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गंगा को स्वच्छ बनाने में बजट का रोड़ा
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उन्नाव। गंगा को स्वच्छ व निर्मल बनाने के लिए डेढ़ साल पहले भेजे गए प्रस्ताव को आज तक मंजूरी नहीं मिल सकी है। इस कारण गंगाजल को पवित्र करने की सरकार की योजना ठंडे बस्ते में है।
वर्ष 2014 में पहली बार केंद्र में सरकार बनाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पवित्र गंगा को स्वच्छ व निर्मल बनाने का संकल्प लिया था। इसके लिए नमामि गंगे योजना शुरू की गई थी। योजना के तहत गंगा में गिरने वाले नालों को रोकना था। इसी कड़ी में गंगा किनारे बसे गांवों पर फोकस किया गया था। जनपद में गंगा किनारे 34 ग्राम पंचायतें बसी हुई हैं। कटरी क्षेत्र के इन गांवों के गंदे पानी व ठोस अपशिष्ट के निस्तारण की व्यवस्था करने की कवायद शुरू की गई थी। इसमें घरों से निकलने वाले गंदे पानी के लिए घरेलू व सामुदायिक सोख्ता टैंक बनाने की योजना है।
घरों का गंदा पानी सीधे टैंकों में पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी। घर के निकलने वाले ठोस अपशिष्ट (सब्जी व अन्य घरेलू सामान) के लिए वर्मी कम्पोस्ट (खाद) गड्ढे खोदे जाने थे। फरवरी 2019 में पंचायतीराज विभाग ने गंगा किनारे के सभी 34 ग्राम पंचायतों की डीपीआर तैयार की थी। रिपोर्ट में 6.30 करोड़ खर्च होने का प्रस्ताव तैयार करके मुख्यालय भेजा गया था। इस प्रस्ताव में गड्ढों की साफ-सफाई कराने में खर्च होने वाली धनराशि को भी जोड़ा गया था। डेढ़ साल से ज्यादा समय हो गया है लेकिन अभी तक प्रस्ताव मंजूर नहीं हो पाया है।
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कोट्स-
जिले से भेजे गए प्रस्ताव को अभी तक मंजूरी नहीं मिल सकी है। हालांकि अब दूसरी योजना के तहत नये सिरे से गांवों का सर्वे कराया जा रहा है। नये सिरे से सर्वे कराकर प्रस्ताव तैयार कराया जाएगा।
-राजेंद्र प्रसाद यादव, जिला पंचायतराज अधिकारी
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वर्ष 2014 में पहली बार केंद्र में सरकार बनाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पवित्र गंगा को स्वच्छ व निर्मल बनाने का संकल्प लिया था। इसके लिए नमामि गंगे योजना शुरू की गई थी। योजना के तहत गंगा में गिरने वाले नालों को रोकना था। इसी कड़ी में गंगा किनारे बसे गांवों पर फोकस किया गया था। जनपद में गंगा किनारे 34 ग्राम पंचायतें बसी हुई हैं। कटरी क्षेत्र के इन गांवों के गंदे पानी व ठोस अपशिष्ट के निस्तारण की व्यवस्था करने की कवायद शुरू की गई थी। इसमें घरों से निकलने वाले गंदे पानी के लिए घरेलू व सामुदायिक सोख्ता टैंक बनाने की योजना है।
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घरों का गंदा पानी सीधे टैंकों में पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी। घर के निकलने वाले ठोस अपशिष्ट (सब्जी व अन्य घरेलू सामान) के लिए वर्मी कम्पोस्ट (खाद) गड्ढे खोदे जाने थे। फरवरी 2019 में पंचायतीराज विभाग ने गंगा किनारे के सभी 34 ग्राम पंचायतों की डीपीआर तैयार की थी। रिपोर्ट में 6.30 करोड़ खर्च होने का प्रस्ताव तैयार करके मुख्यालय भेजा गया था। इस प्रस्ताव में गड्ढों की साफ-सफाई कराने में खर्च होने वाली धनराशि को भी जोड़ा गया था। डेढ़ साल से ज्यादा समय हो गया है लेकिन अभी तक प्रस्ताव मंजूर नहीं हो पाया है।
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जिले से भेजे गए प्रस्ताव को अभी तक मंजूरी नहीं मिल सकी है। हालांकि अब दूसरी योजना के तहत नये सिरे से गांवों का सर्वे कराया जा रहा है। नये सिरे से सर्वे कराकर प्रस्ताव तैयार कराया जाएगा।
-राजेंद्र प्रसाद यादव, जिला पंचायतराज अधिकारी