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यादों में नामकरण: उन्नाव के भगवती बाबू ने बनाया था युसुफ खान को दिलीप कुमार, जानिए कैसे बदला था नाम
Thu, 08 Jul 2021 11:35 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 08 Jul 2021 11:35 PM IST
सार
यूसुफ खान से दिलीप कुमार बनाने में उन्नाव की अहम भूमिका रही है। नायक की भूमिका में अपनी पहली फिल्म करने वाले यूसुफ खान को दिलीप नाम बाबू भगवतीचरण वर्मा ने ही दिया था।
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dilip kumar
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विस्तार
दिवंगत मशहूर फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार को यूसुफ खान से दिलीप कुमार बनाने में उन्नाव की अहम भूमिका रही है। सफीपुर कस्बे में जन्मे विख्यात लेखक व साहित्यकार बाबू भगवतीचरण वर्मा द्वारा लिखित ज्वार भाटा फिल्म से 1944 में दिलीप कुमार को फिल्म इंडसट्री में ब्रेक मिला।
नायक की भूमिका में अपनी पहली फिल्म करने वाले यूसुफ खान को दिलीप नाम बाबू भगवतीचरण वर्मा ने ही दिया था। फिल्म हिट हुई और यूसुफ हमेशा के लिए दिलीप हो गए। साहित्यकार बाबू भगवती चरण वर्मा का जन्म 30 अगस्त 1903 को सफीपुर कस्बे मे हुआ था।
उनके पिता एडवोकेट देवीचरण वर्मा मूल रूप से कानपुर के पटकापुर के रहने वाले थे। लेकिन दो संतानों चतुर्भुज और हरिश्चन्द्र के निधन के बाद एक आचार्य ने उन्हें स्थान बदलने की सलाह दी। मोहल्ला बबरअली खेड़ा में किराए पर रहे थे। बाबू भगवतीचरण वर्मा की लेखन में रुचि थी।
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नायक की भूमिका में अपनी पहली फिल्म करने वाले यूसुफ खान को दिलीप नाम बाबू भगवतीचरण वर्मा ने ही दिया था। फिल्म हिट हुई और यूसुफ हमेशा के लिए दिलीप हो गए। साहित्यकार बाबू भगवती चरण वर्मा का जन्म 30 अगस्त 1903 को सफीपुर कस्बे मे हुआ था।
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उनके पिता एडवोकेट देवीचरण वर्मा मूल रूप से कानपुर के पटकापुर के रहने वाले थे। लेकिन दो संतानों चतुर्भुज और हरिश्चन्द्र के निधन के बाद एक आचार्य ने उन्हें स्थान बदलने की सलाह दी। मोहल्ला बबरअली खेड़ा में किराए पर रहे थे। बाबू भगवतीचरण वर्मा की लेखन में रुचि थी।
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वह पत्रकारिता क्षेत्र में गए और फिर साहित्य से उनका गहरा नाता हो गया। उनकी लिखी कहानी मोर्चाबंदी, इंस्टालमेंट काफी मशहूर हुईं। उपन्यासों में चित्रलेखा, तीन वर्ष, पतंग, सहित अन्य उपन्यास मशहूर हुए। चित्रलेखा हिंदी की चुनिंदा सर्वाधिक बिक्री करने वाले उपन्यासों में शामिल है और इस पर फिल्म भी बनी थी और भगवतीचरण वर्मा ने 1942 से 47 तक मुंबई में रहकर फिल्मों के लिए कहानियां लिखीं।
वर्ष 1944 में ज्वार-भाटा फिल्म से सिनेमा जगत में कदम रखने वाले यूसुफ खान ने इस फिल्म में नायक की भूमिका निभाई और हमेशा के लिए दिलीप कुमार बनकर फिल्म जगत का जगमगाता सितारा बन गए। भगवतीचरण वर्मा को साहित्य अकादमी पुरस्कार और पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया। 5 अक्तूबर 81 को उनका निधन हो गया।
तीन में से चुना दिलीप नाम
बीघापुर निवासी कवि व साहित्यकार डॉ. मान सिंह ने बताया कि फिल्म लेखक अशोक राज ने अपनी पुस्तक हीरो’ में लिखा है कि प्रसिद्ध लेखक भगवतीचरण वर्मा ने यूसुफ को दिलीप नाम दिया था। बांबे टाकीज स्टूडियो की मालिक देविका रानी ने ज्वार भाटा फिल्म के लिए यूसुफ खान के तीन नाम सुझाए थे। इनमें दिलीप, वासुदेव और जहांगीर नाम शामिल थे। लेकिन भगवती चरण वर्मा ने दिलीप पर सहमति जताई थी।
वर्ष 1944 में ज्वार-भाटा फिल्म से सिनेमा जगत में कदम रखने वाले यूसुफ खान ने इस फिल्म में नायक की भूमिका निभाई और हमेशा के लिए दिलीप कुमार बनकर फिल्म जगत का जगमगाता सितारा बन गए। भगवतीचरण वर्मा को साहित्य अकादमी पुरस्कार और पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया। 5 अक्तूबर 81 को उनका निधन हो गया।
तीन में से चुना दिलीप नाम
बीघापुर निवासी कवि व साहित्यकार डॉ. मान सिंह ने बताया कि फिल्म लेखक अशोक राज ने अपनी पुस्तक हीरो’ में लिखा है कि प्रसिद्ध लेखक भगवतीचरण वर्मा ने यूसुफ को दिलीप नाम दिया था। बांबे टाकीज स्टूडियो की मालिक देविका रानी ने ज्वार भाटा फिल्म के लिए यूसुफ खान के तीन नाम सुझाए थे। इनमें दिलीप, वासुदेव और जहांगीर नाम शामिल थे। लेकिन भगवती चरण वर्मा ने दिलीप पर सहमति जताई थी।