{"_id":"688d1cad57d5578a51038e40","slug":"bought-computer-by-taking-loan-of-rs-40-thousand-from-group-making-children-proficient-unnao-news-c-221-1-sknp1054-134870-2025-08-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Unnao News: समूह से 40 हजार का ऋण लेकर खरीदे कंप्यूटर, बच्चों को कर रहीं दक्ष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Unnao News: समूह से 40 हजार का ऋण लेकर खरीदे कंप्यूटर, बच्चों को कर रहीं दक्ष
Sat, 02 Aug 2025 01:29 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
Updated Sat, 02 Aug 2025 01:29 AM IST
विज्ञापन
बच्चों को कंप्यूटर का प्रशिक्षण देतीं ममता।
- फोटो : बच्चों को कंप्यूटर का प्रशिक्षण देतीं ममता।
असोहा (उन्नाव) । नेवादा गांव की ममता गरीब बच्चों को कम फीस में कंप्यूटर में दक्ष कर रही हैं। उनके प्रयास से गांव के बच्चों को कंप्यूटर सीखने के लिए कहीं बाहर नहीं जाना पड़ रहा है। घर के पास ही कंप्यूटर का ज्ञान मिल रहा है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत विकासखंड के नेवादा की रहने वाली ममता ने गांव की सुनीता, सुषमा, जयश्री, रीता, रामजानकी, फूलमती, महारानी और प्रकाशनी आदि को जोड़कर सरस्वती महिला समूह का गठन किया। समूह के माध्यम से अध्यक्ष ममता ने 40 हजार का ऋण लेकर दो कंप्यूटर खरीदे। इसके बाद गांव के बच्चों को कंप्यूटर की शिक्षा देना शुरू किया।
ममता ने बताया कि शुरू में कम संसाधन होने से समस्याओं का सामना करना पड़ा। धीरे-धीरे संसाधन बढ़ाए तो बच्चों की भी संख्या बढ़ने लगी। इसके बाद उन्होंने कंप्यूटरों की संख्या बढ़ाकर तीन कर ली। इस समय 30 बच्चे कंप्यूटर सीख रहे हैं। वह प्रति बच्चे 300 रुपये की फीस लेती हैं। इससे उनका खर्च आसानी से निकल रहा है। बताया कि भविष्य में बच्चों की संख्या और बढ़ सकती है। आसपास के गांवों के लोग बच्चों को कंप्यूटर सिखाने के लिए उनसे संपर्क कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत विकासखंड के नेवादा की रहने वाली ममता ने गांव की सुनीता, सुषमा, जयश्री, रीता, रामजानकी, फूलमती, महारानी और प्रकाशनी आदि को जोड़कर सरस्वती महिला समूह का गठन किया। समूह के माध्यम से अध्यक्ष ममता ने 40 हजार का ऋण लेकर दो कंप्यूटर खरीदे। इसके बाद गांव के बच्चों को कंप्यूटर की शिक्षा देना शुरू किया।
विज्ञापन
ममता ने बताया कि शुरू में कम संसाधन होने से समस्याओं का सामना करना पड़ा। धीरे-धीरे संसाधन बढ़ाए तो बच्चों की भी संख्या बढ़ने लगी। इसके बाद उन्होंने कंप्यूटरों की संख्या बढ़ाकर तीन कर ली। इस समय 30 बच्चे कंप्यूटर सीख रहे हैं। वह प्रति बच्चे 300 रुपये की फीस लेती हैं। इससे उनका खर्च आसानी से निकल रहा है। बताया कि भविष्य में बच्चों की संख्या और बढ़ सकती है। आसपास के गांवों के लोग बच्चों को कंप्यूटर सिखाने के लिए उनसे संपर्क कर रहे हैं।
विज्ञापन