात के साथ ही इस अपशिष्ट से जैविक खाद, सिंचाई योग्य पानी उपलब्ध कराने के लिए जल निगम ने शहर के पास हुसैन नगर में 4.50 करोड़ की लागत से एफएसटीपी (फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट)का निर्माण कराया है। इस प्लांट में घरों के सीवर टैंक के स्लज को शोधित करके सॉलिड (ठोस) व लिक्विड को अलग किया जाता है। सॉलिड वेस्ट का प्रयोग जैविक खाद के रूप में किया जा रहा है। लिक्विड वेस्ट का फसलों की सिंचाई में प्रयोग किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के जिला परियोजना अधिकारी अभिषेक कुमार राय ने बताया कि यह उत्तर प्रदेश का पहला और देश का दूसरा अत्याधुनिक एफएसटीपी है। पहला एफएसटीपी बंगलुरू में बनाया गया था। सोमवार को हरियाणा राज्य विकास विभाग के संयुक्त निदेशक एमएस गर्ग, चीफ इंजीनियर शंकर जिंदल, सुरेंद्र, एसई राकेश गोयल, एक्सईएन रूपेश गर्ग और जसवंत सिंह ने प्लांट देखा।
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डेढ़ साल पहले तैयार हुए इस शोधन संयत्र का अभी तक नगर पालिका को हैंडओवर नहीं हो पाया है। नगर पालिका इसके संचालन के लिए तकनीकी कर्मियों और संसाधनों की कमी को कारण बता रही है। फिलहाल निर्माण एजेंसी ही इसका संचालन कर रही है। इसके निर्माण में डेढ़ साल ज्यादा का वक्त लगा। 11700 वर्ग मीटर में बने इस प्लांट का निर्माण जनवरी 2019 में शुरू हुआ था और अगस्त 2020 में पूरा हुआ था। 13 किलोवाट के इस प्लांट को चलाने के लिए 25 किलोवाट का सौर ऊर्जा प्लांट लगाया गया है। नगर पालिका के प्रभारी ईओ/एसडीएम सत्यप्रिय सिंह ने बताया कि प्लांट को नियमित चलाने के लिए प्रतिदिन 15 से 20 टैंकर अपशिष्ट आवश्यक है। इसकी उपलब्धता और आउट सोर्स से तकनीकी कर्मियों की कमी को पूरा कर नियमित संचालन शुरू कराया जाएगा। 15 दिन में प्रक्रिया पूरी कर पालिका को हैंडओवर कराया जाएगा।
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