{"_id":"6852f9f51b58afc831098317","slug":"an-old-man-returning-from-bank-after-withdrawing-money-was-strangled-to-death-unnao-news-c-221-1-uno1001-132815-2025-06-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Unnao News: बैंक से रुपये निकालकर लौट रहे वृद्ध की गला घोटकर हत्या","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Unnao News: बैंक से रुपये निकालकर लौट रहे वृद्ध की गला घोटकर हत्या
विज्ञापन
चकलवंशी (उन्नाव)। बैंक से 30 हजार रुपये निकालकर मंगलवार को ऑटो से लौटे रहे बिरसिंहपुर गांव निवासी वृद्ध की गला घोटकर हत्या कर दी गई।
शव गांव के पास ही झाड़ियों में फेंक दिया गया। परिजन तलाश कर रहे थे तभी बुधवार सुबह चरवाहों ने शव देखा तो परिजनों को सूचना दी। मृतक के दाहिने पैर की तीन अंगुलियां जानवर खा गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोटकर हत्या की पुष्टि हुई है। वृद्ध जिस ऑटो को बुक करके बैंक गया था, उसका चालक और चालक का साथी लापता है। मृतक के भतीजे ने दोनों के खिलाफ तहरीर दी।
माखी थानाक्षेत्र के बिरसिंहपुर निवासी लालाराम बाजपेई (60) की शादी नहीं हुई थी। जीवन यापन करने के लिए कभी लस्सी, जूस बेचने तो कभी किसी दुकान में काम करते थे। भतीजे आशीष ने बताया कि चाचा लालाराम ने बहुत पहले दही चौकी स्थित एक कंपनी में सात साल नौकरी की थी। कुछ दिन पहले बैंक खाते में उसी का 50 हजार प्रॉविडेंट फंड आया था। मंगलवार सुबह गांव के निर्भय सिंह के ऑटो को बुक करके वह उन्नाव शहर स्थित इलाहाबाद बैंक गए थे। बैंक से उन्हें 30 हजार रुपये निकालने थे। भतीजे के मुताबिक चाचा की शराब की लत को देखते हुए मां शांती देवी (आशीष की मां) ने रुपये निकालने के बाद रास्ते में कहीं न रुकने की बात कही थी। बैंक से रुपये निकालने के बाद सुबह 11:25 बजे चाचा ने मां को फोन करके खाते से 30 हजार रुपये निकालने और कुछ देर में घर पहुंचने की बात बताई थी।
उन्होंने यह भी पूछा था कि सब्जी तो नहीं लानी है, लेकिन मां ने मना करते हुए सीधे घर आने को कहा। वह दोपहर ढाई बजे तक घर नहीं पहुंचे तो मां ने चाचा लालाराम को फोन मिलाया तो वह स्विच ऑफ था। मां ने आशीष को बताया। उस समय आशीष भाई अनीष के साथ दही चौकी स्थित फैक्टरी में ड्यूटी पर था। शाम छह बजे घर पहुंचा और चाचा की तलाश शुरू की, लेकिन रात 10 बजे तक कुछ पता नहीं चला।
विज्ञापन
ऑटो चालक निर्भय से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो जानकारी हुई कि वह भी घर नहीं आया। बाद में पता चला कि निर्भय के पिता, लावारिस हालत में ऑटो कहीं से लेकर आए हैं। निर्भय का साथी दयाराम भी लापता है। बुधवार सुबह करीब 11:30 बजे गांव से 500 मीटर दूर फतेहबहादुर सिंह के यूकेलिप्टस की बाग में झाड़ी के बीच लालाराम का शव पड़ा होने की सूचना मिली। परिजन मौके पर पहुंचे तो नाक पर चोट और गले में दबाने के निशान दिखे। दाहिने पैर की तीन अंगुलियां गलियां जंगली जानवर खा गए थे। उनके पास से रुपये, आधार कार्ड, पासबुक और मोबाइल फोन भी नहीं मिला। भतीजे आशीष ने ऑटो चालक और उसके दोस्त के खिलाफ चाचा की हत्या करने की तहरीर दी।
थानाध्यक्ष संदीप मिश्र ने बताया कि परिजन अंतिम संस्कार करने गए हैं, उनके आने के बाद रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। ऑटो चालक और उसका साथी फरार है। उनका भी पता लगाया जा रहा है।
विज्ञापन
शव गांव के पास ही झाड़ियों में फेंक दिया गया। परिजन तलाश कर रहे थे तभी बुधवार सुबह चरवाहों ने शव देखा तो परिजनों को सूचना दी। मृतक के दाहिने पैर की तीन अंगुलियां जानवर खा गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोटकर हत्या की पुष्टि हुई है। वृद्ध जिस ऑटो को बुक करके बैंक गया था, उसका चालक और चालक का साथी लापता है। मृतक के भतीजे ने दोनों के खिलाफ तहरीर दी।
माखी थानाक्षेत्र के बिरसिंहपुर निवासी लालाराम बाजपेई (60) की शादी नहीं हुई थी। जीवन यापन करने के लिए कभी लस्सी, जूस बेचने तो कभी किसी दुकान में काम करते थे। भतीजे आशीष ने बताया कि चाचा लालाराम ने बहुत पहले दही चौकी स्थित एक कंपनी में सात साल नौकरी की थी। कुछ दिन पहले बैंक खाते में उसी का 50 हजार प्रॉविडेंट फंड आया था। मंगलवार सुबह गांव के निर्भय सिंह के ऑटो को बुक करके वह उन्नाव शहर स्थित इलाहाबाद बैंक गए थे। बैंक से उन्हें 30 हजार रुपये निकालने थे। भतीजे के मुताबिक चाचा की शराब की लत को देखते हुए मां शांती देवी (आशीष की मां) ने रुपये निकालने के बाद रास्ते में कहीं न रुकने की बात कही थी। बैंक से रुपये निकालने के बाद सुबह 11:25 बजे चाचा ने मां को फोन करके खाते से 30 हजार रुपये निकालने और कुछ देर में घर पहुंचने की बात बताई थी।
विज्ञापन
उन्होंने यह भी पूछा था कि सब्जी तो नहीं लानी है, लेकिन मां ने मना करते हुए सीधे घर आने को कहा। वह दोपहर ढाई बजे तक घर नहीं पहुंचे तो मां ने चाचा लालाराम को फोन मिलाया तो वह स्विच ऑफ था। मां ने आशीष को बताया। उस समय आशीष भाई अनीष के साथ दही चौकी स्थित फैक्टरी में ड्यूटी पर था। शाम छह बजे घर पहुंचा और चाचा की तलाश शुरू की, लेकिन रात 10 बजे तक कुछ पता नहीं चला।
विज्ञापन
ऑटो चालक निर्भय से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो जानकारी हुई कि वह भी घर नहीं आया। बाद में पता चला कि निर्भय के पिता, लावारिस हालत में ऑटो कहीं से लेकर आए हैं। निर्भय का साथी दयाराम भी लापता है। बुधवार सुबह करीब 11:30 बजे गांव से 500 मीटर दूर फतेहबहादुर सिंह के यूकेलिप्टस की बाग में झाड़ी के बीच लालाराम का शव पड़ा होने की सूचना मिली। परिजन मौके पर पहुंचे तो नाक पर चोट और गले में दबाने के निशान दिखे। दाहिने पैर की तीन अंगुलियां गलियां जंगली जानवर खा गए थे। उनके पास से रुपये, आधार कार्ड, पासबुक और मोबाइल फोन भी नहीं मिला। भतीजे आशीष ने ऑटो चालक और उसके दोस्त के खिलाफ चाचा की हत्या करने की तहरीर दी।
थानाध्यक्ष संदीप मिश्र ने बताया कि परिजन अंतिम संस्कार करने गए हैं, उनके आने के बाद रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। ऑटो चालक और उसका साथी फरार है। उनका भी पता लगाया जा रहा है।