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बच्चे भी लड़ रहे कोरोना से जंग
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उन्नाव। मौरावां ब्लॉक के सरवन गांव में बच्चों ने बड़ों की सेहत बचाने के लिए गोलक में जमा कई गई रकम से मास्क तैयार कर भेंट किए। रुपये कम पड़े तो माता-पिता ने भी उनका सहयोग किया।
सरवन गांव निवासी कक्षा आठ के छात्र अंकुर कुशवाहा के पिता सूर्य प्रकाश और मां बीना कपड़े सिलने का काम करते हैं। अंकुर के साथ पढ़ने वाली सादिया सिद्दीकी व असगर सिद्दीकी पढ़ाई के साथ सिलाई भी सीखते हैं। जनता पूर्व माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य नीरज मिश्रा, शिक्षक प्रभात सिन्हा ने जनता कर्फ्यू के बाद से मास्क पहनने, हाथ धुलने और सोशल डिस्टेंसिंग का महत्व समझाया। घर पहुंचे अंकुर ने कपड़े कतरन से अपने व अपने दोस्तों के लिए मास्क सिले। इसके बाद अपनी गोलक तोड़कर एक हजार रुपये जुटाए और गांव वालों के लिए मास्क तैयार किए।
बच्चों का सेवाभाव देखकर टेलरिंग का काम करने वाले सूर्यप्रकाश कुशवाहा ने भी उनका साथ दिया। मास्क के लिए मोटा कपड़ा कम पड़ा तो उन्होंने हल्का इंचार्ज दरोगा की मदद से कालूखेड़ा स्थित एक दुकान को खुलवाकर पांच मीटर कपड़ा और खरीदा। इसके बाद अंकुर ने दिन-रात मेहनत करके 400 गांव वालों के लिए मास्क सिले। इसके बाद अपने साथी सादिया व असगर के संग लोगों को वितरित किए। शिक्षक प्रभात सिन्हा ने बताया कि इन बच्चों के जज्बे को सलाम करते हुए शेर पढ़ा कि ‘गमों की जांच पर आंसू बनकर देखो, बनेंगे रंग किसी पर डाल कर देखो। तुम्हारे दिल की चुभन जरूर कम होगी, किसी के पांव से कांटा निकाल कर देखो।
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सरवन गांव निवासी कक्षा आठ के छात्र अंकुर कुशवाहा के पिता सूर्य प्रकाश और मां बीना कपड़े सिलने का काम करते हैं। अंकुर के साथ पढ़ने वाली सादिया सिद्दीकी व असगर सिद्दीकी पढ़ाई के साथ सिलाई भी सीखते हैं। जनता पूर्व माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य नीरज मिश्रा, शिक्षक प्रभात सिन्हा ने जनता कर्फ्यू के बाद से मास्क पहनने, हाथ धुलने और सोशल डिस्टेंसिंग का महत्व समझाया। घर पहुंचे अंकुर ने कपड़े कतरन से अपने व अपने दोस्तों के लिए मास्क सिले। इसके बाद अपनी गोलक तोड़कर एक हजार रुपये जुटाए और गांव वालों के लिए मास्क तैयार किए।
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बच्चों का सेवाभाव देखकर टेलरिंग का काम करने वाले सूर्यप्रकाश कुशवाहा ने भी उनका साथ दिया। मास्क के लिए मोटा कपड़ा कम पड़ा तो उन्होंने हल्का इंचार्ज दरोगा की मदद से कालूखेड़ा स्थित एक दुकान को खुलवाकर पांच मीटर कपड़ा और खरीदा। इसके बाद अंकुर ने दिन-रात मेहनत करके 400 गांव वालों के लिए मास्क सिले। इसके बाद अपने साथी सादिया व असगर के संग लोगों को वितरित किए। शिक्षक प्रभात सिन्हा ने बताया कि इन बच्चों के जज्बे को सलाम करते हुए शेर पढ़ा कि ‘गमों की जांच पर आंसू बनकर देखो, बनेंगे रंग किसी पर डाल कर देखो। तुम्हारे दिल की चुभन जरूर कम होगी, किसी के पांव से कांटा निकाल कर देखो।
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