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दो फिट सड़क और गंगा में समाई, आवागमन बंद
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कटान स्थल का निरीक्षण करते एसडीएम अंकित शुक्ला व पीडब्ल्यूडी एई रितेश कटियार। संवाद
- फोटो : UNNAO
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बीघापुर। गांव गढे़वा-सिकठिया पुरवा की दो फिट सड़क और बह गई। अब एक तरफ का फुटपाथ ही बचा है। सड़क पूरी तरह कटी तो कई गांवों तक पानी पहुंच जाएगा। मंगलवार को बीघापुर एसडीएम व पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता पहुंचे और सड़क बचाने की कवायद में जुट गए।
सोमवार को गंगा की कटान के कारण चार पहिया वाहनों का आवागमन गढे़वा व सिकटिया पुरवा मार्ग बंद हो गया था। दोपहिया, पैदल व साइकिल से लोग आ-जा रहे थे। इसको देखते हुए एसडीएम अंकित शुक्ला ने आवागमन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि इसके बाद भी लोग जान जोखिम में डालकर लोग आवागमन करते रहे। मंगलवार को दो फिट सड़क और गंगा में समा गई। अगर सड़क पूरी तरह कट गई तो पास के साहिबी खेड़ा, गढ़ेवा, कर्मी, भागूखेड़ा सहित कई गांवों तक पानी पहुंच जाएगा। लगातार हो रही कटान को लेकर एसडीएम ने पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता रितेश कटियार व अवर अभियंता अखिलेश कुमार पहुंचे। सहायक अभियंता ने बताया कि पत्थर के बोल्डर और जेसीबी के माध्यम से झाड़ियों को कटवा कर सड़क को कटने से बचाने का प्रयास कर रहे हैं। गंगा नदी के बीच में रेत का बड़ा टीला बन जाने से नदी की धारा दो भागों में विभाजित हो गई है। इससे एक धारा सड़क की तरफ है। इससे सड़क कट गई है।
रोड के शेष हिस्से को बचाने के लिए उसके ऊपर बोरियों में बालू भर कर डाली जा रही है। जिओ बैग मंगलवार को आने थे लेकिन-रास्ते में गाड़ी खराब होने से अब बुधवार तक पहुंचने की संभावना है। एसडीएम अंकित शुक्ला ने बताया कि आवागमन अत्यंत खतरनाक है। इससे रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। बुधवार को सिंचाई विभाग से अभियंता आएंगे और निरीक्षण कर रोड की ओर मुड़ी गंगा की धारा को लेकर व्यवस्था बनाएंगे।
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पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता रितेश कटियार ने बताया कि उनका काम गंगा की धारा व गंगा की कटान को रोकने का नहीं है। वह अपनी सड़क को सुरक्षित और बचाने की कवायद करेंगे। गंगा में हो रही कटान के लिए सिंचाई विभाग है। फिलहाल सड़क को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। बाढ़ घटने पर सड़क बनाई जाएगी। साथ ही कंक्रीट की दीवार भी बनाई जाएगी ताकि सड़क फिर न कटे।
जिस तरह से गढे़वा में गंगा की कटान हो रही है और पुल और गढे़वा के बीच का संपर्क मार्ग कट रहा है उससे कई गांवों की भूमि गंगा में समा सकती है। गंगा कटान से संपर्क मार्ग ध्वस्त होने पर सहिबीखेड़ा, करमी, भागूखेड़ा, गंगानगर व संतनगर गांव के किनारे से सटकर गंगा बहेगी तो सहिबीखेड़ा के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो सकता है।
गढेवा गांव में गंगा में पिछले तीन वर्षों से जारी कटान का प्रशासन ने कोई संज्ञान नहीं लिया। वहीं सिंचाई विभाग कटान को लेकर संजीदा नहीं रहा। लगातार तीन वर्षों में यहां 1000 बीघा जमीन कटकर गंगा में समा गई उसके बावजूद भी प्रशासनिक कार्यवाई शून्य रही।
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सोमवार को गंगा की कटान के कारण चार पहिया वाहनों का आवागमन गढे़वा व सिकटिया पुरवा मार्ग बंद हो गया था। दोपहिया, पैदल व साइकिल से लोग आ-जा रहे थे। इसको देखते हुए एसडीएम अंकित शुक्ला ने आवागमन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि इसके बाद भी लोग जान जोखिम में डालकर लोग आवागमन करते रहे। मंगलवार को दो फिट सड़क और गंगा में समा गई। अगर सड़क पूरी तरह कट गई तो पास के साहिबी खेड़ा, गढ़ेवा, कर्मी, भागूखेड़ा सहित कई गांवों तक पानी पहुंच जाएगा। लगातार हो रही कटान को लेकर एसडीएम ने पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता रितेश कटियार व अवर अभियंता अखिलेश कुमार पहुंचे। सहायक अभियंता ने बताया कि पत्थर के बोल्डर और जेसीबी के माध्यम से झाड़ियों को कटवा कर सड़क को कटने से बचाने का प्रयास कर रहे हैं। गंगा नदी के बीच में रेत का बड़ा टीला बन जाने से नदी की धारा दो भागों में विभाजित हो गई है। इससे एक धारा सड़क की तरफ है। इससे सड़क कट गई है।
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रोड के शेष हिस्से को बचाने के लिए उसके ऊपर बोरियों में बालू भर कर डाली जा रही है। जिओ बैग मंगलवार को आने थे लेकिन-रास्ते में गाड़ी खराब होने से अब बुधवार तक पहुंचने की संभावना है। एसडीएम अंकित शुक्ला ने बताया कि आवागमन अत्यंत खतरनाक है। इससे रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। बुधवार को सिंचाई विभाग से अभियंता आएंगे और निरीक्षण कर रोड की ओर मुड़ी गंगा की धारा को लेकर व्यवस्था बनाएंगे।
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पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता रितेश कटियार ने बताया कि उनका काम गंगा की धारा व गंगा की कटान को रोकने का नहीं है। वह अपनी सड़क को सुरक्षित और बचाने की कवायद करेंगे। गंगा में हो रही कटान के लिए सिंचाई विभाग है। फिलहाल सड़क को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। बाढ़ घटने पर सड़क बनाई जाएगी। साथ ही कंक्रीट की दीवार भी बनाई जाएगी ताकि सड़क फिर न कटे।
जिस तरह से गढे़वा में गंगा की कटान हो रही है और पुल और गढे़वा के बीच का संपर्क मार्ग कट रहा है उससे कई गांवों की भूमि गंगा में समा सकती है। गंगा कटान से संपर्क मार्ग ध्वस्त होने पर सहिबीखेड़ा, करमी, भागूखेड़ा, गंगानगर व संतनगर गांव के किनारे से सटकर गंगा बहेगी तो सहिबीखेड़ा के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो सकता है।
गढेवा गांव में गंगा में पिछले तीन वर्षों से जारी कटान का प्रशासन ने कोई संज्ञान नहीं लिया। वहीं सिंचाई विभाग कटान को लेकर संजीदा नहीं रहा। लगातार तीन वर्षों में यहां 1000 बीघा जमीन कटकर गंगा में समा गई उसके बावजूद भी प्रशासनिक कार्यवाई शून्य रही।